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रिटायर्ड फौजी ने खुद को गोली मारकर की आत्महत्या
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मृतक वीरेन्द्र चौंहान ऊर्फ विकास की फाइल फोटो।
- फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। एक सेवानिवृत्त फौजी ने अपने घर में ही लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मार ली। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव उसके पिता को सौंप दिया है। बता दें कि फौजी की बड़े भाई की एक सप्ताह पहले ही संदिग्ध हालात में मौत हुई थी।
जसपुर के ग्राम धर्मपुर निवासी वीरेंद्र चौहान उर्फ विकास (38) पुत्र नरेश सिंह 16 कुमाऊं रेजीमेंट में सिपाही के पद से डेढ़ वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने ढकिया गुलाबों में छीना फार्म के पास प्लॉट लेकर मकान बनाया था। यहां पर वह अपनी पत्नि सीमा और आठ साल के बेटे वासु के साथ रहते थे। शुक्रवार सुबह पौने आठ बजे पत्नी सीमा पूजा घर पर ही थीं। इसी दौरान छत पर फायर की आवाज सुनाई दी। सीमा ने ऊपर जाकर देखा तो विकास का खून से लथपथ शव पड़ा था। पास में ही उनकी 315 बोर की लाइसेंसी रिवाल्वर भी पड़ी थी। उन्होंने गले से गोली सटाकर फायर किया था। सीमा ने इस बारे में पड़ोसियों को जानकारी दी। सूचना पर सीओ मनोज ठाकुर, एसएसआई सतीश कापड़ी और टांडा चौकी में तैनात एसआई जावेद मलिक मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और वारदात में प्रयुक्त रायफल भी कब्जे में ले ली है। एसएसआई कापड़ी ने बताया कि मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
हफ्ते भर में हो गई दोनों जवान बेटों की मौत
काशीपुर। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े भाई की मौत का सदमा वीरेंद्र बर्दाश्त नही कर सका। मानसिक तनाव के चलते उसने खुद को गोली मार ली। इस हादसे से उनके पैतृक गांव धर्मपुर में कोहराम मचा हुआ है। ग्राम धर्मपुर, जसपुर निवासी नरेश सिंह की गांव में दस एकड़ खेती की जमीन है। बड़ा बेटा विजेंद्र उर्फ विक्की (40) पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बटाता था। विजेंद्र के भी 10 साल का एक बेटा है। विजेंद्र को दौरे पड़ते थे, जिसके चलते उसे कई बार चोट भी लग जाती थी। 26 अगस्त को विजेंद्र अचानक घर से गायब हो गया। काफी ढूंढखोज के बाद भी उसके बारे में कोई जानकारी नही मिल सकी। 28 अगस्त को उसका शव भूतपुरी (अफजलगढ़) के पुल के पास नाले में पड़ा मिला। बड़े भाई की संदिग्ध हालात में मौत के बाद वीरेंद्र खुद को अकेला महसूस करता था। पिछले एक सप्ताह से वह मानसिक अवसाद की स्थिति में था। लोगों का आरोप है कि इसी कारण शुक्रवार को उन्होंने आत्महत्या कर ली। एक हफ्ते के भीतर दोनों बेटों की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। जवान बेटंो की असामयिक मौत से बूढ़ी दादी के अलावा मां मालती चौहान व पिता नरेश चौहान का रो रोकर बुरा हाल है।
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जसपुर के ग्राम धर्मपुर निवासी वीरेंद्र चौहान उर्फ विकास (38) पुत्र नरेश सिंह 16 कुमाऊं रेजीमेंट में सिपाही के पद से डेढ़ वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने ढकिया गुलाबों में छीना फार्म के पास प्लॉट लेकर मकान बनाया था। यहां पर वह अपनी पत्नि सीमा और आठ साल के बेटे वासु के साथ रहते थे। शुक्रवार सुबह पौने आठ बजे पत्नी सीमा पूजा घर पर ही थीं। इसी दौरान छत पर फायर की आवाज सुनाई दी। सीमा ने ऊपर जाकर देखा तो विकास का खून से लथपथ शव पड़ा था। पास में ही उनकी 315 बोर की लाइसेंसी रिवाल्वर भी पड़ी थी। उन्होंने गले से गोली सटाकर फायर किया था। सीमा ने इस बारे में पड़ोसियों को जानकारी दी। सूचना पर सीओ मनोज ठाकुर, एसएसआई सतीश कापड़ी और टांडा चौकी में तैनात एसआई जावेद मलिक मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और वारदात में प्रयुक्त रायफल भी कब्जे में ले ली है। एसएसआई कापड़ी ने बताया कि मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
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हफ्ते भर में हो गई दोनों जवान बेटों की मौत
काशीपुर। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े भाई की मौत का सदमा वीरेंद्र बर्दाश्त नही कर सका। मानसिक तनाव के चलते उसने खुद को गोली मार ली। इस हादसे से उनके पैतृक गांव धर्मपुर में कोहराम मचा हुआ है। ग्राम धर्मपुर, जसपुर निवासी नरेश सिंह की गांव में दस एकड़ खेती की जमीन है। बड़ा बेटा विजेंद्र उर्फ विक्की (40) पिता के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बटाता था। विजेंद्र के भी 10 साल का एक बेटा है। विजेंद्र को दौरे पड़ते थे, जिसके चलते उसे कई बार चोट भी लग जाती थी। 26 अगस्त को विजेंद्र अचानक घर से गायब हो गया। काफी ढूंढखोज के बाद भी उसके बारे में कोई जानकारी नही मिल सकी। 28 अगस्त को उसका शव भूतपुरी (अफजलगढ़) के पुल के पास नाले में पड़ा मिला। बड़े भाई की संदिग्ध हालात में मौत के बाद वीरेंद्र खुद को अकेला महसूस करता था। पिछले एक सप्ताह से वह मानसिक अवसाद की स्थिति में था। लोगों का आरोप है कि इसी कारण शुक्रवार को उन्होंने आत्महत्या कर ली। एक हफ्ते के भीतर दोनों बेटों की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। जवान बेटंो की असामयिक मौत से बूढ़ी दादी के अलावा मां मालती चौहान व पिता नरेश चौहान का रो रोकर बुरा हाल है।
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