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पंजाबी महासभा ने बुर्जुग महिला और पुरूषों को किया सम्मानित
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खटीमा में पंजाबी परिवारों के बुर्जुग महिला एवं पुरुषों को सम्मानित करते पंजाबी महासभा के पदाधि?
- फोटो : KHATIMA
खटीमा। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में उत्तराखंड पंजाबी महासभा की ओर से मेलाघाट रोड स्थित बरातघर में पंजाबी महासभा के 70 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 50 बुजुर्ग महिला और पुरुषों को सम्मानित किया गया।
मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पंजाबी महासभा ने हमारे बुजुर्ग हमारी विरासत, हमारे बुजुर्ग हमारी पहचान, हमारे बुजुर्ग हमारा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में खटीमा क्षेत्र के आसपास के पंजाबी परिवारों के बुजुर्ग पुरुष एवं महिलाओं को शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया।
वक्ताओं ने समाज के बुजुर्गों ने 1947 में देश आजाद होने के बाद किस प्रकार देश एवं प्रदेश के विकास में अपना योगदान दिया, किस प्रकार विभाजन का दंश झेलते हुए बंटवारे की आग में जलते हुए पाकिस्तान से अपनी जान बचा कर अपनी संस्कृति को अपने समाज को बचाते हुए स्वयं अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण किया का विस्तार से उल्लेख किया।
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कार्यक्रम का संचालन करते हुए उत्तराखंड पंजाबी महासभा के प्रदेश सचिव मनोज वाधवा ने कहा कि आज इस कार्यक्रम को कराने का उद्देश्य समाज के बुजुर्गों को आने वाली पीढ़ी के साथ सामंजस्य बैठाकर किस प्रकार परिवार के बुजुर्ग और युवा पीढ़ी अपने समाज को अपने परिवार को एकजुट रख सकते हैं इस मकसद को लेकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
संरक्षक बाबूराम अरोड़ा ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरदार जनक सिंह ने की। वहां विजय अरोरा, मनोज छाबड़ा, मनोज गुलाटी, प्रदीप गुंबर, हरीश बत्रा, अश्वनी गुंबर, राजू सुनेजा, हेमंत बत्रा, राहुल अरोरा, जतिन ग्रोवर, विजय अरोरा, सरदार जेपी सिंह, ललित कुमार मारवा प्रियंका पुनियानी, दीप्ति ग्रोवर, कुलदीप गंभीर, संतोष मल्होत्रा, रेखा गुंबर, डिब्बल गुंबर, अशोक बत्रा आदि थे। संवाद
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मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पंजाबी महासभा ने हमारे बुजुर्ग हमारी विरासत, हमारे बुजुर्ग हमारी पहचान, हमारे बुजुर्ग हमारा सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में खटीमा क्षेत्र के आसपास के पंजाबी परिवारों के बुजुर्ग पुरुष एवं महिलाओं को शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया।
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वक्ताओं ने समाज के बुजुर्गों ने 1947 में देश आजाद होने के बाद किस प्रकार देश एवं प्रदेश के विकास में अपना योगदान दिया, किस प्रकार विभाजन का दंश झेलते हुए बंटवारे की आग में जलते हुए पाकिस्तान से अपनी जान बचा कर अपनी संस्कृति को अपने समाज को बचाते हुए स्वयं अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण किया का विस्तार से उल्लेख किया।
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कार्यक्रम का संचालन करते हुए उत्तराखंड पंजाबी महासभा के प्रदेश सचिव मनोज वाधवा ने कहा कि आज इस कार्यक्रम को कराने का उद्देश्य समाज के बुजुर्गों को आने वाली पीढ़ी के साथ सामंजस्य बैठाकर किस प्रकार परिवार के बुजुर्ग और युवा पीढ़ी अपने समाज को अपने परिवार को एकजुट रख सकते हैं इस मकसद को लेकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
संरक्षक बाबूराम अरोड़ा ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरदार जनक सिंह ने की। वहां विजय अरोरा, मनोज छाबड़ा, मनोज गुलाटी, प्रदीप गुंबर, हरीश बत्रा, अश्वनी गुंबर, राजू सुनेजा, हेमंत बत्रा, राहुल अरोरा, जतिन ग्रोवर, विजय अरोरा, सरदार जेपी सिंह, ललित कुमार मारवा प्रियंका पुनियानी, दीप्ति ग्रोवर, कुलदीप गंभीर, संतोष मल्होत्रा, रेखा गुंबर, डिब्बल गुंबर, अशोक बत्रा आदि थे। संवाद