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गैलरी से वार्ड के बेड में पहुंचने में लग गए साढ़े चार घंटे
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रुद्रपुर। कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ने मामलों के बाद मेडिकल कॉलेज में बने कोविड अस्पताल में भी व्यवस्थाएं पटरी से उतर रही हैं। एक चाय वाले को कोरोना संक्रमित बहन को अस्पताल की गैलरी से वार्ड में बेड तक पहुंचाने के लिए साढ़े चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान स्ट्रेचर पर ऑक्सीजन सिलिंडर के सहारे महिला जिंदगी के लिए जरूरी सांसों के लिए जूझती रही। अव्यवस्था का आलम यह रहा कि महिला की जिंदगी बचाने के लिए परिजनों को आननफानन बाजार से दो सिलिंडरों का इंतजाम करना पड़ा।
शुभ डेल्स कॉलोनी में रहने वाली 48 साल की महिला का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। आधी रात को महिला की हालत खराब होने पर उसे अन्य अस्पताल में ले जाया गया। वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर शुक्रवार की सुबह छह बजे महिला को परिजन एंबुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल ले आए। महिला के भाई और चाय बेचकर गुजारा करने वाले राजू ने बताया कि महिला को अस्पताल के भीतर प्रवेश तो मिल गया लेकिन गैलरी में रखा गया। स्ट्रेचर में लेटी उसकी बहन के लिए अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं था। उनके पास एक ऑक्सीजन सिलिंडर पहले से था और एक का इंतजाम पहले से रखा हुआ था। दोनों सिलिंडर लगने के बाद अस्पताल की ओर से मरीज को सिलिंडर मुहैया कराया गया। महिला के बेटे आशीष ने बताया कि बेहद गंभीर होने के बावजूद सामान्य वार्ड में करीब 11 बजे बेड मिल सका। उसके पिता भी कोविड आस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं। अस्पताल में कुछ और मरीजों के परिजन भी सिलिंडर के लिए परेशान थे। वहीं कुछ और मरीजों के तीमारदार भी बाहर से अस्पताल में सिलिंडर लाते नजर आए। इधर, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय जुनेजा ने बताया कि उनके पास भी एक मरीज ने सिलिंडर का इंतजाम करने के लिए फोन किया था।
ऑक्सीजन की फिलहाल कोई कमी नहीं है। मरीज को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देनी है, यह डाक्टर तय करते हैं। महिला को देर में बेड मिला, इसकी जानकारी नहीं है। मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और कोविड वार्ड में स्टाफ बढ़ाया भी जा रहा है।
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बंशीधर तिवारी, नोड अधिकारी, कोविड अस्पताल प्रबंधन
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शुभ डेल्स कॉलोनी में रहने वाली 48 साल की महिला का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। आधी रात को महिला की हालत खराब होने पर उसे अन्य अस्पताल में ले जाया गया। वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर शुक्रवार की सुबह छह बजे महिला को परिजन एंबुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल ले आए। महिला के भाई और चाय बेचकर गुजारा करने वाले राजू ने बताया कि महिला को अस्पताल के भीतर प्रवेश तो मिल गया लेकिन गैलरी में रखा गया। स्ट्रेचर में लेटी उसकी बहन के लिए अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं था। उनके पास एक ऑक्सीजन सिलिंडर पहले से था और एक का इंतजाम पहले से रखा हुआ था। दोनों सिलिंडर लगने के बाद अस्पताल की ओर से मरीज को सिलिंडर मुहैया कराया गया। महिला के बेटे आशीष ने बताया कि बेहद गंभीर होने के बावजूद सामान्य वार्ड में करीब 11 बजे बेड मिल सका। उसके पिता भी कोविड आस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं। अस्पताल में कुछ और मरीजों के परिजन भी सिलिंडर के लिए परेशान थे। वहीं कुछ और मरीजों के तीमारदार भी बाहर से अस्पताल में सिलिंडर लाते नजर आए। इधर, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय जुनेजा ने बताया कि उनके पास भी एक मरीज ने सिलिंडर का इंतजाम करने के लिए फोन किया था।
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ऑक्सीजन की फिलहाल कोई कमी नहीं है। मरीज को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देनी है, यह डाक्टर तय करते हैं। महिला को देर में बेड मिला, इसकी जानकारी नहीं है। मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और कोविड वार्ड में स्टाफ बढ़ाया भी जा रहा है।
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बंशीधर तिवारी, नोड अधिकारी, कोविड अस्पताल प्रबंधन