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Nanakmatta News: 23 साल से कागजों में सीएचस के रूप में चल रहा पीएचसी, दो साल से एंबुलेंस बनी शोपीस

Mon, 30 Oct 2023 10:29 AM IST
हीरा मेहरा वीरेंद्र तिवारी
वीरेंद्र तिवारी Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 30 Oct 2023 10:29 AM IST
सार

नानकमत्ता के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सीएचसी तो बना दिया गया लेकिन सृजित पदों पर आज तक किसी भी सर्जन या विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हुई। इससे नगर व क्षेत्र के लोगों को बाहरी शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है।

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PHC has been running as CHS on paper for 23 years in Nanakmatta
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानकमत्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य गठन के बाद से अब तक जनजाति बहुल क्षेत्र और धार्मिक नगरी में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। राज्य बना तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तो बना दिया गया लेकिन सृजित पदों पर आज तक किसी भी सर्जन या विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हुई। इससे नगर व क्षेत्र के लोगों को बाहरी शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है।

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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में दर्ज आंकड़ों पर गौर करें तो उप तहसील क्षेत्र की 30 ग्राम सभा और एक नगर पंचायत इस अस्पताल से जुड़े हैं। यहां की करीब 68974 की आबादी इस पर निर्भर है। कांग्रेस के पहले शासनकाल में पीएचसी को उच्चीकृत कर सीएचसी बनाया गया। दो नवंबर 2005 को तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तिलकराज बेहड़ ने उच्चीकृत अस्पताल के भवन का शिलान्यास किया। 
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दो एएनएम, एक हेल्थ एंड वेलनेस का पद खाली
क्षेत्र में टीकाकरण व स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 एएनएम सेंटर संचालित हैं। इनमें से टुकड़ी गांव की एएनएम का पद संबंधित की सेवानिवृत्ति के बाद खाली है। नगर के एएनएम सेंटर पर भी एएनएम नहीं है। दोनों पदों को नजदीकी एएनएम सेंटर से जोड़ रखा है। नौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में से एक सेंटर खाली पड़ा है। इस सेंटर को भी व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है। 
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रोजाना करीब 125 रोगी आते हैं अस्पताल
अस्पताल में रोजाना 100 से 125 मरीज आते हैं। करीब सौ महिलाओं की डिलीवरी होती है। सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में घर के भीतर पांच व निजी अस्पतालों में 29 और पीएचसी में 67 प्रसव किए गए। अस्पताल के अधिकांश पद खाली होने से मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। अस्पताल में दो महिला चिकित्साधिकारी, एक आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी, एक फार्मासिस्ट ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

इनमें एक महिला चिकित्सक जून से छह माह के अवकाश पर है। अस्पताल में गंभीर मरीजों के आने पर सितारगंज, खटीमा के नागरिक अस्पताल या फिर जिला अस्पताल रुद्रपुर के लिए रेफर कर दिया जाता है। दो वार्ड बॉय व दो स्वच्छक कार्यरत हैं। तीन स्टाफ नर्सों को संविदा पर रखा गया है।

दो साल से एंबुलेंस बनी शोपीस
अस्पताल की एंबुलेंस शोपीस बनकर रह गई है। अस्पताल में पिछले दो साल से ड्राइवर भी नहीं है। इसकी वजह से एंबुलेंस जड़गत हो गई है। एंबुलेंस की जरूरत पड़ने पर मरीज को निजी एंबुलेंस का ही सहारा लेना पड़ता है। 

कुत्ता भी काटे तो सितारगंज जाना होगा 
अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान मरीजों को रेफर तो किया जाता ही है, अगर कुत्ते के काटने और सांप के डसने पर कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है तो उसे मेडिकल स्टोर से एंटी रैबीज और एंटी वेनम का टीका खरीदकर लगाना पड़ता है या फिर सितारगंज सरकारी अस्पताल आना पड़ता है। 
 

सभी महत्वपूर्ण पद सृजित हैं लेकिन नियुक्ति अब तक नहीं
स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से उच्चीकृत अस्पताल में नए पद सृजित किए गए। इनमें जनरल सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, सामान्य चिकित्साधिकारी, दंत चिकित्सक, दंत सहायक, तीन स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट, लैब तकनीशियन, निश्चेतक, व अस्पताल के प्रशासनिक कार्यालय में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी, दो वार्ड बॉय एवं दो स्वच्छक के पद सृजित हुए लेकिन सृजित पदों में आज तक न तो जनरल सर्जन, न बाल रोग, न महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति हुई और न ही अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में सुविधाएं दी गईं।

अस्पताल में सर्जन और विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हो पाई। शासन से समय-समय पर मांग की जाती है। अस्पताल की अपनी कोई एंबुलेंस नहीं है। पूर्व में विधायक की ओर से एंबुलेंस दी गई थी। डेलीवेज पर ड्राइवर की व्यवस्था कर रखी है। एएनएम के खाली पदों पर जल्द नियुक्ति कराई जाएगी। -डॉ. मनोज कुमार शर्मा, सीएमओ, यूएसनगर

मैंने उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानकमत्ता का मामला कई बार विधानसभा में उठाया। मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से कई बार आश्वासन मिला और मानक के अनुसार डॉक्टर, स्टाफ की तैनाती की मांग की। शासन की ओर से डॉक्टर की शीघ्र तैनाती का सिर्फ मौखिक आश्वासन ही मिलता है। -गोपाल सिंह राणा, विधायक नानकमत्ता।

साल 2005 के कांग्रेस शासन में पीएचसी का उच्चीकरण करने की मात्र घोषणा की गई थी। मैंने अपने कार्यकाल में मानक के अनुरूप पद सृजित कराने के साथ एक्स-रे मशीन स्थापित कराई थी। कुछ डॉक्टर भी तैनात थे। डॉक्टर के खाली पदों पर नियुक्ति के लिए सीएम और स्वास्थ्य मंत्री से मिलूंगा।  -डॉ. प्रेम सिंह राणा, पूर्व विधायक, नानकमत्ता।

 

खराब हो रही चर्म की सेहत, मर्म समझने के लिए डॉक्टर नहीं
जिले में बढ़ते प्रदूषण के चलते लोग त्वचा संबंधी रोगों की चपेट में आ रहे हैं लेकिन जिले के किसी अस्पताल में त्वचा संबंधी रोगों के इलाज के लिए विशेषज्ञ नियुक्त नहीं है। जिसके चलते गरीब तबके का मरीज जहां फिजिशियन से दवा ले रहा है, वहीं आर्थिक रूप से समक्ष मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करा रहा है।

त्वचा संबंधी रोगों के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज के इंतजाम नहीं है। जिला अस्पताल में वर्तमान में त्वचा रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। त्वचा संबंधी रोग से ग्रसित मरीज फिजिशियन से दवा ले रहे हैं। फिजिशियन डॉ. इमरान मलिक के अनुसार रोजाना त्वचा से संबंधित 30-40 मरीज यहां तैनात दो फिजिशियन के पास इलाज के लिए आ रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ ना होने के कारण कईं गंभीर मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

जिले में एक्यूआई 175 तक पहुंचा
जिले में बढ़ते प्रदूषण के चलते एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 175 तक पहुंच जा चुका है। 175 एक्यूआई को अत्यधिक अस्वास्थ्यकर की श्रेणी में रखा जाता है। 175 एक्यूआई में उद्योगों, वाहन से हाेने वाले प्रदूषण के कारण हवा में 2.5 माइक्रोन में सूक्ष्म कणिक तत्व मौजूद रहते हैं। इन सूक्ष्म कणों में भारी धातु ओर आर्सेनिक जैसे घातक तत्व मौजूद रहते हैं। यह सूक्ष्म आकार के कारण इंसानी त्वचा के सुरक्षा कवच में प्रवेश कर जाते हैं। इससे त्वचा की सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है और त्वचा संबंधित  एकने, सोरासिस, एक्जेमा और स्कीन कैंसर जैसे घातक रोग हो सकते हैं।

नियमित प्रक्रिया के रूप में डॉक्टरों की व्यवस्थाओं के बारे में पूछा जाता है। इसमे नियमित रूप से निदेशालय से निरंतर रूप से एक त्वचा रोग विशेषज्ञ की मांग की जाती है। मरीजों की समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जा रही है। जैसे ही निदेशालय डॉक्टर उपलब्ध कराएगा, इलाज की सुविधा शुरू की जाएगी। -आरके सिन्हा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
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