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Udham Singh Nagar News: बारिश में डिपो का फर्श कम गड्ढे अधिक नजर आते हैं
Tue, 15 Jul 2025 12:28 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 15 Jul 2025 12:28 AM IST
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काशीपुर। आरओबी बनने से रोडवेज परिसर का हाल बदहाल हो गया है। पूरे परिसर में इतने गड्ढे हो गए हैं कि यहां आने-जाने वाली सवारियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बारिश के दौरान तो बुरे हालत हो जाते हैं।
काशीपुरवासियों के लिए रोडवेज बसों की सुविधा देने के लिए वर्ष 1982 में बनाया गया रोडवेज बस स्टेशन समय गुजरने के साथ अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। रोडवेज बस स्टेशन बनने के बाद इसकी विभाग की ओर से कोई खास देखरेख नहीं की गई जिससे यह अब जीर्णशीर्ण हालत में पहुंचने लगा है।
वर्ष 2017 में काशीपुर के महाराणा प्रताप चौक पर आरओबी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद से इस डिपो परिसर के हालत और ज्यादा बुरे होने लगे। कार्यदायी ठेकेदार कंपनी ने डिपो परिसर के एक हिस्से को अपनी निर्माण सामग्री का गोदाम बना लिया था। ऐसे में यहां भारी वाहनों की आवाजाही होने से परिसर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।
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अब तो हालत यह हो गए हैं, कि डिपो परिसर में फर्श कम गड्ढे अधिक नजर आते हैं। गड्ढे भी इतने गहरे-गहरे हैं कि बसें हिचकोले खाती हैं। साथ ही यहां आने वाले यात्रियों को इन गड्ढों से बचना मुश्किल हो जाता है। परिसर में बनी कार्यशाला का फर्श भी पूरी तरह से गड्ढा युक्त हो गया है। पूरे परिसर में गड्ढे ही गड्ढे नजर आएंगे। कार्यशाला का मुख्य द्वार क्षतिग्रस्त हो चुका है। संवाद
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काशीपुरवासियों के लिए रोडवेज बसों की सुविधा देने के लिए वर्ष 1982 में बनाया गया रोडवेज बस स्टेशन समय गुजरने के साथ अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। रोडवेज बस स्टेशन बनने के बाद इसकी विभाग की ओर से कोई खास देखरेख नहीं की गई जिससे यह अब जीर्णशीर्ण हालत में पहुंचने लगा है।
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वर्ष 2017 में काशीपुर के महाराणा प्रताप चौक पर आरओबी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद से इस डिपो परिसर के हालत और ज्यादा बुरे होने लगे। कार्यदायी ठेकेदार कंपनी ने डिपो परिसर के एक हिस्से को अपनी निर्माण सामग्री का गोदाम बना लिया था। ऐसे में यहां भारी वाहनों की आवाजाही होने से परिसर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।
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अब तो हालत यह हो गए हैं, कि डिपो परिसर में फर्श कम गड्ढे अधिक नजर आते हैं। गड्ढे भी इतने गहरे-गहरे हैं कि बसें हिचकोले खाती हैं। साथ ही यहां आने वाले यात्रियों को इन गड्ढों से बचना मुश्किल हो जाता है। परिसर में बनी कार्यशाला का फर्श भी पूरी तरह से गड्ढा युक्त हो गया है। पूरे परिसर में गड्ढे ही गड्ढे नजर आएंगे। कार्यशाला का मुख्य द्वार क्षतिग्रस्त हो चुका है। संवाद