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दाल खरीदने पर ही मिलेगा गेहूं व चावल
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इस्माइल
- फोटो : RUDRAPUR
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जिला पूर्ति अधिकारी के फरमान नेे राशन कार्डधारकों के माथे पर बल ला दिया है। सस्ता-गल्ला की दुकानों पर दाल खरीदना अनिवार्य कर दिया है। दाल खरीदने के बाद ही कार्ड धारकों को गेहूं और चावल दिया जा रहा है। पूर्ति विभाग के आदेश से कार्ड धारकों में नाराजगी है।
जिले में चार लाख से अधिक एपीएल, बीपीएल व अंत्योदय कार्डधारकों को गेहूं, चावल और उड़द की दाल बांटी जाती है। एपीएल कार्ड धारकों को प्रत्येक यूनिट पर ढाई किलो चावल, पांच किलो गेहूं, एक से दो किलो दाल, बीपीएल कार्ड धारकों को प्रत्येक यूनिट पर तीन किलो चावल, दो किलो गेहूं, एक से दो किलो दाल मिलती है। अंत्योदय कार्ड धारकों को प्रत्येक यूनिट पर 21 किलो चावल, 13 किलो गेहूं व एक से दो किलो दाल दी जाती है।
दाल खरीदने के लिए कार्डधारक को 80 से 84 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च करना पड़ता है। प्रत्येक महीने में गेहूं और चावल लेने वाले अधिकतर कार्ड धारक दाल नहीं खरीद रहे थे। दाल के डंप होने पर सड़ने का खतरा हो गया है। इसके चलते डीएसओ ने दाल को खरीदने पर ही गेहूं व चावल देने के आदेश दे दिए थे। इस आदेश का कार्ड धारकों ने विरोध किया है।
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उनका कहना है कि इस आदेश से गरीब परिवारों को परेशानी हो रही है। डीएसओ श्याम आर्या ने बताया कि कई राशन विक्रेता स्टॉक से दाल नहीं उठा रहे थे। इसी वजह से दाल खरीदना अनिवार्य किया था। राशन विक्रेता भी दाल खरीदने पर गेहूं, चावल लेने को कह रहे हैं।
- सस्ता-गल्ला विक्रेता गेहूं, चावल खरीदने से पहले दाल लेने को कह रहे हैं। दाल की गुणवत्ता सही नहीं होने पर उसे नहीं खरीदा जाता है तो गेहूं व चावल देने के लिए मना कर देते हैं। राशन नहीं मिलने पर परिवार का गुजारा करने में दिक्कत आ रही है। स्माइल, खेड़ा
- दाल को अनिवार्य रूप से खरीदने का आदेश समाप्त होना चाहिए। कई लोग दाल नहीं खरीदना चाहते हैं। दाल के रेट 80 रुपये से अधिक हैं। इतने में गेहूं और चावल दोनों मिल जाता है। अर्जुन पाल, शिवनगर
- जिला पूर्ति कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी चलती है। लंबे समय से राशन कार्ड बनाने के लिए चक्कर लगा रही हूं लेकिन आज तक राशन कार्ड नहीं बना। गरीबों को राशन देने पर अब दाल लेना जरूरी करना गलत है। रीना शर्मा, प्रीतविहार
- सस्ता-गल्ला की दुकानों पर राशन देने पर मनमानी की जा रही है। कुछ लोगों को गेहूं, चावल दिया जा रहा है। वह गेहूं, चावल लेने के लिए दुकान पर गई तो पहले दाल खरीदने के लिए कह दिया। मीना देवी, प्रीतविहार
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जिले में चार लाख से अधिक एपीएल, बीपीएल व अंत्योदय कार्डधारकों को गेहूं, चावल और उड़द की दाल बांटी जाती है। एपीएल कार्ड धारकों को प्रत्येक यूनिट पर ढाई किलो चावल, पांच किलो गेहूं, एक से दो किलो दाल, बीपीएल कार्ड धारकों को प्रत्येक यूनिट पर तीन किलो चावल, दो किलो गेहूं, एक से दो किलो दाल मिलती है। अंत्योदय कार्ड धारकों को प्रत्येक यूनिट पर 21 किलो चावल, 13 किलो गेहूं व एक से दो किलो दाल दी जाती है।
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दाल खरीदने के लिए कार्डधारक को 80 से 84 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च करना पड़ता है। प्रत्येक महीने में गेहूं और चावल लेने वाले अधिकतर कार्ड धारक दाल नहीं खरीद रहे थे। दाल के डंप होने पर सड़ने का खतरा हो गया है। इसके चलते डीएसओ ने दाल को खरीदने पर ही गेहूं व चावल देने के आदेश दे दिए थे। इस आदेश का कार्ड धारकों ने विरोध किया है।
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उनका कहना है कि इस आदेश से गरीब परिवारों को परेशानी हो रही है। डीएसओ श्याम आर्या ने बताया कि कई राशन विक्रेता स्टॉक से दाल नहीं उठा रहे थे। इसी वजह से दाल खरीदना अनिवार्य किया था। राशन विक्रेता भी दाल खरीदने पर गेहूं, चावल लेने को कह रहे हैं।
- सस्ता-गल्ला विक्रेता गेहूं, चावल खरीदने से पहले दाल लेने को कह रहे हैं। दाल की गुणवत्ता सही नहीं होने पर उसे नहीं खरीदा जाता है तो गेहूं व चावल देने के लिए मना कर देते हैं। राशन नहीं मिलने पर परिवार का गुजारा करने में दिक्कत आ रही है। स्माइल, खेड़ा
- दाल को अनिवार्य रूप से खरीदने का आदेश समाप्त होना चाहिए। कई लोग दाल नहीं खरीदना चाहते हैं। दाल के रेट 80 रुपये से अधिक हैं। इतने में गेहूं और चावल दोनों मिल जाता है। अर्जुन पाल, शिवनगर
- जिला पूर्ति कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी चलती है। लंबे समय से राशन कार्ड बनाने के लिए चक्कर लगा रही हूं लेकिन आज तक राशन कार्ड नहीं बना। गरीबों को राशन देने पर अब दाल लेना जरूरी करना गलत है। रीना शर्मा, प्रीतविहार
- सस्ता-गल्ला की दुकानों पर राशन देने पर मनमानी की जा रही है। कुछ लोगों को गेहूं, चावल दिया जा रहा है। वह गेहूं, चावल लेने के लिए दुकान पर गई तो पहले दाल खरीदने के लिए कह दिया। मीना देवी, प्रीतविहार