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Haldwani: निजी अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने आए मरीज की मौत, परिजनों ने किया जमकर हंगामा

Thu, 16 Apr 2026 12:44 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 16 Apr 2026 12:44 PM IST
सार

हल्द्वानी के ठंडी कोठी स्थित निजी अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने आए रामनगर निवासी मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

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patient who had come to a private hospital in Haldwani for eye surgery died and his family created a ruckus
अस्पताल के बाहर पहुंचे परिजनों ने किया हंगामा। - फोटो : संवाद

विस्तार

हल्द्वानी में आंखों की रोशनी वापस पाने की उम्मीद लेकर पहुंचे रामनगर निवासी राजपाल कश्यप की आंखें हमेशा के लिए बंद हो गई। परिवार को भरोसा था कि ऑपरेशन के बाद जिंदगी पटरी पर लौट आएगी मगर किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि घर की खुशियां अंधेरे में डूब गईं।

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रामनगर के चिलकिया स्थित ग्राम जस्सा गांजा में राजपाल कश्यप आंखों की कम होती रोशनी से चिंतित थे। बुधवार को वह आंखों के ऑपरेशन के लिए ठंडी सड़क स्थित निजी नेत्र चिकित्सालय पहुंचे। इस दौरान उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिजन 19 घंटे तक न्याय की आस में भटकते रहे।

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बुधवार रात के अंधियारे से बृहस्पतिवार दोपहर की तेज धूप तक में वे कोतवाली और अस्पताल के चक्कर काटते रहे लेकिन कार्रवाई के बजाय सिस्टम समझौते की बातें करता रहा। इधर शव गांव पहुंचने में देरी हुई तो महिलाएं भी पिकअप में भरकर कोतवाली पहुंच गईं और बच्चों के भविष्य की गुहार लगाती रहीं। शाम को अस्पताल प्रशासन से बातचीत के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।

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आठ बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मजदूरी कर परिवार पालने वाले राजपाल अपने पीछे आठ मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। सबसे बड़ा बेटा महज 11 साल का है जबकि बाकी बच्चे दो से दस साल के बीच हैं। माता-पिता के निधन के बाद राजपाल ने ही अपने छोटे भाइयों को संभाला। उनकी शादियां कराईं और पूरे परिवार का सहारा बने रहे। आंखों की रोशनी कम होने लगी तो उन्होंने जल्द इलाज की बात कही थी ताकि फिर से काम कर सकें और बच्चों का भविष्य संवार सकें लेकिन इलाज के बाद उनकी सांसें थम गईं।


डॉक्टर ने किश्तों में दी हालत बिगड़ने की जानकारी
राजपाल शारीरिक रूप से स्वस्थ थे। राजपाल के भाई राजेश के अनुसार आंख का ऑपरेशन तीन घंटे तक चला। इसके बाद ऑपरेशन थियेटर से तीन बार में डॉक्टर के साथ तीन कर्मी बाहर आए। सबने अलग-अलग दिक्कतें बताईं। पहले बीपी बढ़ना बताया गया। फिर स्थिति गंभीर बताई। कुछ देर बाद बताया बगल के अस्पताल में ले जाओ। किश्तों में समस्या बताकर सभी माहौल बना रहे थे। दूसरे अस्पताल से भाई के मौत की जानकारी मिली।

हल्द्वानी शहर में अस्पतालों से लगातार सामने आ रही मौतों और लापरवाही के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत पर परिजन आक्रोशित हो उठते हैं तो कभी निजी चिकित्सालयों में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आते हैं। ताजा मामले में नेत्र ऑपरेशन के दौरान मरीज की मौत ने एक बार फिर पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रशासन जांच की बात कर रहा है लेकिन सवाल यही है कि क्या ये जांचें कभी सच तक पहुंच भी पाती हैं?

10 अप्रैल 2026 - बेस अस्पताल में पर्ची कटाने के बाद मनीष पांडे अचानक से गिर गए। काफी समय तक पड़े रहे लेकिन लोगों के साथ-साथ अस्पतालकर्मी भी उनकी मदद के लिए नहीं बढ़े। नतीजतन उनकी मौत हो गई।

16 फरवरी 2026 - शहर के एक निजी अस्पताल ने जिंदा मरीज की डेथ फाइल बना दी। अस्पताल प्रबंधन को महिला की हालत देखकर उनके बचने की उम्मीद कम लगी। हालांकि महिला स्वस्थ होकर लौटी।

फरवरी 2026 - हल्द्वानी में नैनीताल रोड स्थित एक चिकित्सालय में मरीज की मौत के बाद उसके शव को बंधक बना लिया था। मामले में अस्पताल के एमडी के खिलाफ बाद में एफआईआर हुई।

10 जून 2025- एसटीएच में टीबी पीड़ित मरीज मेडिसिन विभाग में इलाज के लिए आया। उपचार के दौरान मरीज मर गया। परिजनों ने जमकर हंगामा किया। इसकी जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है।



24 सितंबर 2025- नहर कवरिंग रोड के निजी अस्पताल में किशनपुर घुड़दौड़ा निवासी अधेड़ पथरी के ऑपरेशन के लिए गए। ऑपरेशन के दौरान अधेड़ की मौत हो गई।

30 अप्रैल 2025 - राजकीय महिला अस्पताल में लापरवाही से गर्भवती की मौत इलाज में लापरवाही की वजह से हुई। 17 लोगों को नोटिस हुआ पर जांच अब तक दबी है।

निजी नेत्र चिकित्सालय में मरीज की मौत की जानकारी मिली है। इस मामले की जांच के लिए सीएमओ की अध्यक्षता में बेस अस्पताल के दो वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों की टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मरीज के ऑपरेशन से पहले संबंधित चिकित्सकों को अपने वरिष्ठ चिकित्सकों से अनिवार्य रूप से रायशुमारी करनी चाहिए ताकि उसे को बेहतर इलाज मिल सके। - डॉ.एचसी पंत मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल

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