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जिले में अब तक हुई सिर्फ 1075 क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद
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काशीपुर। मंडी में गेहूं के दाम अधिक होने से सरकारी क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। यहां स्थिति यह है कि 20 दिन में गेहूं खरीद का लक्ष्य काफी पिछड़ गया है। कई सरकारी केंद्रों पर एक दाना भी नहीं खरीदा जा सका है। ऐसे में सरकार के सामने फ्री राशन वितरण योजना के क्रियान्वयन को लेकर संकट आ सकता है।
सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये घोषित किया है। गेहूं खरीद के लिए जिले में एक अप्रैल से सहकारिता, विपणन विभाग, यूसीएफ, आरएफसी और नैफेड के 166 कांटे लगाए गए है, लेकिन जसपुर, बाजपुर, किच्छा और नानकमत्ता के कुछ तौल केंद्रो को छोड़कर कहीं भी गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। बीस दिनों के भीतर 1075 क्विंटल गेहूं खरीदा जा सका है। अपर निबंधक (सहकारिता) प्रेम प्रकाश ने बताया कि सहकारिता और यूसीएफ के कांटो पर कुल 1075 क्विंटल गेहूं की खरीदा जा सका है। खुले बाजार में गेहूं का मूल्य अधिक होने के कारण किसान क्रय केंद्रों का रुख नहीं कर रहे हैं। मंगलवार को बाजार में 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक में गेहूं बिका। किसानों का कहना है कि एक तो खुले बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिल रहे हैं। गेहूं खरीद केंद्रों पर जाने पर किसानों को फजीहत का सामना करना पड़ता है। क्रय केंद्रों पर घटतौली की शिकायतें आम रहती हैं। वहीं भुगतान के लिए भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। मंडी में तेजी को रुस-यूक्रेन युद्ध से जोड़कर भी देखा जा रहा हैं। दोनों ही गेहूं निर्यातक देश हैं। ऐसे में वहां से आयात प्रभावित होने की संभावना हैं।
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सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये घोषित किया है। गेहूं खरीद के लिए जिले में एक अप्रैल से सहकारिता, विपणन विभाग, यूसीएफ, आरएफसी और नैफेड के 166 कांटे लगाए गए है, लेकिन जसपुर, बाजपुर, किच्छा और नानकमत्ता के कुछ तौल केंद्रो को छोड़कर कहीं भी गेहूं की खरीद नहीं हो सकी है। बीस दिनों के भीतर 1075 क्विंटल गेहूं खरीदा जा सका है। अपर निबंधक (सहकारिता) प्रेम प्रकाश ने बताया कि सहकारिता और यूसीएफ के कांटो पर कुल 1075 क्विंटल गेहूं की खरीदा जा सका है। खुले बाजार में गेहूं का मूल्य अधिक होने के कारण किसान क्रय केंद्रों का रुख नहीं कर रहे हैं। मंगलवार को बाजार में 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक में गेहूं बिका। किसानों का कहना है कि एक तो खुले बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिल रहे हैं। गेहूं खरीद केंद्रों पर जाने पर किसानों को फजीहत का सामना करना पड़ता है। क्रय केंद्रों पर घटतौली की शिकायतें आम रहती हैं। वहीं भुगतान के लिए भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। मंडी में तेजी को रुस-यूक्रेन युद्ध से जोड़कर भी देखा जा रहा हैं। दोनों ही गेहूं निर्यातक देश हैं। ऐसे में वहां से आयात प्रभावित होने की संभावना हैं।
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