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Exclusive: तकनीक की मदद से अब 90% बछिया ही जनेंगी गायें, विदेशी सेक्स सीमन बनाने की टेक्नोलॉजी को किया सुदृढ़
Sat, 07 Jun 2025 03:13 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 07 Jun 2025 03:13 PM IST
सार
पंत विश्वविद्यालय के पशु वैज्ञानिकों ने विदेशी सेक्स सीमन बनाने की तकनीक को सुदृढ़ कर लिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे अब गाय 90 प्रतिशत तक बछिया को ही जन्म देगी। वैज्ञानिकों को इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल हो गया है।
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सांकेतिक तस्वीर।
विस्तार
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के पशु वैज्ञानिकों ने विदेशी सेक्स सीमन बनाने की तकनीक को सुदृढ़ कर लिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे अब गाय 90 प्रतिशत तक बछिया को ही जन्म देगी। वैज्ञानिकों को इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल हो गया है। वैज्ञानिक डॉ. शिव कुमार और डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि भारत में पशुपालन आय का एक बहुत बड़ा जरिया है। पशुपालकों की आय तभी बढ़ सकती है, जब ज्यादा से ज्यादा बछियां पैदा हों और वे अधिक दूध दें। इसके लिए सेक्स सॉर्टेड सीमन (लिंग वर्गीकृत वीर्य) की विदेशी तकनीक एक क्रांति की तरह है। इससे बछिया की जन्मदर को बढ़ाया जा सकता है।
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यह है नई विधि
इसके तहत सीमन (वीर्य) की छंटनी (सोटिंग) कर उसमें नर क्रोमोसोम को अलग कर केवल मादा क्रोमोसोम को रखा जाता है। कृत्रिम गर्भाधान करके इससे ज्यादा से ज्यादा (90 प्रतिशत तक) बछिया ही पैदा की जा सकती हैं।
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प्रसव के दौरान गाय को नहीं होती परेशानी
सेक्स सीमन से गायों को प्रसव के दौरान ज्यादा कठिनाई नहीं होती है। अनसेक्स वीर्य की तुलना में सेक्स सीमन में शुक्राणुओं की संख्या (लगभग दो मिलियन प्रति डोज) बहुत कम होती है।
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क्या है लिंग वर्गीकृत शुक्राणु
डॉ. सुनील ने बताया कि लिंग वर्गीकृत करने वाले शुक्राणुओं को अलग किया जाता है। समान्यतः वीर्य में एक्स और वाई शुक्राणु वरावर-बरावर अनुपात में होते हैं। इस तकनीक से प्रयोगशाला में वीर्य से एक्स शुक्राणु को वाई शुक्राणु से अलग किया जाता है, जिससे कृत्रिम गर्भाधान के बाद अधिक से अधिक एक्स शुक्राणु मादा अंडे को निषेचित कर सकें और बछिया ही पैदा होती है। आम कृत्रिम गर्भाधान सीमन में एक्स और वाई शुक्राणु सामान्य मात्रा में होते हैं। इसकी वजह से मादा व नर होने की संभावना लगभग बराबर रहती है।
अधिक से अधिक गर्भधारण दर प्राप्त करने के लिए इन सीमन का प्रयोग परियोजना के तहत चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। प्रथम चरण में एनडीआरआई करनाल से साहीवाल नस्ल के सेक्स सीमन की डोज मंगाकर साहीवाल बछियों में गर्भधारण कराया गया है जो सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक है। -डॉ. मनमोहन सिंह चौहान कुलपति पंतनगर विश्वविद्यालय