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Udham Singh Nagar News: घरों की रौनक बढ़ाएगा मूंगफली और अखरोट के छिलकों से बना कंपोनेंट, जानिए कैसे?

Thu, 09 Jan 2025 12:32 PM IST
हीरा मेहरा सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद
सुरेंद्र कुमार वर्मा, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 09 Jan 2025 12:32 PM IST
सार

मूंगफली, अखरोट और नारियल के छिलकों से बना कंपोनेंट घरों की रौनक बढ़ाएंगे। इसके लिए विवि के वैज्ञानिकों ने एक तकनीक विकसित की है।

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Pantnagar News: Ingredients made from peanuts, walnuts and coconut shells
छिलकों से बने टी-कोस्टर और पार्टिकल बोर्ड के साथ शोधार्थी नजमा और डाॅ. एमजीएच जैदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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अमूमन कूड़े में फेंकने या ईंधन में काम आने वाले मूंगफली, अखरोट और नारियल के छिलकों से बना कंपोनेंट घरों की रौनक बढ़ाएंगे। इसके लिए विवि के वैज्ञानिकों ने एक तकनीक विकसित की है। इस एंटी बैक्टीरियल व बायोडिग्रेडेबल कंपोनेंट से विभिन्न घरेलू उत्पादों के साथ ही पार्टीशन वॉल के लिए बोर्ड भी बनाए जा सकते हैं। विवि ने इसका पेटेंट भी फाइल कर दिया है।

 

जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि में डाॅ. अदिति वत्स की एडवाइजरी में शोधार्थी नजमा ने बताया कि अखरोट के छिलकों का काॅस्मेटिक उत्पाद बनाने में एक से दो प्रतिशत ही इस्तेमाल होता है, बाकी जलाने के काम आता है। मूंगफली के छिलके मात्र ईंधन के काम आते हैं।

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उन्होंने इन छिलकों का उपयोग कर कुछ बेहतरीन घरेलू उत्पाद बनाने की सोची और रसायन विज्ञान के प्राध्यापक डाॅ. एमजीएच जैदी के मार्गदर्शन में नई तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की। इसमें उन्होंने मूंगफली, अखरोट और नारियल के छिलकों में ईको फ्रेंडली बाइंडर मिलाए और थर्मल क्योरिंग करके एंटी बैक्टीरियल व बायोडिग्रेडेबल कंपोनेंट तैयार किया है।

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हमारे देश की जैव विविधता विदेशों में बहुत सराहनीय है। इस तकनीक से देश में निकलने वाले कृषि अपशिष्ट का अच्छा उपयोग होगा और लोगों को रोजगार सहित विदेशी मुद्रा का भंडारण भी होेगा।

- डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति

ऐसे ईजाद हुई तकनीक
नजमा ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने छिलकों को एंटी बैक्टीरियल किया। इसके लिए उन्होंने डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ बायो एनर्जी रिसर्च सेंटर हल्द्वानी (डिबेर) का सहयोग लिया। यहां पर उन्होंने पहले एग्रो वेस्ट (छिलकों) को एंटी बैक्टीरियल बनाकर आर्टिकल्स में मोल्ड किया। इसके बाद मनचाहे घरेलू उत्पाद तैयार किए हैं।

 

पर्यावरण हितैषी, रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
डाॅ. जैदी ने बताया कि पाॅलिमर इंडस्ट्री की वजह से प्रदूषण बढ़ता है। इसका निराकरण भी संभव नहीं है। इस तकनीक से जैव विघटनीय उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनसे पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है। इस प्रकार के उत्पाद बनाने के लिए विकसित होने वाले उद्योगों में लोगों को रोजगार भी मिलेगा।विशेषकर महिलाएं इससे उत्पाद बनाकर स्वरोजगार कर सकती हैं। 

क्या-क्या बन सकता है
इस कंपोनेंट से टी-कोस्टर, आईने का फ्रेम, बैंगल केस, सिंदूरदानी, चम्मच, चाकू के हैंडल, पार्टिकल बोर्ड व डब्बे आदि घरेलू उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। बताया कि एक टी-कोस्टर बनाने में मात्र 20-25 पैसे का खर्च आया है।

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