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आज के ही दिन मेरी छाती टूटी... पर वीरेंद्र ने मेरा नाम रोशन किया : दीवान
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पुलवामा आतंकी हमले में शहीद वीरेंद्र सिंह राणा- फाइल फोटो
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा। ‘हम महाराणा प्रताप के वंशज हैं, हमारी रगों में देशभक्ति दौड़ती है। मेरे बेटे ने देश के लिए शहादत दी है, मुझे वीरेंद्र पर गर्व है..।’ यह बोलते-बोलते शहीद के 82 वर्षीय पिता दीवान सिंह राणा की आंखें नम हो गईं।
पुलवामा आतंकी हमले को शुक्रवार को एक वर्ष पूरा हो जाएगा। मोहम्मदपुर भुड़िया स्थित शहीद वीरेंद्र के घर पर बृहस्पतिवार सुबह शहीद की वीरांगना रेनू देवी पुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए तहसील से दो दिन का अवकाश लेकर अपने दोनों बच्चों तीन वर्षीय पुत्र बियान (3) और साढ़े पांच वर्षीय पुत्री रूही राणा के साथ पहुंच गई हैं। आंगन में शहीद के पिता दीवान सिंह राणा (82) ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि तीन भाइयों में उनके ही परिवार में बड़ा बेटा जयराम बीएसएफ में गया था और उसके बाद वीरेंद्र ने सीआरपीएफ को देश सेवा के लिए चुना। 12 फरवरी 2019 की शाम को वीरेंद्र 20 दिन की छुट्टी के बाद जम्मू के लिए रवाना हुआ था। प्रतापपुर बस स्टैंड से वह वापस घर आया और स्लिपिंग बैग जिसे वह ले जाना भूल गया था, उसे ले गया। दीवान सिंह आज भी फख्र से कहते हैं कि ‘बेटे वीरेंद्र ने शहादत देकर उनका नाम ऊंचा किया है...। मेरी छाती आज के दिन ही टूटी थी... लेकिन उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है...। ’
बच्चे रोज पूछते हैं.. पापा कब आएंगे...
खटीमा। बच्चे रोज पूछते हैं.. पापा कब आएंगे..। उन्हें क्या जवाब दूं...। उनसे बहाना बनाती हूं कि पापा भगवान के पास गए हैं। भगवान जब भेजेंगे तभी...। दिन कैसे कटते हैं यह मैं ही जानती हूं.. वीरांगना रेनू राणा की आंखें भर आईं..। पुलवामा अटैक के शहीद 45 सीआरपीएफ के जवान वीरेंद्र सिंह राणा की पुण्यतिथि के लिए दो दिन का अवकाश लेने की बात कहते हुए वीरांगना ने बताया कि उन्हें 31 अक्तूबर 2019 से तहसील में अनुसेवक की सरकारी नौकरी मिल गई है। राज्य सरकार से 25 लाख मिले और सीआरपीएफ से पेंशन मिल रही है। उसका पुत्र बियान नर्सरी और पुत्री रूही यूकेजी में पढ़ रही है। वह दो माह से तहसील के सरकारी आवास में बच्चों के साथ रह रही हैं। रेनू कहती हैं कि आखिरी बार जब उनसे बात हुई थी तो उन्होंने (वीरेंद्र) यही कहा था कि रास्ते में हूं और अब पुलवामा पहुंचकर फोन करूंगा...। वीरांगना रेनू कहती हैं कि गर्व है कि उनके पति देश के काम आए...।
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शहीद वीरेंद्र की शहादत को स्कूली बच्चे करेंगे आज याद
खटीमा। वीरेंद्र की शहादत के चार दिन बाद 18 फरवरी 2019 को गांव के स्कूल का नाम शहीद वीरेंद्र सिंह राणा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोहम्मदपुर भुड़िया कर दिया गया था। 12 नवंबर 2019 को स्कूल में शहीद गेट बनाने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन अभी तक गेट नहीं बन पाया है। स्कूल के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि शुक्रवार को स्कूल में वीरेंद्र सिंह राणा की पहली पुण्यतिथि पर शहीद को याद किया जाएगा। सुबह 10 बजे से स्कूल में कार्यक्रम होगा। बृहस्पतिवार को प्रधानाचार्य के साथ ही शिक्षक प्रकाश चंद्र पाठक, आरवी शुक्ल, जसपाल साह, आरएस गंगवार आदि स्कूल में कार्यक्रम की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए जुटे रहे।
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पुलवामा आतंकी हमले को शुक्रवार को एक वर्ष पूरा हो जाएगा। मोहम्मदपुर भुड़िया स्थित शहीद वीरेंद्र के घर पर बृहस्पतिवार सुबह शहीद की वीरांगना रेनू देवी पुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए तहसील से दो दिन का अवकाश लेकर अपने दोनों बच्चों तीन वर्षीय पुत्र बियान (3) और साढ़े पांच वर्षीय पुत्री रूही राणा के साथ पहुंच गई हैं। आंगन में शहीद के पिता दीवान सिंह राणा (82) ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि तीन भाइयों में उनके ही परिवार में बड़ा बेटा जयराम बीएसएफ में गया था और उसके बाद वीरेंद्र ने सीआरपीएफ को देश सेवा के लिए चुना। 12 फरवरी 2019 की शाम को वीरेंद्र 20 दिन की छुट्टी के बाद जम्मू के लिए रवाना हुआ था। प्रतापपुर बस स्टैंड से वह वापस घर आया और स्लिपिंग बैग जिसे वह ले जाना भूल गया था, उसे ले गया। दीवान सिंह आज भी फख्र से कहते हैं कि ‘बेटे वीरेंद्र ने शहादत देकर उनका नाम ऊंचा किया है...। मेरी छाती आज के दिन ही टूटी थी... लेकिन उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है...। ’
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बच्चे रोज पूछते हैं.. पापा कब आएंगे...
खटीमा। बच्चे रोज पूछते हैं.. पापा कब आएंगे..। उन्हें क्या जवाब दूं...। उनसे बहाना बनाती हूं कि पापा भगवान के पास गए हैं। भगवान जब भेजेंगे तभी...। दिन कैसे कटते हैं यह मैं ही जानती हूं.. वीरांगना रेनू राणा की आंखें भर आईं..। पुलवामा अटैक के शहीद 45 सीआरपीएफ के जवान वीरेंद्र सिंह राणा की पुण्यतिथि के लिए दो दिन का अवकाश लेने की बात कहते हुए वीरांगना ने बताया कि उन्हें 31 अक्तूबर 2019 से तहसील में अनुसेवक की सरकारी नौकरी मिल गई है। राज्य सरकार से 25 लाख मिले और सीआरपीएफ से पेंशन मिल रही है। उसका पुत्र बियान नर्सरी और पुत्री रूही यूकेजी में पढ़ रही है। वह दो माह से तहसील के सरकारी आवास में बच्चों के साथ रह रही हैं। रेनू कहती हैं कि आखिरी बार जब उनसे बात हुई थी तो उन्होंने (वीरेंद्र) यही कहा था कि रास्ते में हूं और अब पुलवामा पहुंचकर फोन करूंगा...। वीरांगना रेनू कहती हैं कि गर्व है कि उनके पति देश के काम आए...।
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शहीद वीरेंद्र की शहादत को स्कूली बच्चे करेंगे आज याद
खटीमा। वीरेंद्र की शहादत के चार दिन बाद 18 फरवरी 2019 को गांव के स्कूल का नाम शहीद वीरेंद्र सिंह राणा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोहम्मदपुर भुड़िया कर दिया गया था। 12 नवंबर 2019 को स्कूल में शहीद गेट बनाने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन अभी तक गेट नहीं बन पाया है। स्कूल के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि शुक्रवार को स्कूल में वीरेंद्र सिंह राणा की पहली पुण्यतिथि पर शहीद को याद किया जाएगा। सुबह 10 बजे से स्कूल में कार्यक्रम होगा। बृहस्पतिवार को प्रधानाचार्य के साथ ही शिक्षक प्रकाश चंद्र पाठक, आरवी शुक्ल, जसपाल साह, आरएस गंगवार आदि स्कूल में कार्यक्रम की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए जुटे रहे।