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Udham Singh Nagar News: बूढ़े हुए तीन जलाशय, सिल्ट घटा रही जलग्रहण क्षमता
Mon, 23 Oct 2023 12:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 23 Oct 2023 12:04 AM IST
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गूलरभोज का बौर जलाशय। संवाद
रुद्रपुर। जिले में सिंचाई विभाग के अधीन तीन जलाशयों में से दो जलाशय 50 साल से भी अधिक पुराने हो चुके हैं। जलाशयों में जमी सिल्ट की सफाई नहीं होने के कारण इनकी जलग्रहण क्षमता 45 फीसदी तक कम हो चुकी है। पुरानी तकनीक से बने पांच दशक से अधिक पुराने जलाशयों की क्षमता कम होने का असर भविष्य में सिंचाई के साथ ही बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर पड़ सकता है।
दरअसल यूपी के जमाने में बाढ़ और सिंचाई के लिए जिले में सात जलाशयों का निर्माण किया गया था। इसका मकसद पहाड़ों में होने वाली बारिश के पानी को नदियों और नालों के जरिए जलाशय में जमा कर सिंचाई के लिए किसानों को उपलब्ध कराना था। इनमें से चार जलाशय राज्य गठन के बाद भी यूपी सिंचाई विभाग के अधीन हैं। तुमड़िया, बौर और हरिपुरा जलाशय उत्तराखंड सिंचाई विभाग के पास है।
हरिपुरा जलाशय का निर्माण 1975, बौर का 1967 और तुमड़िया जलाशय का निर्माण 1969 को किया गया था। हरिपुरा जलाशय का लोकार्पण करने के लिए तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी पहुंची थीं। पांच दशकों से इन जलाशयों से सिल्ट नहीं निकाली जा सकी है। इसका दुष्प्रभाव जलाशय की जलग्रहण क्षमता पर पड़ रहा है। सिंचाई विभाग का मानना है कि यदि जमा सिल्ट नहीं निकाली गई तो इसका प्रभाव जलाशयों से होने वाली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के कार्यों पर पड़ सकता है।
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केंद्र के प्रोजेक्ट से बाहर हुआ था बौर
रुद्रपुर। गूलरभोज के बौर जलाशय को वर्ष 2021 में एडीबी की सिंचाई और आधुनिकीकरण कार्यक्रम योजना के देश के 10 बड़े प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। इसके तहत जलाशय में जमा करीब 42 फीसदी तक जमा सिल्ट हटाने के साथ ही अन्य कार्य होने थे लेकिन तकनीकी कारणों से प्रोजेक्ट में बौर जलाशय को हटा दिया गया था।
हरिपुरा में जमा है 42 फीसदी सिल्ट
रुद्रपुर। सिंचाई विभाग के अधीन तीन जलाशयों में से सबसे अधिक 42 फीसदी सिल्ट हरिपुरा जलाशय में जमा है। इस जलाशय से जिले में 10,199 हेक्टेयर और यूपी के 13764 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है। इसके अलावा बौर जलाशय में करीब 20 फीसदी और तुमड़िया जलाशय में 30 फीसदी तक सिल्ट जमा है। इन जलाशयों की सफाई नहीं हो सकी है, जबकि पहाड़ों में हर साल होने वाली बारिश में मिट्टी, पत्थर के छोटे -छोटे टुकड़े बहकर जमा हो जाते हैं।
राॅयल्टी का रेट ज्यादा होने से नहीं उठ पाती सिल्ट
रुद्रपुर। डेढ़ साल पहले जिला प्रशासन ने हरिपुरा जलाशय में जमा सिल्ट निकालने के लिए हाईवे निर्माण कर रही फर्म को अनुमति दी थी लेकिन वन विभाग ने अनुमति न होने का अड़ंगा लगा दिया था। इसको लेकर प्रशासन और वन विभाग में तनातनी भी हुई थी। दरअसल जलाशयों की असल मालिक वन विभाग है और वन विभाग की राॅयल्टी का शुल्क बहुत ज्यादा है। इस वजह से सिल्ट खरीदने में निर्माण एजेंसियां हाथ पीछे खींच लेती हैं।
ये है जलाशयों की क्षमता
तुमड़िया जलाशय- 81.17 मिलियन क्यूसेक घनमीटर
हरिपुरा जलाशय - 28.32 मिलियन क्यूसेक घनमीटर
बौर जलशय- 103.37 मिलियन क्यूसेक घनमीटर
तीनों जलाशयों से सिल्ट निकालनी जरूरी है। सिल्ट जमा होने से जलाशयों की जलग्रहण क्षमता पर असर पड़ रहा है। इसको लेकर विभागीय स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। - प्रमोद दीक्षित, अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग
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दरअसल यूपी के जमाने में बाढ़ और सिंचाई के लिए जिले में सात जलाशयों का निर्माण किया गया था। इसका मकसद पहाड़ों में होने वाली बारिश के पानी को नदियों और नालों के जरिए जलाशय में जमा कर सिंचाई के लिए किसानों को उपलब्ध कराना था। इनमें से चार जलाशय राज्य गठन के बाद भी यूपी सिंचाई विभाग के अधीन हैं। तुमड़िया, बौर और हरिपुरा जलाशय उत्तराखंड सिंचाई विभाग के पास है।
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हरिपुरा जलाशय का निर्माण 1975, बौर का 1967 और तुमड़िया जलाशय का निर्माण 1969 को किया गया था। हरिपुरा जलाशय का लोकार्पण करने के लिए तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी पहुंची थीं। पांच दशकों से इन जलाशयों से सिल्ट नहीं निकाली जा सकी है। इसका दुष्प्रभाव जलाशय की जलग्रहण क्षमता पर पड़ रहा है। सिंचाई विभाग का मानना है कि यदि जमा सिल्ट नहीं निकाली गई तो इसका प्रभाव जलाशयों से होने वाली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के कार्यों पर पड़ सकता है।
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केंद्र के प्रोजेक्ट से बाहर हुआ था बौर
रुद्रपुर। गूलरभोज के बौर जलाशय को वर्ष 2021 में एडीबी की सिंचाई और आधुनिकीकरण कार्यक्रम योजना के देश के 10 बड़े प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। इसके तहत जलाशय में जमा करीब 42 फीसदी तक जमा सिल्ट हटाने के साथ ही अन्य कार्य होने थे लेकिन तकनीकी कारणों से प्रोजेक्ट में बौर जलाशय को हटा दिया गया था।
हरिपुरा में जमा है 42 फीसदी सिल्ट
रुद्रपुर। सिंचाई विभाग के अधीन तीन जलाशयों में से सबसे अधिक 42 फीसदी सिल्ट हरिपुरा जलाशय में जमा है। इस जलाशय से जिले में 10,199 हेक्टेयर और यूपी के 13764 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है। इसके अलावा बौर जलाशय में करीब 20 फीसदी और तुमड़िया जलाशय में 30 फीसदी तक सिल्ट जमा है। इन जलाशयों की सफाई नहीं हो सकी है, जबकि पहाड़ों में हर साल होने वाली बारिश में मिट्टी, पत्थर के छोटे -छोटे टुकड़े बहकर जमा हो जाते हैं।
राॅयल्टी का रेट ज्यादा होने से नहीं उठ पाती सिल्ट
रुद्रपुर। डेढ़ साल पहले जिला प्रशासन ने हरिपुरा जलाशय में जमा सिल्ट निकालने के लिए हाईवे निर्माण कर रही फर्म को अनुमति दी थी लेकिन वन विभाग ने अनुमति न होने का अड़ंगा लगा दिया था। इसको लेकर प्रशासन और वन विभाग में तनातनी भी हुई थी। दरअसल जलाशयों की असल मालिक वन विभाग है और वन विभाग की राॅयल्टी का शुल्क बहुत ज्यादा है। इस वजह से सिल्ट खरीदने में निर्माण एजेंसियां हाथ पीछे खींच लेती हैं।
ये है जलाशयों की क्षमता
तुमड़िया जलाशय- 81.17 मिलियन क्यूसेक घनमीटर
हरिपुरा जलाशय - 28.32 मिलियन क्यूसेक घनमीटर
बौर जलशय- 103.37 मिलियन क्यूसेक घनमीटर
तीनों जलाशयों से सिल्ट निकालनी जरूरी है। सिल्ट जमा होने से जलाशयों की जलग्रहण क्षमता पर असर पड़ रहा है। इसको लेकर विभागीय स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। - प्रमोद दीक्षित, अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग