{"_id":"6245edcaf710232bef3c18d8","slug":"notice-to-pantnagar-university-rudrapur-news-hld458043497","type":"story","status":"publish","title_hn":"सात करोड़ की रिकवरी के लिए ईएसआईसी का पंत विवि को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सात करोड़ की रिकवरी के लिए ईएसआईसी का पंत विवि को नोटिस
विज्ञापन
पंत विवि का प्रशासनिक भवन।
- फोटो : RUDRAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंतनगर। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के उपनिदेशक विपिन कुमार ने जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय प्रशासन को ठेका कर्मियों के लिए लागू राज्य बीमा योजना (ईएसआई) मद में अप्रैल 2017 से जून 2020 तक की बकाया धनराशि सात करोड़ 17 लाख 83 हजार 384 रुपये एक माह में जमा कराने के लिए नोटिस दिया है। इससे विवि के नियंत्रण कार्यालय में खलबली मची है।
केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ईएसआई के अंतर्गत 21 हजार रुपये तक आय वाले कर्मचारियों को ईएसआई अस्पताल और उससे संबंधित अस्पतालों में मुफ्त उपचार की सुविधा दी जाती है। इसके एवज में प्रतिमाह कुछ धनराशि कर्मचारी के वेतन से कटती है और बाकी रकम नियोक्ता वहन करता है। इस योजना को निगम ने विवि में मार्च 2016 से लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन विवि में ठेका कर्मियों के लिए यह सुविधा अप्रैल 2021 से शासन के मौखिक आदेश पर लागू कर दी गई। ठेका कर्मियों के वेतन से कटौती के साथ ही नियोक्ता का अंश बाह्य सेवा प्रदाता कंपनी वहन कर रही है।
विवि प्रशासन ने राज्य सरकार से ईएसआई मद में जमा होने वाली राशि 1.92 करोड़ रुपये की मांग की थी। विवि प्रशासन ने कई बार इसके लिए शासन में पत्राचार भी किया, परंतु शासन से विवि को धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई। इधर निगम ने एक बार फिर नोटिस भेजकर अप्रैल 2017 से जून 2020 तक बकाया धनराशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
पहले हो चुकी है 3.09 करोड़ की रिकवरी, कोर्ट में विचाराधीन है केस
पंतनगर। ईएसआईसी के अफसरों के अनुसार रीकवरी विभाग ने धनाभाव से जूझ रहे विवि को 2016 से 2017 के बीच देय धनराशि को जमा कराने के निर्देश दिए थे लेकिन विवि की ओर से यह धनराशि जमा नहीं की गई। दिसंबर 2021 में ईएसआईसी के रिकवरी विभाग ने विवि प्रशासन को नियम 45ए के तहत इस धनराशि की रिकवरी से पूर्व उचित सुनवाई का अवसर दिया, परंतु विवि ने अपना कोई पक्ष नहीं रखा। इसके बाद ईएसआईसी ने विवि के स्टेट बैंक पंतनगर के मुख्य खाते से 2016-17 की 1.92 करोड़ की देनदारी के साथ ब्याज, डैमेज चार्ज सहित कुल 3.09 करोड़ लाख की रीकवरी कर ली। इससे विवि प्रशासन सकते में आ गया और उसने स्टेट बैंक पंतनगर सहित ईएसआईसी पर केस कर दिया, जो अब तक विचाराधीन है। संवाद
यह योजना जिले में 2016-17 से लागू कर दी गई थी। परंतु पंतनगर विवि में बाह्य सेवा प्रदाता के माध्यम से नियुक्त ठेका कर्मियों को मार्च 2021 तक इस लाभ से वंचित रखा गया। इस अवधि का अंशदान विवि प्रशासन ने जमा नहीं कराया है जिसके लिए विवि प्रशासन को नोटिस भेजकर धनराशि जमा कराने का आग्रह किया गया है।
-विपिन कुमार, उप निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम
ईएसआईसी पहले भी गलत तरीके से विवि से रिकवरी कर चुका है। इसमें विवि की ओर से वाद दायर किया गया है। इधर उन्होंने फिर रिमाइंडर भेजा है, जिसकी सुनवाई के लिए हम लोग उप निदेशक ईएसआईसी के संपर्क में हैं। वह हमारी नहीं सुन रहे हैं, हमारा कहना है कि वेतन के अलावा भुगतान पर हम जो टीडीएस काटते हैं वह 26 क्यू मद में आता है। उन्होंने पूरे भुगतान पर शुरुआत में छह प्रतिशत व बाद में चार प्रतिशत के हिसाब से भुगतान ले लिया।
-डॉ. बीके खंडूरी, सह निदेशक श्रम कल्याण पंतनगर विवि।
विज्ञापन
केंद्रीय श्रम मंत्रालय की ईएसआई के अंतर्गत 21 हजार रुपये तक आय वाले कर्मचारियों को ईएसआई अस्पताल और उससे संबंधित अस्पतालों में मुफ्त उपचार की सुविधा दी जाती है। इसके एवज में प्रतिमाह कुछ धनराशि कर्मचारी के वेतन से कटती है और बाकी रकम नियोक्ता वहन करता है। इस योजना को निगम ने विवि में मार्च 2016 से लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन विवि में ठेका कर्मियों के लिए यह सुविधा अप्रैल 2021 से शासन के मौखिक आदेश पर लागू कर दी गई। ठेका कर्मियों के वेतन से कटौती के साथ ही नियोक्ता का अंश बाह्य सेवा प्रदाता कंपनी वहन कर रही है।
विज्ञापन
विवि प्रशासन ने राज्य सरकार से ईएसआई मद में जमा होने वाली राशि 1.92 करोड़ रुपये की मांग की थी। विवि प्रशासन ने कई बार इसके लिए शासन में पत्राचार भी किया, परंतु शासन से विवि को धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई। इधर निगम ने एक बार फिर नोटिस भेजकर अप्रैल 2017 से जून 2020 तक बकाया धनराशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
पहले हो चुकी है 3.09 करोड़ की रिकवरी, कोर्ट में विचाराधीन है केस
पंतनगर। ईएसआईसी के अफसरों के अनुसार रीकवरी विभाग ने धनाभाव से जूझ रहे विवि को 2016 से 2017 के बीच देय धनराशि को जमा कराने के निर्देश दिए थे लेकिन विवि की ओर से यह धनराशि जमा नहीं की गई। दिसंबर 2021 में ईएसआईसी के रिकवरी विभाग ने विवि प्रशासन को नियम 45ए के तहत इस धनराशि की रिकवरी से पूर्व उचित सुनवाई का अवसर दिया, परंतु विवि ने अपना कोई पक्ष नहीं रखा। इसके बाद ईएसआईसी ने विवि के स्टेट बैंक पंतनगर के मुख्य खाते से 2016-17 की 1.92 करोड़ की देनदारी के साथ ब्याज, डैमेज चार्ज सहित कुल 3.09 करोड़ लाख की रीकवरी कर ली। इससे विवि प्रशासन सकते में आ गया और उसने स्टेट बैंक पंतनगर सहित ईएसआईसी पर केस कर दिया, जो अब तक विचाराधीन है। संवाद
यह योजना जिले में 2016-17 से लागू कर दी गई थी। परंतु पंतनगर विवि में बाह्य सेवा प्रदाता के माध्यम से नियुक्त ठेका कर्मियों को मार्च 2021 तक इस लाभ से वंचित रखा गया। इस अवधि का अंशदान विवि प्रशासन ने जमा नहीं कराया है जिसके लिए विवि प्रशासन को नोटिस भेजकर धनराशि जमा कराने का आग्रह किया गया है।
-विपिन कुमार, उप निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम
ईएसआईसी पहले भी गलत तरीके से विवि से रिकवरी कर चुका है। इसमें विवि की ओर से वाद दायर किया गया है। इधर उन्होंने फिर रिमाइंडर भेजा है, जिसकी सुनवाई के लिए हम लोग उप निदेशक ईएसआईसी के संपर्क में हैं। वह हमारी नहीं सुन रहे हैं, हमारा कहना है कि वेतन के अलावा भुगतान पर हम जो टीडीएस काटते हैं वह 26 क्यू मद में आता है। उन्होंने पूरे भुगतान पर शुरुआत में छह प्रतिशत व बाद में चार प्रतिशत के हिसाब से भुगतान ले लिया।
-डॉ. बीके खंडूरी, सह निदेशक श्रम कल्याण पंतनगर विवि।