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अफसरों को नहीं भाता राज्य की फूड लैब में बैठना

Tue, 29 Nov 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर। Updated Tue, 29 Nov 2016 01:14 AM IST
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Not pleasing to the state's food laboratory officers sit
अफसरों को नहीं भाता राज्य की फूड लैब में बैठना - फोटो : अमर उजाला

रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर शहर में करोड़ों रुपए से बनी राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषणशाला (फूड लैब) में जिम्मेदार अफसरों को नियमित बैठना नहीं भाता है। इसी कारण यहां जांच का काम भी प्रभावित हो रहा है। प्रदेश के 13 जिलों से खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए सैंपल लैब में हर महीने जांच के लिए आते हैं, लेकिन सात माह की सैंपलिंग जांच रिपोर्ट कब तक मिलेगी, इसका जवाब विभाग के पास नहीं है। आलम यह है कि लैब में जिम्मेदार अफसरों के कमरों पर ताले लटके हैं और वहां तैनात कर्मचारी बेलगाम हैं।

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राज्य सरकार ने आठ जनवरी 2010 में करोड़ों रुपए की लागत से यहां फूड लैब की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए मिलावटखोरी रोकना था, लेकिन फूड लैब में स्थापना के बाद से ही यहां सरकार की इस मंशा को पूरा नहीं किया जा सका। कभी यहां लैब विश्लेषक की स्थायी तैनाती नहीं हो सकी तो अब अन्य कर्मचारियों की भी कमी है। लैब में छह कार्मिकों के पद खाली हैं।
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जिम्मेदार अफसर के रोजाना न बैठने से यहां के बाकी कर्मचारी भी बेलगाम हैं। हालात यह हैं सात माह पहले होली समेत डेढ़ माह पहले दीपावली के दौरान लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट भी विभाग को नहीं मिल सकी है। लैब में अराजकता का आलम यह है कि पिछले वर्ष राज्य के विभिन्न जिलों से आए 500 सैंपल समय से जांच न होने से खराब हो गए थे।
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अब लैब प्रभारी का पद सीएमओ डॉ. एचके जोशी के पास है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें किसी भी बारे में कुछ भी बताने के लिए लैब प्रभारी नेे सख्त हिदायत दी है, इसलिए वह सैंपलों की जांच रिपोर्ट के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ हैं। इसलिए लैब से सैंपल की रिपोर्ट न मिलने के कारण मिलावटखोर दंडित नहीं हो सके। इसके बावजूद लैब प्रभारी सीएमओ डॉ. जोशी ने कुछ भी बताने में असमर्थता जताई। उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिनियम का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया।


रुद्रपुर। फूड लैब में तैनात कर्मचारियों को पांच महीने से वेतन भी नहीं मिला है। ऐसे में साफ है कि लैब में तैनात कर्मचारी भी अपनी जिम्मेदारी को कैसे बखूबी निभाएंगे। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि पांच महीने से वह बिना वेतन के काम कर रहे हैं। इस कारण परिवार का खर्चा चलाने की बड़ी चुनौती है। 
 

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