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Udham Singh Nagar News: नंदा और राधाष्टमी आज, उत्तराखंड में बेटी के स्वागत की अनूठी परंपरा
Sat, 19 Sep 2026 12:59 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:59 AM IST
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पंतनगर। शनिवार को नंदा अष्टमी एवं राधाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान हिमालय की बर्फीली वादियों से लेकर पहाड़ों पर बहने वाली शीतल हवाओं तक मां नंदा की भक्ति की छटा देवभूमि उत्तराखंड में चारों ओर गूंज उठती है। ढोल-दमाऊ की थाप पर जागर की भक्तिमय ध्वनि सुनाई देगी, तब पहाड़ों की गोद में इस पर्व की एक अद्भुत और भावुक छटा बिखेर जाती है। यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति और एक बेटी के प्रति असीम वात्सल्य का सजीव संगम है।
हल्द्वानी की प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी ने बताया कि उत्तराखंड की लोक-संस्कृति में मां नंदा देवी केवल एक पूज्य देवी नहीं, बल्कि हर घर की बेटी मानी जाती हैं। उन्होंने बताया कि सप्तमी तिथि से मूर्तियों के निर्माण का कार्य आरंभ होता है और अष्टमी को प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, गढ़वाल में विशाल मेलों का आयोजन होता है। अष्टमी, नवमी और दशमी की विशेष पूजा-अर्चना के बाद एकादशी को भव्य डोला निकाला जाता है। इसके बाद मां नंदा-सुनंदा को पवित्र जल में विसर्जित कर नम आंखों से अगले वर्ष पुनः आगमन के लिए वचन लेकर कैलाश की ओर विदा किया जाता है।
डॉ. मंजू ने बताया कि अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 01:02 से 19 की अपराह्न 03:28 बजे तक रहेगी। नंदाष्टमी शुभ पूजा मुहूर्त 19 सितंबर प्रातः 07:30 से 09:11 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त 11:50 से 12:39 बजे तक है। वहीं राधाष्टमी को बृजभूमि सहित संपूर्ण सनातन धर्म में श्रीराधा रानी जी का प्राकट्य उत्सव भी बड़े भक्तिभाव से मनाया जाएगा।
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हल्द्वानी की प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी ने बताया कि उत्तराखंड की लोक-संस्कृति में मां नंदा देवी केवल एक पूज्य देवी नहीं, बल्कि हर घर की बेटी मानी जाती हैं। उन्होंने बताया कि सप्तमी तिथि से मूर्तियों के निर्माण का कार्य आरंभ होता है और अष्टमी को प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, गढ़वाल में विशाल मेलों का आयोजन होता है। अष्टमी, नवमी और दशमी की विशेष पूजा-अर्चना के बाद एकादशी को भव्य डोला निकाला जाता है। इसके बाद मां नंदा-सुनंदा को पवित्र जल में विसर्जित कर नम आंखों से अगले वर्ष पुनः आगमन के लिए वचन लेकर कैलाश की ओर विदा किया जाता है।
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डॉ. मंजू ने बताया कि अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 01:02 से 19 की अपराह्न 03:28 बजे तक रहेगी। नंदाष्टमी शुभ पूजा मुहूर्त 19 सितंबर प्रातः 07:30 से 09:11 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त 11:50 से 12:39 बजे तक है। वहीं राधाष्टमी को बृजभूमि सहित संपूर्ण सनातन धर्म में श्रीराधा रानी जी का प्राकट्य उत्सव भी बड़े भक्तिभाव से मनाया जाएगा।
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