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महाशिवरात्रि : समय के साथ कांवड़ के दामों में आया भारी उछाल

Sat, 07 Feb 2026 01:05 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Sat, 07 Feb 2026 01:05 AM IST
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Muzaffarnagar: Over time, the forests of the Northeast have seen a massive growth
काशीपुर। महाशिवरात्रि पर्व पर बढ़ती महंगाई का असर भगवान भोले शंकर के भक्तों पर भी दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद भी महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के लिए शिवभक्त अभी से जुट गए हैं। वहीं कारीगर भी कांवड़ तैयार करने में दिन-रात जुटे हैं।
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महाशिवरात्रि पर्व इस वर्ष 15 फरवरी को मनाया जाएगा। शिवभक्त अपने अराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करने की लिए अभी से तैयारी में जुट गए हैं। मोहल्ला ओझान निवासी कांवड़ बनाने वाले 86 वर्षीय कारीगर अमरनाथ यादव व उनका परिवार इन दिनों कांवड़ तैयार करने में जुटा है। उनका कहना है कि वह 35 वर्ष से कांवड़ बना रहे हैं। इसमें उनका बेटा रवि शंकर और परिवार के सदस्य भी सहयोग करते है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कांवड़ की मांग कोई खास नहीं है। इसकी मुख्य वजह कांवड़ के दामों में बढ़ोतरी होना है। बताया कि कई शिवभक्त अपनी मनपसंद कांवड़ को ऑर्डर पर तैयार कराते हैं।
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दो सौ रुपये में बिकने वाली कांवड़ बिक रही 600-700 रुपये में

महाशिवरात्रि पर्व पर शिवभक्त कई तरह की कांवड़ तैयार कराते हैं। इनमें बैकुण्ठी, खड़ेश्वरी, झूलेश्वरी, झोली और डाक कांवड़ होती है। रविशंकर ने बताया कि इस वर्ष बैकुण्ठी कांवड़ 500-600 रुपये, झूलेश्वरी 600-700 रुपये में बिक रही है जबकि कुछ वर्ष पहले यह 200 से 300 रुपये में बिकती थी। कांवड़ में प्रयोग होने वाली सुतली 100 से बढ़कर 200 रुपये किलो, डलिया सेट 200 से बढ़कर 300 रुपये, टूल 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये और गोटा 500 से बढ़कर 600 रुपये किलो हो गया है। ऐसे में कांवड़ की लागत महंगी हो गई है।
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बोर्ड परीक्षा ने कांवड़ लाने का उत्साह किया कम
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 21 फरवरी से है जबकि 15 फरवरी तक प्रयोगात्मक परीक्षाएं होनी हैं। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा भी 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। रविशंकर ने बताया कि महाशिवरात्रि 15 फरवरी की है और प्रयोगात्मक परीक्षा भी 15 फरवरी तक होनी है। बताया युवाओं में कांवड़ लाने का उत्साह होता है, लेकिन परीक्षाओं के कारण कांवड़ की मांग कम हो गई है।
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