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स्थानीय समस्याएं नहीं बनतीं चुनावी मुद्दा

Thu, 26 Jan 2017 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर Updated Thu, 26 Jan 2017 12:43 AM IST
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Local problems would not be an election issue
रुद्रपुर में अमर उजाला की चुनावी परिचर्चा में शामिल विभिन्न वर्ग के लोग। - फोटो : अमर उजाला

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विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही आम मतदाता सोचने लगा है कि उनके द्वारा चुना गया विधायक उनके क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएगा या नहीं। लोगों की मानें तो शक्लों को चुनावी हथियार बनाने वाले प्रत्याशी समस्याओं को अपना चुनावी मुद्दा नहीं बनाते, जिसके चलते समस्याएं कभी खत्म नहीं होतीं। अगर आम जनता को अपने क्षेत्र की सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को दूर करना है तो उन्हें समय-समय पर जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उन पर दबाव बनाना होगा।


 बुधवार को रुद्रपुर में आयोजित अमर उजाला के चुनावी परिचर्चा कार्यक्रम में शहर के हर वर्ग के लोगों ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक पार्टी ने चुनाव जीतने के बाद जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया, क्योंकि चुनाव के दौरान किसी भी दल के प्रत्याशी ने समस्याओं को अपना चुनावी मुद्दा बनाया ही नहीं। प्रत्याशी सिर्फ शक्लों पर और एक दूसरे की कमियों का बखान कर चुनाव लड़ते हैं न कि समस्याओं पर, जिसके कारण उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आज तक भी रुद्रपुर की जनता को न मेडिकल कालेज मिला और न ही जरूरत के मुताबिक सरकारी स्कूल। इसके अलावा शहर का व्यापारी जहां अतिक्रमण से जूझ रहा है, वहीं ईमानदार नौकरशाह के न मिलने से जनता अपराधों से त्रस्त है। परिचर्चा में यह बात सामने आई कि अगर चुनावों में समस्याओं को मुद्दा बनाए जाए तो यह प्रत्याशियों की हार-जीत तय करने में निर्णायक साबित होगी।
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पूरा शहर टूटी सड़कों की समस्याओं से जूझ रहा है। बिलासपुर रोड पर सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। इसके साथ ही लिंक मार्ग भी बेहद जर्जर हो गए हैं जिससे सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ गया है। फिर भी कोई भी जनप्रतिनिधि इस पर ध्यान नहीं देता। मेडिकल कालेज की घोषणा भी अभी परवान नहीं चढ़ पाई है।
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- हरीश ठुकराल, व्यापारी
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सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि यहां बनने वाली हर पार्टी की सरकार अपने साथ बेईमान नौकरशाह को लेकर आती है, ताकि वह इस विधानसभा क्षेत्र का दोहन अपने हिसाब से कर सके । अगर नौकरशाह नेताओं के इशारों पर काम न करके खुद निर्णय लेकर जनता के बीच काम करे तो भ्रष्टाचार काफी हद तक कम हो सकता है। -राजेश बंसल, व्यापारी
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रुद्रपुर में पार्किंग और अतिक्रमण की समस्या से हर वर्ग के लोग परेशान हैं। बाजार में आने वाले व्यक्ति के लिए अपना वाहन खड़ा करने की जगह नहीं है, जिससे आम आदमी तो परेशान होता ही है, साथ ही व्यापार भी प्रभावित होता है। जिला प्रशासन के साथ ही पुलिस प्रशासन के पास इस समस्या के समाधान के लिए कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है। - संजय जुनेजा, व्यापारी
 
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शहर की जनसंख्या बढ़ने के साथ ही यहां पर अपराध भी बढ़ा है। पुलिस प्रशासन का कोई भी अधिकारी इसे रोकने में कामयाब नहीं रहा। शहर में आए दिन बढ़ रही चोरियों, डकैती और हत्या की घटनाओं से शहर के लोग दहशत में जी रहे हैं। फिर भी कोई भी जनप्रतिनिधि इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।
-हरीश अरोरा, व्यापारी
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रुद्रपुर शहर स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी पिछड़ा है। जिला अस्पताल में उपकरण नहीं हैं। अस्पताल प्रशासन डाक्टरों की कमी का हवाला देता है। अगर डाक्टरों को तैनात कर भी दिया जाए तो वे उपकरण के अभाव में मरीजों की कोई मदद नहीं कर सकते। जिला अस्पताल पूरी तरह रेफरल सेंटर बन गया है।
- डा. प्रदीप अदलखा, चिकित्सक
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नकारात्मक राजनीति मुख्य समस्या है। किसी भी नेता के पास कोई विजन और विकास की सोच नहीं होती, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। पांच सालों के लिए आने वाला विधायक अगर एक विजन लेकर चले तो शहर के विकास को कोई रोक नहीं सकता। ---विजय साहनी, व्यापारी
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शहर में विकास की गति कुछ समय से रुक गई है, इसके पीछे का कारण यह है कि सरकारों ने इंफ्रास्टेक्चर पर ध्यान नहीं दिया। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण यहां बसाया गया औद्योगिक संस्थान सिडकुल है। इसके साथ ही नोट बंदी सही समय पर नहीं की गई जिसके चलते दो माह तक किसानों को गहन समस्याओं से जूझना पड़ा। इससे नेताओं और व्यापारी को भले ही फर्क न पड़ा हो पर किसान जरूर प्रभावित हुए। -गुलशन छाबड़ा, किसान
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शहर के पार्कों में अतिक्रमण होने से बच्चों के खेलने के लिए जगह नहीं है, जिससे बच्चों का शारीरिक विकास रुक रहा है। इसके साथ ही टूटी नालियां और जर्जर सड़कों से भी लोग परेशान हैं। जहां सड़कें सही हैं, वहां लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। कोई भी पार्टी विकास को अपना मुद्दा नहीं बनाती है। अब जनता को ही इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा। -आनंद बत्रा, समाजसेवी
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पुलिस प्रशासन के पास ट्रैफिक की समस्या का समाधान नहीं है। लोगों को आए दिन जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। बिगड़ी यातायात व्यवस्था से सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है, अगर यातायात व्यवस्था में सुधार किया जा सके तो काफी हद तक जनता की समस्या दूर हो सकती है।
--राकेश गाबा, व्यवसायी
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लंबे समय से शहर में मेडिकल कालेज नहीं बन पाया। इससे मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के सपना चकनाचूर हो रहा है। यहां के छात्र चाहते हैं कि वह मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद अपने शहर में ही रहकर लोगों को अपनी सेवाएं दे, लेकिन कोई अच्छा अस्पताल यहां पर नहीं है और न ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।
-मुस्कान गाबा, छात्रा
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क्वालिटी एजूकेशन के लिए शहर में हर 25 किमी की दूरी पर कालेज स्कूल को खोला जाना जरूरी है, लेकिन यहां ऐसे शिक्षण संस्थानों का अभाव है। अगर क्वालिटी एजुकेशन देने की दिशा में गंभीरता से काम किया जाए तो यहां के शिक्षित युवाओं का पलायन रुकेगा।
----गुरमीत सिंह वाही, व्यापारी
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सिडकुल बने लंबा समय हो गया, लेकिन आज भी उसका इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बन पाया है। योजनाएं सभी सरकारों ने बनाई, लेकिन उनके सफल क्रियान्वयन में सभी असफल रहीं। जिनके संबंध में समय समय पर जनप्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए, ताकि वह विकास करने को मजबूर हों। -- दिवाकर पांडे, वरिष्ठ अधिवक्ता

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नोटबंदी के साथ डिजिटल पेमेंट लोगों के लिए दोहरी समस्या बनी, सरकार ने लोगों को डिजिटल पेमेंट करने के लिए प्रेरित तो किया, लेकिन व्यापारियों को इसके लिए संसाधन नहीं दिए। इसके साथ ही शिक्षा के लिए हर सरकार उदासीन रही। कमीशन लेने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में रिसीवर बैठाने को तैयार रहती है। सरकारी स्कूलों के अभाव में गरीब बच्चों का भविष्य अधर में लटक रहा है।
-गुरमीत सिंह, व्यापारी

 
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