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तराई में रोटरी मल्चर से लहराएगी गन्ने की फसल
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Wed, 19 Oct 2016 12:46 AM IST
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राोटरी मल्चर मश्ाीन की जानकारी देते कंपनी के लाेग
- फोटो : अमर उजाला
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पंतनगर विश्वविद्यालय के किसान मेले में गन्ने का उत्पादन बढ़ाने वाली रोटरी मल्चर मशीन भी आई है। गन्ने की फसल काटने के बाद अब खेत में आग लगाने की जरूरत नहीं। यह मशीन जड़ें और खर-पतवार को खेत में ही समतल कर उसका बुरादा (पाउडर) बना देती है। 10 दिन में यह जैविक खाद का रूप ले लेता है और 15-20 दिन में खेत में गन्ने की नई फसल के अंकुर फूट पड़ते हैं। हरियाणा और पंजाब में इस मशीन से गन्ना किसान अधिक उत्पादन कर लाभ उठा रहे हैं।
गुजरात के राजकोट जिले की शक्तिमान टाइटिल से प्रसिद्ध कंपनी एग्रो टेक्नोलॉजी प्रा.लि. के जोनल मैनेजर सौरभ कुमार सिंह बताते हैं कि रोटरी मल्चर मशीन पहली बार उत्तराखंड के पंतनगर किसान मेले में आई है। इसके निर्माण के बाद सबसे पहले इसका व्यापक प्रचार हरियाणा पंजाब में किया गया जहां पर इसके बेहतर परिणाम मिले।
हरियाणा और पंजाब के किसान गन्ने की पैदावार से अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं। वहां की सरकारों ने तीन साल पहले खेतों में फसल कटाई के बाद आग लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, इसलिए अब वहां के किसान रोटरी मल्चर मशीन का उपयोग करते हैं और इसमें उन्हें जैविक खाद का भी फायदा मिलता है। खेतों में यूरिया आदि खाद डालने में भी रोटरी मल्चर मशीन से बीस प्रतिशत खाद कम डाला जाता है। उन्होंने बताया कि यह मशीन एक लाख रुपये से अधिक मूल्य की है। मेले में दो दिन में करीब 70 लाख रुपये के आर्डर बुक हो चुके हैं।
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। पर्वतीय क्षेत्रों में चूजों की ब्रीडिंग के लिए पालीहाउस बनाया गया है। इसके जरिए ठंडे क्षेत्रों के लोग भी मुर्गीपालन कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। वैटनरी विभाग के प्रोफेसर अवधेश कुमार बताते हैं कि चूजे के लिए करीब 90 से 95 प्रतिशत टैंप्रेचर जरूरी है। शोध छात्र तन्मय तिवारी, भावना भट्ट, शौर्य दुम्का, रोशनी का कहना है कि पॉलीहाउस सूरज के ताप को बाहर जाने से रोकता है। इस वजह से अंदर का तापमान लंबे समय तक एक समान बना रहता है।
पंतनगर विवि के 100वें किसान मेले के दूसरे दिन मंगलवार को खूब रौनक रही। सुबह से ही मेले में युवाओं की भी चहलकदमी देखी गई। किसानों में भी खास उत्साह रहा। खेती से संबंधित जानकारियां लेने के लिए स्टालों पर भी किसानों की भारी भीड़ देखी गई।
रुद्रपुर किसान मेले में सीमावती पांच जिलों से करीब 55 बसों में किसान पहुंचे। इसमें अधिकांश बरेली और पीलीभीत के थे। हालांकि रामपुर, मुरादाबाद और बिजनौर से भी यहां बसें पहुंची। बिजनौर जिले के कालागढ़ से भी बड़ी संख्या में किसान आए।
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गुजरात के राजकोट जिले की शक्तिमान टाइटिल से प्रसिद्ध कंपनी एग्रो टेक्नोलॉजी प्रा.लि. के जोनल मैनेजर सौरभ कुमार सिंह बताते हैं कि रोटरी मल्चर मशीन पहली बार उत्तराखंड के पंतनगर किसान मेले में आई है। इसके निर्माण के बाद सबसे पहले इसका व्यापक प्रचार हरियाणा पंजाब में किया गया जहां पर इसके बेहतर परिणाम मिले।
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हरियाणा और पंजाब के किसान गन्ने की पैदावार से अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं। वहां की सरकारों ने तीन साल पहले खेतों में फसल कटाई के बाद आग लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, इसलिए अब वहां के किसान रोटरी मल्चर मशीन का उपयोग करते हैं और इसमें उन्हें जैविक खाद का भी फायदा मिलता है। खेतों में यूरिया आदि खाद डालने में भी रोटरी मल्चर मशीन से बीस प्रतिशत खाद कम डाला जाता है। उन्होंने बताया कि यह मशीन एक लाख रुपये से अधिक मूल्य की है। मेले में दो दिन में करीब 70 लाख रुपये के आर्डर बुक हो चुके हैं।
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। पर्वतीय क्षेत्रों में चूजों की ब्रीडिंग के लिए पालीहाउस बनाया गया है। इसके जरिए ठंडे क्षेत्रों के लोग भी मुर्गीपालन कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। वैटनरी विभाग के प्रोफेसर अवधेश कुमार बताते हैं कि चूजे के लिए करीब 90 से 95 प्रतिशत टैंप्रेचर जरूरी है। शोध छात्र तन्मय तिवारी, भावना भट्ट, शौर्य दुम्का, रोशनी का कहना है कि पॉलीहाउस सूरज के ताप को बाहर जाने से रोकता है। इस वजह से अंदर का तापमान लंबे समय तक एक समान बना रहता है।
पंतनगर विवि के 100वें किसान मेले के दूसरे दिन मंगलवार को खूब रौनक रही। सुबह से ही मेले में युवाओं की भी चहलकदमी देखी गई। किसानों में भी खास उत्साह रहा। खेती से संबंधित जानकारियां लेने के लिए स्टालों पर भी किसानों की भारी भीड़ देखी गई।
रुद्रपुर किसान मेले में सीमावती पांच जिलों से करीब 55 बसों में किसान पहुंचे। इसमें अधिकांश बरेली और पीलीभीत के थे। हालांकि रामपुर, मुरादाबाद और बिजनौर से भी यहां बसें पहुंची। बिजनौर जिले के कालागढ़ से भी बड़ी संख्या में किसान आए।
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