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कूड़े के निस्तारण के लिए गांव में ढूंढे नहीं मिल रही जमीन
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रुद्रपुर। जिले की 356 ग्राम पंचायतों में कूड़ा निस्तारण के लिए ग्राम प्रधानों को भूमि ढूंढे नहीं मिल रही है। जिले भर के ग्राम प्रधान भूमि न मिलने के चलते जिला पंचायतीराज अधिकारी कार्यालय के चक्कर काटने में लगे हुए हैं।
दरअसल, बदलती जीवनशैली व एकल परिवार पद्धति के कारण आज गांवों में भी शहरों की तरह प्लास्टिक, पॉलीथिन व रैपर आदि का उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इससे गांव में निरंतर गंदगी बढ़ती जा रही है, यह गांव में बीमारियां फैलाने के साथ ही खेती के लिए भी बहुत नुकसानदेह है। इससे निपटने के लिए शहर की तरह ही गांवों में भी हर घर से गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जाएगा।
डीएम की ओर से गांव में कूड़े के निस्तारण के लिए भूमि चिह्नित की जाएगी। जिला पंचायतीराज अधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि गांवों में जब तक भूमि नहीं मिलेगी तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर किसी खाली स्थान पर कूड़ा फेंका जाएगा। उन्होंने बताया कि गांवों में घरों से कूड़ा उठाने के लिए ग्राम पंचायतें 50 रुपये यूजर चार्ज वसूलेंगी। संवाद
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दरअसल, बदलती जीवनशैली व एकल परिवार पद्धति के कारण आज गांवों में भी शहरों की तरह प्लास्टिक, पॉलीथिन व रैपर आदि का उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इससे गांव में निरंतर गंदगी बढ़ती जा रही है, यह गांव में बीमारियां फैलाने के साथ ही खेती के लिए भी बहुत नुकसानदेह है। इससे निपटने के लिए शहर की तरह ही गांवों में भी हर घर से गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जाएगा।
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डीएम की ओर से गांव में कूड़े के निस्तारण के लिए भूमि चिह्नित की जाएगी। जिला पंचायतीराज अधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि गांवों में जब तक भूमि नहीं मिलेगी तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर किसी खाली स्थान पर कूड़ा फेंका जाएगा। उन्होंने बताया कि गांवों में घरों से कूड़ा उठाने के लिए ग्राम पंचायतें 50 रुपये यूजर चार्ज वसूलेंगी। संवाद
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