खास खबर: बरेली से आया तराई के किसानों का नया दोस्त, जय गोपाल केंचुए से तैयार हो रही जैविक खाद
तराई के किसानों को जैविक खाद बनाने में मदद के लिए आईसीएआर बरेली से ‘जय गोपाल’ केंचुए कृषि विज्ञान केंद्र में लाए गए हैं।
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तराई के किसानों को जैविक खाद बनाने में मदद के लिए ‘जय गोपाल’ केंचुए को कृषि विज्ञान केंद्र में लाया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की बरेली स्थित इकाई से आए इन केंचुओं की मदद से वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा रही है।
केंद्र में किसानों को केंचुआ पालन और जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार केंचुए गोबर और अन्य जैविक पदार्थों को खाद में बदलने में मदद करते हैं। तैयार वर्मी कंपोस्ट का उपयोग खेतों के साथ गमलों और किचन गार्डन में भी किया जा सकता है। इससे जैविक कचरे का उपयोगी तरीके से निस्तारण करने और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
हर तापमान में जीवित रहता है...
‘जय गोपाल’ केंचुए की उपयोगिता के साथ खाद उत्पादन में तापमान, नमी और जैविक पदार्थों की गुणवत्ता का भी ध्यान रखा जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में गोबर और रसोई के जैविक कचरे से करीब 25 से 30 दिनों में वर्मी कंपोस्ट तैयार हो सकती है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश सहित पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
केंद्र में किसानों को खाद उत्पादन की प्रक्रिया समझाई जा रही है ताकि वे अपने स्तर पर भी यह व्यवस्था शुरू कर सकें। जरूरत के अनुसार किसानों और अन्य लोगों को खाद उत्पादन के लिए केंचुए भी उपलब्ध कराए जाते हैं। बड़े खेतों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद तैयार करने को उत्पादन क्षमता के अनुरूप व्यवस्था विकसित करनी होती है। - अनिल सैनी, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र