{"_id":"6ad660724ce95540ca0bbbc5","slug":"ips-kuhu-was-awarded-the-sword-of-honour-at-the-passing-out-parade-rudrapur-news-c-242-1-rdp1025-148685-2026-10-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: पासिंग आउट परेड में आईपीएस कुहू को स्वाॅर्ड ऑफ ऑनर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: पासिंग आउट परेड में आईपीएस कुहू को स्वाॅर्ड ऑफ ऑनर
Mon, 19 Oct 2026 11:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 19 Oct 2026 11:54 PM IST
विज्ञापन
पंतनगर। तेलंगाना के हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में बीते शनिवार को 78वें रेग्युलर भर्ती बैच का दीक्षांत समारोह हुआ। इसमें 151 प्रोबेशनर्स पासआउट शामिल हुए। इस समारोह में गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी कुहू गर्ग को स्वाॅर्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
मूलरूप से पानीपत (हरियाणा) के कुराना गांव निवासी एवं उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्राध्यापक एवं पूर्व डीन डाॅ. अलकनंदा अशोक की बेटी कुहू गर्ग का जन्म 22 सितंबर 1998 को हुआ। उन्होंने सेंट थॉमस कॉलेज देहरादून से प्रारंभिक शिक्षा और दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की है। उन्होंने वर्ष 2023 में यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 178 हासिल की और वर्ष 2025 में वह आईपीएस में चयनित हुईं।
--
बेस्ट ड्रिल का सम्मान भी मिला
डाॅ. अलकनंदा ने बताया कि 151 अधिकारियों वाले 2024 आईपीएस बैच में जब कुहू के नाम की घोषणा बेस्ट आउटडोर प्रोबेशनर के रूप में हुई और उसे प्रतिष्ठित स्वाॅर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया, तो उन्हें और उनके पति को लगा जैसे वर्षों की तपस्या सफल हो गई हो। बताया कि कुहू को सटीकता और समन्वय के लिए बेस्ट ड्रिल का पुरस्कार भी मिला।
विज्ञापन
-इनसेट
कुहू को घुटने की चोट ने बनाया आईपीएस
डाॅ. अलकनंदा ने बताया कि कुहू ने नौ वर्ष की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहीं कुहू ने घुटने की गंभीर चोट के बाद अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा भी पास कर ली। एक समय था जब कुहू की पहचान देश की उभरती बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में होती थी। कुहू ने अपने खेल कॅरियर में 56 राष्ट्रीय और 19 अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किए हैं। वर्ष 2018 में वह विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक भी पहुंची थीं।
इनसेट
बैडमिंटन में मिली निराशा तो यूपीएससी का किया रुख
पिता अशोक कुमार ने बताया कि कुहू ने बैडमिंटन को कॅरिअर बना लिया था। विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी के बाद उनका लक्ष्य ओलंपिक खेलना था लेकिन सर्जरी ने वह सपना तोड़ दिया। ऐसे में उसने निराश होने की बजाय कॅरिअर को दूसरी धारा में मोड़ते हुए यूपीएससी की तैयारी की। यह निर्णय उन्होंने कोरोना काल में प्रशासन, पुलिस, चिकित्सकाें के समाज में योगदान को देखते हुए लिया था। उन्होंने माना कि कुहू का आईपीएस में चयन होना उनकी जीवन का सबसे खूबसूरत पल है। बेटी ने यह साबित किया कि सकारात्मक सोचने पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
विज्ञापन
मूलरूप से पानीपत (हरियाणा) के कुराना गांव निवासी एवं उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्राध्यापक एवं पूर्व डीन डाॅ. अलकनंदा अशोक की बेटी कुहू गर्ग का जन्म 22 सितंबर 1998 को हुआ। उन्होंने सेंट थॉमस कॉलेज देहरादून से प्रारंभिक शिक्षा और दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की है। उन्होंने वर्ष 2023 में यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 178 हासिल की और वर्ष 2025 में वह आईपीएस में चयनित हुईं।
विज्ञापन
बेस्ट ड्रिल का सम्मान भी मिला
डाॅ. अलकनंदा ने बताया कि 151 अधिकारियों वाले 2024 आईपीएस बैच में जब कुहू के नाम की घोषणा बेस्ट आउटडोर प्रोबेशनर के रूप में हुई और उसे प्रतिष्ठित स्वाॅर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया, तो उन्हें और उनके पति को लगा जैसे वर्षों की तपस्या सफल हो गई हो। बताया कि कुहू को सटीकता और समन्वय के लिए बेस्ट ड्रिल का पुरस्कार भी मिला।
विज्ञापन
-इनसेट
कुहू को घुटने की चोट ने बनाया आईपीएस
डाॅ. अलकनंदा ने बताया कि कुहू ने नौ वर्ष की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहीं कुहू ने घुटने की गंभीर चोट के बाद अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा भी पास कर ली। एक समय था जब कुहू की पहचान देश की उभरती बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में होती थी। कुहू ने अपने खेल कॅरियर में 56 राष्ट्रीय और 19 अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किए हैं। वर्ष 2018 में वह विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक भी पहुंची थीं।
इनसेट
बैडमिंटन में मिली निराशा तो यूपीएससी का किया रुख
पिता अशोक कुमार ने बताया कि कुहू ने बैडमिंटन को कॅरिअर बना लिया था। विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी के बाद उनका लक्ष्य ओलंपिक खेलना था लेकिन सर्जरी ने वह सपना तोड़ दिया। ऐसे में उसने निराश होने की बजाय कॅरिअर को दूसरी धारा में मोड़ते हुए यूपीएससी की तैयारी की। यह निर्णय उन्होंने कोरोना काल में प्रशासन, पुलिस, चिकित्सकाें के समाज में योगदान को देखते हुए लिया था। उन्होंने माना कि कुहू का आईपीएस में चयन होना उनकी जीवन का सबसे खूबसूरत पल है। बेटी ने यह साबित किया कि सकारात्मक सोचने पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।