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भारतीय प्रबंध संस्थानों को अब पूरी आजादी
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Sun, 26 Mar 2017 12:34 AM IST
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मानव संसाधन मंत्री
- फोटो : Amar Ujala
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मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने अब भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) को पूर्ण स्वायत्तता देने की तैयारी कर ली है। इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में लाया जा रहा है। कुछ समय पहले ही मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इस विधेयक के लागू होने पर प्रबंधन संस्थान अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की तरह डिप्लोमा की जगह डिग्री दे सकेंगे। इन संस्थानों को प्रशासनिक, वित्तीय रूप से भी स्वायत्तता मिल जाएगी।
आईआईएम काशीपुर के दीक्षांत समारोह में शनिवार को पहुंचे जावड़ेकर ने कहा कि यह उच्च शिक्षा में सुधार के तहत उठाया गया कदम है। केंद्र सरकार पैसा दो और भूल जाओ (फंड एंड फॉर्गेट) की अवधारणा पर काम कर रही है। सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा केंद्रों पर विश्वास किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक उच्च शिक्षा में सुधार के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है। हायर एजूकेशन फाइनेंस एजेंसी (हैफा) के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उच्चतर आविष्कार योजना के तहत 298 प्रोजेक्ट मंत्रालय को मिले हैं। एक और दो अप्रैल को हैकोथेन-2017 के तहत देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के 72000 छात्र विभिन्न समस्याओं के डिजिटल समाधान के लिए 36 घंटे तक मंथन करेंगे। लोगों के सहयोग से समस्याओं के समाधान की यह एक बहुत बड़ी कोशिश होगी। जावड़ेकर ने प्रबंध और शोध संस्थानों से लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं का हल खोजने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि लोगों से कट जाने वाला संस्थान किसी काम का नहीं रहता। छात्रों से उन्होंने कहा कि वे आत्मसंतुष्टि के लिए भी नौकरी करें, न कि केवल पैसा कमाने के लिए। प्रबंधन संस्थानों में पे और पैकेज की बात होती है। जरूरत जनोपयोगी काम की है। छात्र गरीब व्यक्ति को याद रखें। काशीपुर संस्थान को केंद्र सरकार ने 300 करोड़ रुपये दिए हैं और इस पैसे में गरीब लोगों की ओर से दिया गया टैक्स भी शामिल है।
आईआईएम काशीपुर के दीक्षांत समारोह में शनिवार को पहुंचे जावड़ेकर ने कहा कि यह उच्च शिक्षा में सुधार के तहत उठाया गया कदम है। केंद्र सरकार पैसा दो और भूल जाओ (फंड एंड फॉर्गेट) की अवधारणा पर काम कर रही है। सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा केंद्रों पर विश्वास किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक उच्च शिक्षा में सुधार के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है। हायर एजूकेशन फाइनेंस एजेंसी (हैफा) के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उच्चतर आविष्कार योजना के तहत 298 प्रोजेक्ट मंत्रालय को मिले हैं। एक और दो अप्रैल को हैकोथेन-2017 के तहत देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के 72000 छात्र विभिन्न समस्याओं के डिजिटल समाधान के लिए 36 घंटे तक मंथन करेंगे। लोगों के सहयोग से समस्याओं के समाधान की यह एक बहुत बड़ी कोशिश होगी। जावड़ेकर ने प्रबंध और शोध संस्थानों से लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं का हल खोजने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि लोगों से कट जाने वाला संस्थान किसी काम का नहीं रहता। छात्रों से उन्होंने कहा कि वे आत्मसंतुष्टि के लिए भी नौकरी करें, न कि केवल पैसा कमाने के लिए। प्रबंधन संस्थानों में पे और पैकेज की बात होती है। जरूरत जनोपयोगी काम की है। छात्र गरीब व्यक्ति को याद रखें। काशीपुर संस्थान को केंद्र सरकार ने 300 करोड़ रुपये दिए हैं और इस पैसे में गरीब लोगों की ओर से दिया गया टैक्स भी शामिल है।
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