काशीपुर: 21 दिन में 45,453 कॉल...अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग गेटवे बाईपास की आशंका, जांच एजेंसियों के सामने चुनौती
काशीपुर में पकड़े गए संदिग्ध टेलीकॉम सेटअप से 21 दिन में 45,453 आउटगोइंग कॉल का खुलासा हुआ। आशंका है कि इसके जरिये अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग गेटवे को बाईपास कर स्वचालित कॉल की जा रही थीं, जिसके कारण जांच एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
विस्तार
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एक कार्यालय, इंटरनेट कनेक्शन और कुछ नेटवर्किंग उपकरणों के जरिये 21 दिन में 45,453 आउटगोइंग कॉल। काशीपुर में पकड़े गए संदिग्ध टेलीकॉम सेटअप की शुरुआती जांच में सामने आए इस आंकड़े ने जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनाैती खड़ी कर दी है। आशंका है कि इस व्यवस्था के जरिये अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग गेटवे को बाईपास कर स्वचालित कॉल की जा रही थीं। इसके संभावित इस्तेमाल और कार्यप्रणाली को लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
एसटीएफ की साइबर क्राइम कुमाऊं यूनिट ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) के साथ संयुक्त कार्रवाई कर एनएच इंटरप्राइजेज के नाम से संचालित इस सेटअप का भंडाफोड़ किया और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। एसटीएफ के अनुसार शुरुआती तकनीकी जांच में एसआईपी कनेक्शन के दुरुपयोग और आईएलडी गेटवे बाईपास के संकेत मिले हैं। आउटगोइंग कॉल का औसत निकालें तो प्रतिदिन करीब 2,164 कॉल होती हैं।
जांच का अहम पहलू यह है कि संदिग्ध सेटअप में अंतरराष्ट्रीय कॉल को अधिकृत आईएलडी मार्ग से गुजारने के बजाय इंटरनेट आधारित संचार तकनीक और एसआईपी कनेक्शन के माध्यम से भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क तक पहुंचाने की आशंका है। दूरसंचार विभाग पहले भी ऐसे अवैध सेटअप के बारे में बता चुका है जिनमें इंटरनेट के जरिये विदेश से आने वाली कॉल को भारतीय नेटवर्क पर स्थानीय कॉल की तरह प्रदर्शित किया जाता था। इससे कॉल करने वाले की वास्तविक अंतरराष्ट्रीय पहचान छिप सकती है।
ऐसी व्यवस्था में फोन पर दिखाई देने वाला भारतीय नंबर हमेशा कॉल के वास्तविक स्रोत का भरोसेमंद प्रमाण नहीं रह जाता। हालांकि, काशीपुर के मामले में किन नंबरों पर कॉल की गईं, कॉल प्राप्त करने वालों को स्क्रीन पर क्या दिखाई दिया और कितनी कॉल वास्तव में विदेश से आई थीं, इसका विस्तृत ब्योरा जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो पाएगा।
कंप्यूटर में मिले वर्चुअल मशीन और कॉल प्रबंधन के साक्ष्य
एसटीएफ की कार्रवाई में एक कंप्यूटर सिस्टम, वर्चुअल मशीन से संबंधित डेटा, तीन जियो राउटर, एक एयरटेल राउटर, एसईटीयूप वीटीईपी उपकरण, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन और अन्य नेटवर्किंग डिवाइस बरामद किए गए हैं। शुरुआती तकनीकी जांच में लिनक्स आधारित वर्चुअल मशीन, फ्री पीबीएक्स लॉगिन, एसएसएच क्लाइंट और व्हाट्सएप वेब से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी मिलने की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, व्हाट्सएप चैट में एसआईपी ट्रंक, एसआईपी केबल और इंटरनेट कनेक्शन से संबंधित बातचीत मिली है। कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों से संबंधित लॉग्स और वर्चुअल मशीन का डेटा सुरक्षित किया गया है। इनकी फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कॉलिंग सिस्टम किसने स्थापित किया, उसे कौन संचालित कर रहा था और नेटवर्क के लिए तकनीकी संसाधन कहां से जुटाए गए थे।
अब नेटवर्क के दूसरे सिरों की तलाश
मामले में जांच केवल बरामद उपकरणों तक सीमित नहीं है। जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कॉल किस नेटवर्क से आती थीं उन्हें किस तकनीकी के जरिये आगे भेजा जाता था और इस सेटअप को चलाने में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। इसके लिए डिजिटल लॉग्स, संचार संबंधी रिकॉर्ड और बरामद उपकरणों के डेटा का विश्लेषण महत्वपूर्ण होगा। एसटीएफ की ओर से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नईमुद्दीन के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, रुद्रपुर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4) और 61(2), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी तथा दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 42(1) और 42(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इन कॉलों की प्रकृति और उद्देश्य क्या था।
आईएलडी गेटवे बाईपास करना क्यों खतरनाक
विदेश से आने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉल सामान्यतः अधिकृत अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम मार्ग से भारतीय नेटवर्क तक पहुंचती है। इस मार्ग को दरकिनार कर इंटरनेट आधारित तकनीक से कॉल को भारतीय नेटवर्क पर स्थानीय कॉल की तरह पहुंचाने की व्यवस्था को आईएलडी गेटवे बाईपास कहते हैं। इससे कॉल के वास्तविक स्रोत की पहचान और दूरसंचार नियमों के अनुपालन से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।
रोबो कॉलिंग का दुरुपयोग संभव
इसमें कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर की मदद से स्वचालित फोन कॉल की जाती हैं। कॉल में पहले से रिकॉर्ड किया गया संदेश या कृत्रिम आवाज हो सकती है। इसका वैध इस्तेमाल भी संभव है लेकिन अनधिकृत प्रचार, फर्जी पहचान या साइबर ठगी के लिए भी ऐसी कॉलिंग का दुरुपयोग हो सकता है।
वर्चुअल मशीन और एसएसएच क्लाइंट का भी इस्तेमाल
वर्चुअल मशीन कंप्यूटर के भीतर सॉफ्टवेयर से बनाया गया एक अलग आभासी कंप्यूटर होता है जिस पर अपना ऑपरेटिंग सिस्टम और प्रोग्राम चलाए जा सकते हैं। जांच में इसका डेटा यह समझने में मदद कर सकता है कि सिस्टम पर कौन से प्रोग्राम और सेवाएं इस्तेमाल की जा रही थीं। इसी तरह एसएसएच क्लाइंट नेटवर्क के जरिये किसी दूसरे कंप्यूटर या सर्वर तक सुरक्षित रिमोट पहुंच बनाने का सॉफ्टवेयर है। इसका उपयोग सिस्टम प्रबंधन और तकनीकी सहायता में भी होता है। जांच में इसकी मौजूदगी से अकेले यह साबित नहीं होता कि सिस्टम को दूर से अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।
इन सवालों के जवाब मिलने बाकी
- 45,453 कॉल में कितनी कॉल अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से आई थीं और कितनी स्वचालित थीं?
- क्या कॉल प्राप्त करने वालों के मोबाइल पर भारतीय नंबर प्रदर्शित हुए थे?
- क्या कॉल के जरिये किसी व्यक्ति से बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या धन मांगा गया? क्या किसी पीड़ित की पहचान हुई है?
- एनएच इंटरप्राइजेज के नाम पर इंटरनेट और एसआईपी कनेक्शन किसने लिए और भुगतान किस खाते से किया गया?
- क्या कॉलिंग सिस्टम के संचालकों के विदेश में संपर्क या साझेदार थे?
- क्या डिजिटल साक्ष्य से दूसरे ऑपरेटरों, तकनीकी सहयोगियों या संभावित लाभार्थियों की पहचान हुई है?
एक गोपनीय सूचना और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर एनएच इंटरप्राइजेज के खिलाफ जांच की कार्रवाई की गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह अवैध टेलीकॉम सेटअप चलाया जा रहा था। एसआईपी (सेशन इनिशिएशन प्रोटोकॉल) कनेक्शन का दुरुपयोग कर हजारों आउटगोइंग कॉल्स किए जाने का खुलासा हुआ है। - अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ
कॉल सेंटर के लिए 22 हजार किराये में लिया था भवन
काशीपुर शहर के आकांक्षा गार्डन में एसटीएफ की ओर से पकड़ा गया अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर अगस्त से संचालित हो रहा था। आरोपियों ने रिहायशी इलाके में 22 हजार रुपये महीना किराये पर भवन लेकर ठगी के इस धंधे को अंजाम देना शुरू किया था।
रिहायशी इलाके में कॉल सेंटर होने से किसी को शक नहीं हुआ। एक बड़े हॉल में एनएस इंटरप्राईजेज को शुरू किया गया था। अंदर पांच-छह हिस्सों में जगह को बांटा गया था। दिन में बंद रहने वाला यह सेंटर रात होते ही सक्रिय हो जाता था ताकि अमेरिका और अन्य देशों में दिन होने पर विदेशी नागरिकों को कॉल कर ठगा जा सके। आरोपी नईमुद्दीन को तो पुलिस ने दबोच लिया लेकिन मुख्य आरोपी मुरादाबाद निवासी मोहम्मद आमिर की गिरफ्तारी अभी बाकि है।
बताया जा रहा है कि आमिर मुरादाबाद से अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर संचालित कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस कॉल सेंटर के जरिये अब तक लाखों डॉलर की ठगी की आशंका है। मकान मालिक से भी पूछताछ की जा रही है कि उसने बिना सत्यापन के मकान कैसे किराये पर दिया। पुलिस मकान मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी में है। एसटीएफ के निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि 18 अगस्त को कॉल सेंटर चालू हुआ था जो 22 अक्तूबर तक संचालित रहा है। इस मामले के मुख्य आरोपी को भी जल्द पकड़ा जाएगा।
पिछले माह बाजपुर में पकड़ा गया था कॉल सेंटर
पिछले महीने 26 सितंबर को एसटीएफ ने बाजपुर में इंटरनेशनल कॉल को भारतीय मोबाइल नंबर से सामान्य कॉल में बदलकर उनकी पहचान छिपाने वाले नेटवर्क को पकड़ा था। पुलिस ने बाजपुर में किराये के कमरे से मुरादाबाद निवासी कादिर अली को गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से दो सिम बॉक्स, 77 एंटीना, 114 एयरटेल सिम, इंटरनेट राउटर सहित अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी का बांग्लादेशी नागरिक से कनेक्शन है जो हर माह इसके लिए आरोपी को 50 हजार रुपये देता था। संचार मंत्रालय की ओर से मिले गोपनीय पत्र के आधार पर साइबर थाना पुलिस रुद्रपुर 72 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही थी।