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जौलासाल वन क्षेत्र में मिला 26 खैर के हरे पेड़ों का अवैध कटान
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सितारगंज। दक्षिणी जौलासाल वन क्षेत्र में अवैध रूप से 26 पेड़ों के कटान के मामले में वन निगम और रेंज के कुछ कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। डीएफओ ने जांच के बाद कार्रवाई के लिए वन संरक्षक को रिपोर्ट भेजी है। इससे अब वन निगम और रेंज के कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
बीते दिनों ग्रामीणों ने वन निगम के कटान की आड़ में अवैध तरीके से पेड़ों को कटाने की शिकायत की थी। इस पर वन संरक्षक ने तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ को मामले में जांच कराने के निर्देश दिए थे। नौ जून को उप प्रभागीय वनाधिकारी शिवराज चंद्र ने किलपुरा रेंजर जीवन चंद्र उप्रेती, सुरई के डिप्टी रेंजर सतीश चंद्र रेखाड़ी और खटीमा रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल के नेतृत्व में 12 वन अफसर और कर्मचारियों की तीन टीमों का गठन किया था और टीम ने जौलासाल वन क्षेत्र में कटान की जांच की। डीएफओ संदीप कुमार ने भी रेंज में काटे गए पेड़ों का मुआयना किया था।
शुक्रवार को डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि वन विकास निगम को जौलासाल क्षेत्र में 1571 पेड़ों की लॉट आवंटित की गई थी। इनमें करीब 1300 से अधिक खैर और शेष बचे पेड़ शीशम प्रजाति के थे जो कि वन विकास निगम के अधीन थे। रेंज के कर्मचारियों पर अनुश्रवण की जिम्मेदारी थी। वन विकास निगम पेड़ों का कटान करने के बाद त्यागपत्र विभाग को देता है। इसके बाद उनके काटे गए पेड़ों का वन क्षेत्राधिकारी और स्टाफ से संयुक्त सर्वे कराकर जांच कराई जाती है। अब तक वन निगम ने विधिवत रूप से त्यागपत्र नहीं दिया।
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बताया कि जांच कराई तो पता चला कि 1571 की जगह 1597 पेड़ काटे गए हैं। इनमें अवैध तरीके से खैर प्रजाति के 26 हरे पेड़ों को काटना सामने आया है। इस पर वन विकास निगम के टनकपुर डिपो में लॉट को सीज कर दिया है। वन निगम कर्मियों और रेंज के कर्मचारियों की लापरवाही परिलक्षित हुई है। बताया कि कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी है।
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बीते दिनों ग्रामीणों ने वन निगम के कटान की आड़ में अवैध तरीके से पेड़ों को कटाने की शिकायत की थी। इस पर वन संरक्षक ने तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ को मामले में जांच कराने के निर्देश दिए थे। नौ जून को उप प्रभागीय वनाधिकारी शिवराज चंद्र ने किलपुरा रेंजर जीवन चंद्र उप्रेती, सुरई के डिप्टी रेंजर सतीश चंद्र रेखाड़ी और खटीमा रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल के नेतृत्व में 12 वन अफसर और कर्मचारियों की तीन टीमों का गठन किया था और टीम ने जौलासाल वन क्षेत्र में कटान की जांच की। डीएफओ संदीप कुमार ने भी रेंज में काटे गए पेड़ों का मुआयना किया था।
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शुक्रवार को डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि वन विकास निगम को जौलासाल क्षेत्र में 1571 पेड़ों की लॉट आवंटित की गई थी। इनमें करीब 1300 से अधिक खैर और शेष बचे पेड़ शीशम प्रजाति के थे जो कि वन विकास निगम के अधीन थे। रेंज के कर्मचारियों पर अनुश्रवण की जिम्मेदारी थी। वन विकास निगम पेड़ों का कटान करने के बाद त्यागपत्र विभाग को देता है। इसके बाद उनके काटे गए पेड़ों का वन क्षेत्राधिकारी और स्टाफ से संयुक्त सर्वे कराकर जांच कराई जाती है। अब तक वन निगम ने विधिवत रूप से त्यागपत्र नहीं दिया।
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बताया कि जांच कराई तो पता चला कि 1571 की जगह 1597 पेड़ काटे गए हैं। इनमें अवैध तरीके से खैर प्रजाति के 26 हरे पेड़ों को काटना सामने आया है। इस पर वन विकास निगम के टनकपुर डिपो में लॉट को सीज कर दिया है। वन निगम कर्मियों और रेंज के कर्मचारियों की लापरवाही परिलक्षित हुई है। बताया कि कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी है।