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अवैध कटौती से भड़के किसानों ने एनएच पर जाम लगाया
अमर उजाला ब्यूरो किच्छा
Updated Tue, 04 Oct 2016 11:35 PM IST
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एनएच पर बैठे किसान
- फोटो : अमर उजाला
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धान खरीद में चावल मिल मालिकों पर अवैध कटौती और कम मूल्य देने का आरोप लगाकर किसानों ने एनएच पर दो घंटे तक जाम लगाया। मंडी सचिव और सीओ समेत तमाम अधिकारियों के मनाने पर किसानों ने जाम खोला।
मंगलवार सुबह लगभग 9 बजे मंडी में धान की ट्रालियां लेकर आए किसान मंडी गेट पर सड़क पर बैठ गए और ट्रालियों व अन्य वाहनों को आड़ा तिरछा लगाकर जाम लगा दिया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि मंडी में किसानों के साथ चावल मिल मालिक धान खरीद के नाम पर किसानों की मजबूरी का लाभ उठाकर जबरन अंधाधुंध कटौतियां कर रहे हैं।
सरकड़ा सितारगंज निवासी सुरेंद्र सिंह का आरोप था कि 70 किलोग्राम की धान की एक बोरी पर एक किलो धान जबरन काटा जा रहा है। उनका कहना था कि नगर के सभी चावल मिल मालिकों ने मिलीभगत कर रखी है। सरकारी भाव 1460 होने के बावजूद बोली की शुरूआत 900-950 से की जाती है। किसान को 1460 रुपये सरकारी मूल्य के बावजूद मात्र 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य मिल रहा है।
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सूचना पर मंडी समिति सचिव, मंडी अध्यक्ष रमेश तिवारी के अलावा सीओ हरीश मेहरा समेत तमाम पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई और किसानों को समझाने का प्रयास किया। बाद में कई किसानों के साथ मंडी कार्यालय में वार्ता की गई। लगभग सवा दो घंटे बाद किसान जाम खोलने को तैयार हुए। जाम लगाने वाले अधिकांश किसान बाहरी क्षेत्रों के थे।
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मंगलवार सुबह लगभग 9 बजे मंडी में धान की ट्रालियां लेकर आए किसान मंडी गेट पर सड़क पर बैठ गए और ट्रालियों व अन्य वाहनों को आड़ा तिरछा लगाकर जाम लगा दिया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि मंडी में किसानों के साथ चावल मिल मालिक धान खरीद के नाम पर किसानों की मजबूरी का लाभ उठाकर जबरन अंधाधुंध कटौतियां कर रहे हैं।
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सरकड़ा सितारगंज निवासी सुरेंद्र सिंह का आरोप था कि 70 किलोग्राम की धान की एक बोरी पर एक किलो धान जबरन काटा जा रहा है। उनका कहना था कि नगर के सभी चावल मिल मालिकों ने मिलीभगत कर रखी है। सरकारी भाव 1460 होने के बावजूद बोली की शुरूआत 900-950 से की जाती है। किसान को 1460 रुपये सरकारी मूल्य के बावजूद मात्र 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य मिल रहा है।
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सूचना पर मंडी समिति सचिव, मंडी अध्यक्ष रमेश तिवारी के अलावा सीओ हरीश मेहरा समेत तमाम पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई और किसानों को समझाने का प्रयास किया। बाद में कई किसानों के साथ मंडी कार्यालय में वार्ता की गई। लगभग सवा दो घंटे बाद किसान जाम खोलने को तैयार हुए। जाम लगाने वाले अधिकांश किसान बाहरी क्षेत्रों के थे।