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Udham Singh Nagar News: रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों को बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद
Tue, 11 Aug 2026 01:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 11 Aug 2026 01:22 AM IST
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रुद्रपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर में बाल रोग (पीडियाट्रिक्स) विभाग को नया नेतृत्व मिल गया है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ऋतु रखोलिया ने सोमवार को प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उनके कार्यभार ग्रहण करने से अस्पताल में बच्चों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।
पदभार संभालने के बाद डॉ. ऋतु ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से मिलकर विभाग की वर्तमान स्थिति और आवश्यकताओं पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने पीडियाट्रिक्स ओपीडी, एनआईसीयू (NICU) और वार्ड का भी निरीक्षण किया।
एचओडी ने कहा कि हमारी प्राथमिकता होगी कि दूर-दराज से आने वाले बच्चों को उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना, ओपीडी का समय बढ़ाने के साथ भर्ती मरीजों की चौबीस घंटे बेहतर देखभाल, कुपोषण नियंत्रण, टीकाकरण और नवजात शिशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देना है। इनके अलावा एनआईसीयू में बेड और आधुनिक उपकरणों की संख्या बढ़ाना, नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना भी है।
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प्राचार्य, डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि ऋतु के अनुभव से रुद्रपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा। इसके चलते उन्हें हल्द्वानी या बरेली रेफर नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
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पदभार संभालने के बाद डॉ. ऋतु ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से मिलकर विभाग की वर्तमान स्थिति और आवश्यकताओं पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने पीडियाट्रिक्स ओपीडी, एनआईसीयू (NICU) और वार्ड का भी निरीक्षण किया।
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एचओडी ने कहा कि हमारी प्राथमिकता होगी कि दूर-दराज से आने वाले बच्चों को उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना, ओपीडी का समय बढ़ाने के साथ भर्ती मरीजों की चौबीस घंटे बेहतर देखभाल, कुपोषण नियंत्रण, टीकाकरण और नवजात शिशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देना है। इनके अलावा एनआईसीयू में बेड और आधुनिक उपकरणों की संख्या बढ़ाना, नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना भी है।
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प्राचार्य, डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि ऋतु के अनुभव से रुद्रपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा। इसके चलते उन्हें हल्द्वानी या बरेली रेफर नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।