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Udham Singh Nagar News: इंसानी बेरुखी के आगे सरकार की सड़क राहत योजनाएं पड़ रहीं फीकी
Wed, 28 Oct 2026 12:49 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 28 Oct 2026 12:49 AM IST
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रुद्रपुर। सड़क हादसे में घायलों की मदद के लिए सरकार राहवीर और पीएम राहत जैसी योजना चला रही है लेकिन इंसानी बेरुखी के आगे यह योजनाएं दम तोड़ रहीं हैं। स्थिति यह है कि 10 दिन में अलग-अलग सड़क हादसों में 12 से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई लेकिन किसी ने भी घायलों को अस्पताल पहुंचाने की जेहमत नहीं उठाई।
सड़क पर हादसा होने के बाद घायल की मदद करना उसकी जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। इसके बावजूद कानूनी कार्रवाई और पुलिस पूछताछ के डर से लोग अक्सर घटनास्थल पर रुकने से बचते हैं। नतीजतन, समय पर उपचार मिलने की संभावना कमजोर पड़ जाती है। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य मदद करने वालों को प्रोत्साहित करना और घायलों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराना है लेकिन लोगों की सीमित भागीदारी के कारण इनका अपेक्षित लाभ नजर नहीं आ रहा। लगातार हो रहे हादसों के बीच यह स्थिति सड़क सुरक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है।
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सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर खड़े हो रहे सवाल
सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतें यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर रही हैं। तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी हादसों की आशंका बढ़ाती है। कई बार सड़क की खराब स्थिति और संकेतकों की कमी भी दुर्घटना की वजह बनती है।
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हादसे के बाद गोल्डन आवर में इलाज जरूरी
सड़क हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। इस दौरान घायल को उचित चिकित्सा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव या सिर में चोट लगने पर इलाज में देरी जानलेवा हो सकती है। समय पर सूचना और सही मदद अहम साबित हो सकती है।
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कोट-
योजनाओं को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आमजन से अपील है कि सड़क हादसे में लोगों की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाएं। - विभव सैनी, सीओ
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सड़क पर हादसा होने के बाद घायल की मदद करना उसकी जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। इसके बावजूद कानूनी कार्रवाई और पुलिस पूछताछ के डर से लोग अक्सर घटनास्थल पर रुकने से बचते हैं। नतीजतन, समय पर उपचार मिलने की संभावना कमजोर पड़ जाती है। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य मदद करने वालों को प्रोत्साहित करना और घायलों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराना है लेकिन लोगों की सीमित भागीदारी के कारण इनका अपेक्षित लाभ नजर नहीं आ रहा। लगातार हो रहे हादसों के बीच यह स्थिति सड़क सुरक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है।
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सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर खड़े हो रहे सवाल
सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतें यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर रही हैं। तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी हादसों की आशंका बढ़ाती है। कई बार सड़क की खराब स्थिति और संकेतकों की कमी भी दुर्घटना की वजह बनती है।
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हादसे के बाद गोल्डन आवर में इलाज जरूरी
सड़क हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। इस दौरान घायल को उचित चिकित्सा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव या सिर में चोट लगने पर इलाज में देरी जानलेवा हो सकती है। समय पर सूचना और सही मदद अहम साबित हो सकती है।
कोट-
योजनाओं को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आमजन से अपील है कि सड़क हादसे में लोगों की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाएं। - विभव सैनी, सीओ