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Udham Singh Nagar News: सरकारी अस्पताल में शुरू हुई एफएनएसी जांच की सुविधा
Tue, 27 Jan 2026 11:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 27 Jan 2026 11:36 PM IST
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काशीपुर। शरीर में होने वाली गांठ के मरीजों को अब जांच के लिए ज्यादा खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। निजी लैबों में होने वाली एफएनएसी जांच की सुविधा अब एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी लैब में भी मिलने लगी है। वहां मरीज राजकीय दरों पर जांच करा सकते हैं।
एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) जांच एक त्वरित, न्यूनतम आक्रामक और सस्ती निदान प्रक्रिया है। इसमें शरीर में गांठ, सूजन या संदिग्ध ऊतकों का सैंपल लेकर कैंसर या संक्रमण की जांच की जाती है। डॉक्टर गांठ में एक पतली खोखली सुई से कोशिकाओं को निकालकर जांच करते हैं।
एफएनएसी जांच में स्तन, थायरॉइड, गर्दन के लिम्फ नोड्स, लार ग्रंथियों में मौजूद गांठ की प्रकृति (कैंसर या सौम्य) का पता लगता है। इससे बड़ी सर्जरी या चीरा-टांके से बचा जा सकता है। यह टीबी का पता लगाने के लिए भी उपयोग की जा सकती है।
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यह जांच 1400 से 2000 रुपये तक की होती है। इसके अलावा माइक्रोस्कोपी टेस्ट में सूक्ष्मदर्शी का उपयोग करके मूत्र, ऊतक या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों में रक्त कोशिकाओं, बैक्टीरिया, परजीवियों, क्रिस्टल और ट्यूमर कोशिकाओं की जांच की जाती है। यह संक्रमण, किडनी रोगों और मधुमेह जैसी स्थितियों का पता लगाने या निदान की पुष्टि करने में सहायक है। काशीपुर सरकारी अस्पताल में आसपास क्षेत्र के बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। यहां रोजाना करीब 40-50 मरीजों की विभिन्न जांचे होती हैं।
वर्जन
पैथोलॉजी लैब में हीमेटोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, वायरल मार्कर, माइक्रोस्कोपी जांच की जा रही है। इसमें करीब 58 रूटीन जांच होती हैं। एफएनएसी की सुविधा भी शुरू की गई है। यह एक आसान प्रक्रिया है। इसकी 48-72 घंटे में रिपोर्ट दी जाती है। करीब 20 मरीजों की जांच की जा चुकी है। संदिग्ध लगने पर कुछ मरीजों की बायोप्सी भी कराई गई है जिसमें कैंसर रोग उजागर हुआ। समय रहते इलाज भी शुरू किया गया है।
-डॉ. संदीप दीक्षित, सीएमएस, काशीपुर
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एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) जांच एक त्वरित, न्यूनतम आक्रामक और सस्ती निदान प्रक्रिया है। इसमें शरीर में गांठ, सूजन या संदिग्ध ऊतकों का सैंपल लेकर कैंसर या संक्रमण की जांच की जाती है। डॉक्टर गांठ में एक पतली खोखली सुई से कोशिकाओं को निकालकर जांच करते हैं।
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एफएनएसी जांच में स्तन, थायरॉइड, गर्दन के लिम्फ नोड्स, लार ग्रंथियों में मौजूद गांठ की प्रकृति (कैंसर या सौम्य) का पता लगता है। इससे बड़ी सर्जरी या चीरा-टांके से बचा जा सकता है। यह टीबी का पता लगाने के लिए भी उपयोग की जा सकती है।
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यह जांच 1400 से 2000 रुपये तक की होती है। इसके अलावा माइक्रोस्कोपी टेस्ट में सूक्ष्मदर्शी का उपयोग करके मूत्र, ऊतक या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों में रक्त कोशिकाओं, बैक्टीरिया, परजीवियों, क्रिस्टल और ट्यूमर कोशिकाओं की जांच की जाती है। यह संक्रमण, किडनी रोगों और मधुमेह जैसी स्थितियों का पता लगाने या निदान की पुष्टि करने में सहायक है। काशीपुर सरकारी अस्पताल में आसपास क्षेत्र के बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। यहां रोजाना करीब 40-50 मरीजों की विभिन्न जांचे होती हैं।
वर्जन
पैथोलॉजी लैब में हीमेटोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, वायरल मार्कर, माइक्रोस्कोपी जांच की जा रही है। इसमें करीब 58 रूटीन जांच होती हैं। एफएनएसी की सुविधा भी शुरू की गई है। यह एक आसान प्रक्रिया है। इसकी 48-72 घंटे में रिपोर्ट दी जाती है। करीब 20 मरीजों की जांच की जा चुकी है। संदिग्ध लगने पर कुछ मरीजों की बायोप्सी भी कराई गई है जिसमें कैंसर रोग उजागर हुआ। समय रहते इलाज भी शुरू किया गया है।
-डॉ. संदीप दीक्षित, सीएमएस, काशीपुर