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हम अन्नदाता हैं, दुश्मन नहीं: कलक्ट्रेट कूच पर रोक के खिलाफ भड़के किसान, ढाई घंटे पुलिस के हाथ-पांव फूले

Fri, 21 Aug 2026 11:58 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: Heera Updated Fri, 21 Aug 2026 11:58 PM IST
सार

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तीन दिवसीय धरने के एलान पर प्रशासन ने कलक्ट्रेट के सभी रास्ते बैरिकेड से सील कर दिए। सुरक्षा घेरा देख किसान आक्रोशित हो गए और बोले कि अन्नदाता को दुश्मन नहीं समझा जाना चाहिए।

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Farmers raged against the ban on the Collectorate march in rudrapur
कलेक्ट्रट परिसर के मुख्य गेट पर लंगर करते किसान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का तीन दिवसीय धरने का एलान होते ही पूरा सिस्टम हरकत में आ गया। कलक्ट्रेट परिसर को जोड़ने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड लगाकर सील कर दिया गया। जब किसान पहुंचे तो मजबूत सुरक्षा घेरा देखते ही उनका पारा चढ़ गया। वे बोले- हम अन्नदाता हैं और आप हमें दुश्मन समझ रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी तो चुनाव में सरकार को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

शुक्रवार दोपहर 12 बजे किसानों का एक दल कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचा। इसके बाद आधे-आधे घंटे के अंतराल में किसानों के दो और दल पहुंचे। शुरुआत में किसानों ने बैरिकेड को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन पुलिस के मोर्चे पर डटे रहने से वे नाकाम रहे। इसके बाद किसान हाईवे पर ही धरने पर बैठ गए और जनसभा शुरू कर दी। किसानों का कहना था कि वे अन्नदाता हैं और अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए धरना देने आए थे मगर उन्हें ऐसा रोका गया जैसे देश के दुश्मनों को रोका जाता है। आज तक उन्होंने इस तरह का माहौल कभी नहीं देखा।

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इस दौरान एसडीएम मनीष बिष्ट, किच्छा एसडीएम गौरव पांडेय, तहसीलदार दिनेश कुटौला, सीओ डीआर वर्मा, बीएस धोनी व काशीपुर सीओ प्रशांत कुमार ने उनकी तीन दौर की वार्ता चली। आखिर में प्रशासन ने किसानों को दूसरे रास्ते से एक जगह पर आने के लिए कहा।

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किसान अड़ गए कि वे उसी रास्ते जाएंगे जहां पर कड़ा सुरक्षा घेरा है। इसलिए सुरक्षा घेरा हटाया जाए। डेढ़ घंटे तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया। किसानों ने इसके बाद बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया। पांच मिनट की धक्का-मुक्की के बाद किसानों ने एक बैरिकेड तोड़ डाला। मगर अंदर रास्ते पर खड़ी जेसीबी मशीन व लोहे के गेट से आगे नहीं बढ़ सके।

इस दौरान भाकियू (टिकैत) के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता, विक्रम सिंह, विक्रमजीत सिंह, पलविंदर सिंह मनेरा, विक्रम सिंह रंधावा, जितेंद्र सिंह जित्तू, हरप्रीत सिंह निज्जा, जगतार सिंह बाजवा, हरविंदर सिंह आदि मौजूद रहे।

जेसीबी मशीन की छत पर चढ़े किसान
जहां पर किसानों ने पहला बैरियर तोड़ा वहां पर दूसरी लेयर में जेसीबी मशीन खड़ी थी और तीसरे लेयर पर लोहे का गेट। लोहे के गेट तक पहुंचे किसान जब आगे नहीं बढ़े तो कुछ किसान जेसीबी मशीन की छत और सीट पर चढ़कर बैठ गए।

पुलिस के साथ मोर्चे पर डटी रही पीएसी
किसानों को कलक्ट्रेट परिसर में घुसने से रोकने में पुलिस-प्रशासन का प्रयास सफल रहा। पुलिस के साथ पीएसी मोर्चे पर डटी रही। किसानों को रोकने के लिए पूरे जिले से पुलिस फोर्स बुलाई गई थी। पांच सीओ भी मौजूद रहे। खुद एसपी सिटी डॉ. उत्तम सिंह नेगी भी कलक्ट्रेट के गेट तक पहुंचे।

दुकानदारों का खाना हुआ बर्बाद
कलक्ट्रेट परिसर में अधिकतर सरकारी दफ्तर हैं। इसलिए यहां करीब 50 से अधिक दुकानें रोज लगती हैं। कलक्ट्रेट परिसर के रास्ते बंद होने से कई दुकानदार खाना नहीं बेच सके। दोपहर तक इंतजार करने के बाद वे खाना लेकर लौट गए। उनका कहना था कि प्रशासन व पुलिस की ओर से पहले सूचना दी जाती तो दुकान लगाने नहीं आते।

मरीज से लेकर फरियादी तक हुए परेशान
कलक्ट्रेट के सभी रास्ते बंद होने के कारण मरीजों से लेकर फरियादियों तक को परेशानी हुई। ईएसआईसी अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों को लंबा सफर तय कर जाना पड़ा। सरकारी कार्यालय तक कई लोग नहीं पहुंच सके। रास्ते बंद होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

सभी पानी पी लें... फिर एक धक्का और लगाना है
पहला बैरियर तोड़ते ही किसानों ने एलान कर दिया कि सभी भाई पानी पी लें फिर एक धक्का और लगाना है। इतना सुनते ही प्रशासन अलर्ट हो गया। कलक्ट्रेट को जाने वाला लोहे का गेट टूटने के डर से एक और बुलडोजर मंगाना पड़ा जिसे गेट पर लाकर खड़ा किया गया।

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