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Udham Singh Nagar News: आरबीआई कानपुर तक पहुंच चुके हैं नकली नोट
Fri, 05 May 2023 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 05 May 2023 11:28 PM IST
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रुद्रपुर/काशीपुर। जिले में नकली नोट छापकर बाजार में खपाने का खेल कई बार पकड़ा सामने आया है। पुलिस की सख्ती के चलते पश्चिम बंगाल, यूपी से लाई जाने वाली नकली नोटों की खेप पर अंकुश तो लगा मगर लोगों को नया तरीका आजमाते हुए स्टांप पेपर पर घर में नकली नोट छापने शुरू कर दिए। एक बार तो काशीपुर की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से नकली नोट आरबीआई कानपुर पहुंच गए थे। आरबीआई में नकली नोटों का मामला पकड़ में आया था। बैंक अधिकारी भी नोटों को परखने में धोखा खा गए थे।
तकनीक के बदलते दौर में अपराधी भी अपराध में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। तराई में डेढ़ दशक पहले तक नकली नोटों के मामलों में पकड़े गए लोग बाहरी प्रदेशों से नकली नोट लेकर जिले में खपाने के लिए लेकर आते थे। अगस्त 2015 में रुद्रपुर में शराब की दुकान में नकली नोट चलाते तीन युवक पकड़े गए थे और उनके पास डेढ़ लाख के नोट मिले थे। आरोपियों ने पश्चिमी बंगाल की एक महिला से नोट मिलने की बात स्वीकारी थी।
2005 में भी पश्चिमी बंगाल के युवक के साथ तीन आरोपी नकली नोटों के साथ पकड़े गए थे। ये नोट भी बंगाल से लाए गए थे। लेकिन बीते कुछ सालों में लोगों ने तकनीकी का खुद ही इस्तेमाल कर स्टांप पेपर पर नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया।
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वर्ष 2016 में ट्रांजिट कैंप में पुलिस ने मकान में नकली नोट छापने वाले दो लोगों को पकड़ा था, वहीं 2017 में जसपुर में कमरे में नकली नोट छापने वाले दो युवक पकड़े गए थे। साल 2020 में टनकपुर में चार लाख के नकली नोटों के साथ पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपी जनसुविधा केंद्र की आड़ में नकली नोट छापने का काम करते थे। साल 2021 में भी टनकपुर में पुलिस ने सितारगंज निवासी युवक को एक लाख रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था और वह इन नोटों को बाजार में खपाने के लिए पहुंचा था। लेकिन बड़ी बात है कि पढ़े लिखे युवा लालच के चक्कर में अपराधी बन रहे हैं।
वर्ष 2017 में एसबीआई की ओर से आरबीआई को भेजी गई करेंसी में छह हजार रुपये के नकली नोट पाए गए थे और आरबीआई कानपुर के अधिकारी की तहरीर पर तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके अलावा अप्रैल 2021 में भी रुद्रपुर के एक बैंक से नकली नोट आरबीआई पहुंचे थे और अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
-- तराई के बैंकों में भी मिल चुके हैं नकली नोट
रुद्रपुर। तराई में नकली नोट छापने वालों के कब्जे से ही नहीं बल्कि बैंकों से भी नकली नोट मिल चुके हैं। यहां तक जिले के बैंकों से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी नकली नोट भेजे जा चुके हैं। वर्ष 2018 में आरबीआई के पत्र के आधार पर जिला पुलिस ने नकली नोटों के मामले में 18 केस दर्ज किए थे। वर्ष 2016 में काशीपुर की बैंक में 12,500, झनकइया में 5,000, खटीमा में 1400, पुलभट्टा में 60,000, पंतनगर के एक बैंक में 1900 की राशि के नकली नोट मिले थे। वर्ष 2017 में जसपुर में 50,800, काशीपुर में 24,000, बाजपुर में पांच हजार, जसपुर की बैंक में 20,000 के नकली नोट मिलने की पुष्टि हुई थी।
नकली नोट के मामले में दो दोषियों को हो चुकी सजा
रुद्रपुर। तराई में नकली नोटों के खपाने की कोशिश में आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई है। हाल में ही कोर्ट ने दो अभियुक्तों पर नकली नोट छापने का आरोप सिद्ध होने पर 10-10 साल की सजा सुनाई है। यह मामला अक्तूबर 2017 का है, जब जसपुर पुलिस ने ग्राम रहमापुर स्थित एक मकान में दबिश देकर नकली नोट छापने के आरोप में काशीपुर निवासी मोईन और मोहल्ला नई बस्ती जसपुर निवासी शहजाद को गिरफ्तार किया था। आरोपी स्टांप पेपर पर लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से नकली नोट छापते थे।
नकली नोटों को लेकर जिले में सूचना तंत्र सक्रिय है। इस तरह की किसी भी सूचना पर गंभीरता से काम किया जाता है। काशीपुर में पकड़े गए नोट बेहद निम्न गुणवत्ता के थे और उनमें कोई सुरक्षा फीचर नहीं था। - मंजूनाथ टीसी, एसएसपी।
केस- एक
मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला निवासी दो युवकों से पुलिस ने 100, 200 व 500 के जाली नोट सहित पकड़ा था। इनके पास से कुल 41 हजार 200 रुपये बरामद हुए थे। उनकी कार को सीज कर दिया गया था। आरोपियों ने 30 में 100 रुपये के नकली नोट खरीदे थे और बाजार में उन्हें चला रहे थे।
केस- दो
सितंबर 2018 को पुलिस ने जसपुर में दो हजार रुपये के 47 नकली नोटों के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों से आईबी, एलआईयू और स्पेशल ब्रांच आदि खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने भी पूछताछ की थी।
केस-- -- तीन
जून 2011 को ठाकुरद्वारा मोड़ पर स्थित एक चाय की दुकान पर जसपुर कोतवाली पुलिस ने छापा मारकर वाजिद अली निवासी ग्राम तुमरिया कलां, थाना डिलारी मुरादाबाद से एक हजार और पांच सौ के 19-19 नकली नोट के अलावा नवाब अली निवासी महुवाडाबरा से पांच सौ के 20 नकली नोट और मोहम्मद रफी व गफ्फार हुसैन निवासीगण इंद्रा कॉलोनी हल्द्वानी को एक हजार के 10-10 नकली नोट बरामद कर जेल भेजा था।
देश की अर्थव्यवस्था के लिए दीमक हैं नकली नोट
काशीपुर। नकली नोट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में दीमक का काम करते हैं। नकली नोटों का यह धंधा बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल सकता है। जिला पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट पकड़कर एक बड़ी साजिश को विफल किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार व आरबीआई की अनुमति के बिना भारतीय करेंसी नोटों की छपाई करना अपराध है और इसके खिलाफ सख्त प्रावधान भी हैं। फर्जी नोट किसी भी मजबूत देख की अर्थव्यवस्था को धराशाई करने की ताकत रखते हैं। इसका इस्तेमाल अक्सर दुश्मन देशों की ओर से किया जाता है इसलिए इसे वित्तीय आतंकवाद की श्रेणी में रखा जाता है। नकली नोटों की छपाई सबसे ज्यादा पाकिस्तान में की जाती है। यह प्रकरण भले ही ऐसा न हो, लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत-पाकिस्तान सीमा से या अन्य पड़ोसी देशों के रास्ते भारत में नकली नोट पहुंचते हैं।
ऐसे बिगड़ती है अर्थव्यवस्था--
आरबीआई पैसे का संतुलन बनाए रखने के लिए एक तय सीमा में ही नोटों की छपाई करता है। सीमा से अधिक नोट बाजार में उतर जाने से लोगों के हाथ में पैसा ज्यादा आ जाता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं की अप्रत्याशित तरीके से मांग बढ़ती है। इसका फिर उल्टा असर शुरू होता है। मांग अचानक बढ़ने और आपूर्ति पहले जितनी ही रहने से बाजार में सामान की कमी होने लगती है और जो थोड़ा-बहुत सामान मौजूद है उसकी कीमत आसमान छूने लगती है। यहां फिर पैसे की वैल्यू तेजी से गिरने लगती है और अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाती है। इससे आतंकी संगठनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।
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तकनीक के बदलते दौर में अपराधी भी अपराध में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। तराई में डेढ़ दशक पहले तक नकली नोटों के मामलों में पकड़े गए लोग बाहरी प्रदेशों से नकली नोट लेकर जिले में खपाने के लिए लेकर आते थे। अगस्त 2015 में रुद्रपुर में शराब की दुकान में नकली नोट चलाते तीन युवक पकड़े गए थे और उनके पास डेढ़ लाख के नोट मिले थे। आरोपियों ने पश्चिमी बंगाल की एक महिला से नोट मिलने की बात स्वीकारी थी।
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2005 में भी पश्चिमी बंगाल के युवक के साथ तीन आरोपी नकली नोटों के साथ पकड़े गए थे। ये नोट भी बंगाल से लाए गए थे। लेकिन बीते कुछ सालों में लोगों ने तकनीकी का खुद ही इस्तेमाल कर स्टांप पेपर पर नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया।
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वर्ष 2016 में ट्रांजिट कैंप में पुलिस ने मकान में नकली नोट छापने वाले दो लोगों को पकड़ा था, वहीं 2017 में जसपुर में कमरे में नकली नोट छापने वाले दो युवक पकड़े गए थे। साल 2020 में टनकपुर में चार लाख के नकली नोटों के साथ पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपी जनसुविधा केंद्र की आड़ में नकली नोट छापने का काम करते थे। साल 2021 में भी टनकपुर में पुलिस ने सितारगंज निवासी युवक को एक लाख रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था और वह इन नोटों को बाजार में खपाने के लिए पहुंचा था। लेकिन बड़ी बात है कि पढ़े लिखे युवा लालच के चक्कर में अपराधी बन रहे हैं।
वर्ष 2017 में एसबीआई की ओर से आरबीआई को भेजी गई करेंसी में छह हजार रुपये के नकली नोट पाए गए थे और आरबीआई कानपुर के अधिकारी की तहरीर पर तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके अलावा अप्रैल 2021 में भी रुद्रपुर के एक बैंक से नकली नोट आरबीआई पहुंचे थे और अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
रुद्रपुर। तराई में नकली नोट छापने वालों के कब्जे से ही नहीं बल्कि बैंकों से भी नकली नोट मिल चुके हैं। यहां तक जिले के बैंकों से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी नकली नोट भेजे जा चुके हैं। वर्ष 2018 में आरबीआई के पत्र के आधार पर जिला पुलिस ने नकली नोटों के मामले में 18 केस दर्ज किए थे। वर्ष 2016 में काशीपुर की बैंक में 12,500, झनकइया में 5,000, खटीमा में 1400, पुलभट्टा में 60,000, पंतनगर के एक बैंक में 1900 की राशि के नकली नोट मिले थे। वर्ष 2017 में जसपुर में 50,800, काशीपुर में 24,000, बाजपुर में पांच हजार, जसपुर की बैंक में 20,000 के नकली नोट मिलने की पुष्टि हुई थी।
नकली नोट के मामले में दो दोषियों को हो चुकी सजा
रुद्रपुर। तराई में नकली नोटों के खपाने की कोशिश में आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई है। हाल में ही कोर्ट ने दो अभियुक्तों पर नकली नोट छापने का आरोप सिद्ध होने पर 10-10 साल की सजा सुनाई है। यह मामला अक्तूबर 2017 का है, जब जसपुर पुलिस ने ग्राम रहमापुर स्थित एक मकान में दबिश देकर नकली नोट छापने के आरोप में काशीपुर निवासी मोईन और मोहल्ला नई बस्ती जसपुर निवासी शहजाद को गिरफ्तार किया था। आरोपी स्टांप पेपर पर लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से नकली नोट छापते थे।
नकली नोटों को लेकर जिले में सूचना तंत्र सक्रिय है। इस तरह की किसी भी सूचना पर गंभीरता से काम किया जाता है। काशीपुर में पकड़े गए नोट बेहद निम्न गुणवत्ता के थे और उनमें कोई सुरक्षा फीचर नहीं था। - मंजूनाथ टीसी, एसएसपी।
केस- एक
मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला निवासी दो युवकों से पुलिस ने 100, 200 व 500 के जाली नोट सहित पकड़ा था। इनके पास से कुल 41 हजार 200 रुपये बरामद हुए थे। उनकी कार को सीज कर दिया गया था। आरोपियों ने 30 में 100 रुपये के नकली नोट खरीदे थे और बाजार में उन्हें चला रहे थे।
केस- दो
सितंबर 2018 को पुलिस ने जसपुर में दो हजार रुपये के 47 नकली नोटों के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों से आईबी, एलआईयू और स्पेशल ब्रांच आदि खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने भी पूछताछ की थी।
केस
जून 2011 को ठाकुरद्वारा मोड़ पर स्थित एक चाय की दुकान पर जसपुर कोतवाली पुलिस ने छापा मारकर वाजिद अली निवासी ग्राम तुमरिया कलां, थाना डिलारी मुरादाबाद से एक हजार और पांच सौ के 19-19 नकली नोट के अलावा नवाब अली निवासी महुवाडाबरा से पांच सौ के 20 नकली नोट और मोहम्मद रफी व गफ्फार हुसैन निवासीगण इंद्रा कॉलोनी हल्द्वानी को एक हजार के 10-10 नकली नोट बरामद कर जेल भेजा था।
देश की अर्थव्यवस्था के लिए दीमक हैं नकली नोट
काशीपुर। नकली नोट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में दीमक का काम करते हैं। नकली नोटों का यह धंधा बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल सकता है। जिला पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट पकड़कर एक बड़ी साजिश को विफल किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार व आरबीआई की अनुमति के बिना भारतीय करेंसी नोटों की छपाई करना अपराध है और इसके खिलाफ सख्त प्रावधान भी हैं। फर्जी नोट किसी भी मजबूत देख की अर्थव्यवस्था को धराशाई करने की ताकत रखते हैं। इसका इस्तेमाल अक्सर दुश्मन देशों की ओर से किया जाता है इसलिए इसे वित्तीय आतंकवाद की श्रेणी में रखा जाता है। नकली नोटों की छपाई सबसे ज्यादा पाकिस्तान में की जाती है। यह प्रकरण भले ही ऐसा न हो, लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत-पाकिस्तान सीमा से या अन्य पड़ोसी देशों के रास्ते भारत में नकली नोट पहुंचते हैं।
ऐसे बिगड़ती है अर्थव्यवस्था
आरबीआई पैसे का संतुलन बनाए रखने के लिए एक तय सीमा में ही नोटों की छपाई करता है। सीमा से अधिक नोट बाजार में उतर जाने से लोगों के हाथ में पैसा ज्यादा आ जाता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं की अप्रत्याशित तरीके से मांग बढ़ती है। इसका फिर उल्टा असर शुरू होता है। मांग अचानक बढ़ने और आपूर्ति पहले जितनी ही रहने से बाजार में सामान की कमी होने लगती है और जो थोड़ा-बहुत सामान मौजूद है उसकी कीमत आसमान छूने लगती है। यहां फिर पैसे की वैल्यू तेजी से गिरने लगती है और अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाती है। इससे आतंकी संगठनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।