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काशीपुर के शौचालय में बंद नहीं होते दरवाजे
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर।
Updated Sat, 25 Mar 2017 01:01 AM IST
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काशीपुर के शौचालय में बंद नहीं होते दरवाजे
- फोटो : अमर उजाला
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काशीपुर। उत्तराखंड परिवहन निगम यात्रियों से किराया तो पूरा वसूलता है, लेकिन सुविधा के नाम पर शायद ही कुछ मिले। गंदे शौचालयों में जाने से यात्री कतराते हैं। रोडवेज डिपो में गंदगी का अंबार लगा है। परिसर और कार्यशाला के चारों ओर से घास उग गई हैं। डिपो में बने शौचालयों के दरवाजे टूटे हैं। अधिकारियों की लापरवाही के चलते डिपो और कार्यशाला में गंदगी फैली है।
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बताया जाता है कि हर साल डिपो की छुटपुट मरम्मत के लिए धनराशि आती है, लेकिन साल भर से अधिक होने के बाद भी डिपो में एक भी कार्य नहीं कराया गया है। यात्री सुविधा के नाम यात्रियों से तो पूरा किराया लिया जाता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता।
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बता दें कि रोडवेज डिपो से 42 बसों का संचालन होता है। प्रतिदिन करीब दो हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं नहीं मिलती। बस के इंतजार करने के लिए प्रतीक्षालय में सफाई नहीं है। लाइटें टूटी हैं। तीन सरकारी हैंडपंप लंबे समय से खराब हैं।
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इसको ठीक कराने के लिए विभागीय अधिकारी सचेत नहीं हैं। डिपो और कार्यशाला के चारों ओर लंबी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे जहरीले कीड़ों का डर बना रहता है। कार्यशाला में काम करने वाले कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डिपो में शौचालय तो बने हैं पर लंबे समय से शौचालय में पानी की टंकी और पानी की व्यवस्था भी नहीं है।
शौचालयों के दरवाजे टूटे है कुछ दरवाजो को कपड़े से बांधकर काम चलाना पड़ रहा है। इससे कर्मचारी, यात्री शौचालयों के बाहर या डिपो के किनारे खड़ी झांडियों में ही लघु शंका के लिए जाने को मजबूर हैं। साथ ही डिपो के किनारे से निकलने वाली नाली में लंबे समय गंदगी जमा है।
काशीपुर। डिपो में तीन सरकारी हैंडपंप लगे हैं, लेकिन वह काफी दिनों से खराब पड़े हैं। इसे ठीक कराने के लिए कभी कोई प्रयास नहीं किया गया। डिपो में लगी पानी की टंकी ही कर्मचारी और यात्रियों की प्यास बुझा रही है। इसके अलावा पानी की समस्या को देखते दो साल पहले नगर की एक संस्था ने डिपो में वाटर कूलर लगवाया था। इसकी भी लंबे समय से सफाई नहीं करवाई गई।
काशीपुर। डिपो परिसर का फर्श भी टूट गया है। बसों के चलने से भारी धूल उड़ती है। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह गड्ढ़े हो जाने से बारिश में पानी भर जाता है। इसे ठीक कराने के लिए कई बार यूनियनें भी कह चुकी हैं। बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी है।