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बाघ को पकड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन
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खटीमा तहसील में प्रदर्शन करते बगुलिया, झाउपरसा के ग्रामीण। संवाद
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा। दो ग्रामीणों को अपना निवाला बना चुके बाघ को पकड़ने की मांग को लेकर ग्राम बगुलिया के ग्रामीणों ने तहसील पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि दो लोगों की जान जा चुकी है लेकिन अभी तक बाघ नहीं पकड़ा जा सका। एक महीने से झाऊपरसा व बगुलिया गांव के लोग खौफ में जीवन बिता रहे हैं।
सोमवार को तहसील पर प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा कि बगुलिया, झाउपरसा में पिछले एक माह से बाघ का आतंक है। बाघ ने दो ग्रामीणों को अपना निवाला बना लिया है। 13 मई को पहली व 25 मई को दूसरी घटना सुरई कंपार्ट 29 व 36 में हुई थी। इसके बाद से ही बाघ वहीं घूम रहा है। बाघ के आतंक से ग्रामीणों का अब वहां से निकलना दूभर हो गया है। कई बार वन विभाग को अवगत करा दिया गया है, लेकिन बाघ को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका।
ग्रामीणों ने कहा कि बाघ के आतंक से खौफ की जिंदगी जी रहे हैं। ग्रामीण मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे। इससे उनके परिवार के सामने भुखमरी की समस्या आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से बाघ को पकड़ने की ठोस योजना नहीं बनाई जा रही है। 11 जून को बाघ रात भर झाउपरसा निवासी रामायन के घर के पास रहा। जिसकी सूचना वन विभाग को दी गई और वन विभाग की टीम आने से पहले बाघ भाग चुका था।
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वन विभाग ने बाघ के पंजों के निशान तथा उसके बालों की पुष्टि की। ग्रामीणों ने तत्काल बाघ पकड़ने की मांग की। चेतावनी दी कि अगर वन विभाग ने समय रहते बाघ को नहीं पकड़ा तो पूरा गांव धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। वहां राम पांडे, घनश्याम मौर्य, विजय कुमार, कांता प्रसाद, रीना देवी, सावित्री देवी, नर्मदा, सरिता, दीनानाथ, राज कुमार, प्रदीप, सुदर्शन, शम्भूनाथ, महेश कुमार ,धर्मेंद्र, नर सिंह, केशव सिंह,राजू, अजय आदि थे।
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सोमवार को तहसील पर प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा कि बगुलिया, झाउपरसा में पिछले एक माह से बाघ का आतंक है। बाघ ने दो ग्रामीणों को अपना निवाला बना लिया है। 13 मई को पहली व 25 मई को दूसरी घटना सुरई कंपार्ट 29 व 36 में हुई थी। इसके बाद से ही बाघ वहीं घूम रहा है। बाघ के आतंक से ग्रामीणों का अब वहां से निकलना दूभर हो गया है। कई बार वन विभाग को अवगत करा दिया गया है, लेकिन बाघ को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका।
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ग्रामीणों ने कहा कि बाघ के आतंक से खौफ की जिंदगी जी रहे हैं। ग्रामीण मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे। इससे उनके परिवार के सामने भुखमरी की समस्या आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से बाघ को पकड़ने की ठोस योजना नहीं बनाई जा रही है। 11 जून को बाघ रात भर झाउपरसा निवासी रामायन के घर के पास रहा। जिसकी सूचना वन विभाग को दी गई और वन विभाग की टीम आने से पहले बाघ भाग चुका था।
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वन विभाग ने बाघ के पंजों के निशान तथा उसके बालों की पुष्टि की। ग्रामीणों ने तत्काल बाघ पकड़ने की मांग की। चेतावनी दी कि अगर वन विभाग ने समय रहते बाघ को नहीं पकड़ा तो पूरा गांव धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। वहां राम पांडे, घनश्याम मौर्य, विजय कुमार, कांता प्रसाद, रीना देवी, सावित्री देवी, नर्मदा, सरिता, दीनानाथ, राज कुमार, प्रदीप, सुदर्शन, शम्भूनाथ, महेश कुमार ,धर्मेंद्र, नर सिंह, केशव सिंह,राजू, अजय आदि थे।