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चांद के दीदार के साथ माहे रमजान शुरू

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Apr 2021 01:22 AM IST
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cultural programmme in district.
सितारगंज में खजला, फेनी के स्टॉल पर खरीदारी करते लोग। - फोटो : SITARGANJ
सितारगंज। चांद के दीदार के साथ माहे रमजान का आगाज हो गया। इसी के साथ मस्जिदों में शुरू हो गया तरावीह का सिलसिला। लोगों ने एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी और तड़के सहरी खाकर पहला रोजा रखा।
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मंगलवार को सुबह से ही लोग सहरी और इफ्तार की तैयारियों में जुटे थे। खजूर, खजला, फैनी और सिवई की भी खूब बिक्री हुई। शाम को चांद का दीदार होते ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। जामा मस्जिद के खतीब मौलाना मोहम्मद कासिम मिस्बाही ने नमाजियों को चांद की मुबारकबाद दी।
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उन्होंने बताया कि माह-ए-रमजान के तीन अशरे होते हैं, पहले दस दिन रहमतों और बरकतों के होते हैं। इसमें रात-दिन रहमतें और बरकतें बरसतीं हैं। 11-20 दिनों तक दूसरा अशरा मगफिरत का होता है। इसमें रोजेदार सच्चे दिल से तौबा करे (माफी मांगे) तो उसके सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। तीसरा अशरा दोजख की आग से छुटकारे का होता है।
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इफ्तार के वक्त मांगी दुआ होती कबूल
सितारगंज। रोजा इफ्तार के वक्त मांगी गई दुआ अल्लाह की बारगाह में फौरन कुबूल होती है। इस महीने में जो शख्स किसी रोजेदार को दूध या खजूर या पानी से इफ्तार कराता है तो परवरदिगार उसे रोजेदार के बराबर सवाब अता फरमाता है और रोजेदार के सवाब में कोई कमी नहीं आती है।
सहरी खाने से होती है बरकत
सितारगंज। सहरी खाने से बरकत होती है। सहरी रोजेदार ही नहीं, बल्कि नाबालिग बच्चे भी खाएं, क्योंकि सहरी में अल्लाह की जानिब से खास बरकत रखी गई है। अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि सुबह सादिक शुरु होने से पहले सहरी खाएं और सूरज डूबने के बाद रोजा इफ्तार करें। इफ्तार में जल्द ही और सहरी में देर करना सुन्नत है।

रमजान शुरु होते ही सज गए खजला फेनी के स्टॉल
सितारगंज। रमजान शुरु होते ही होटलों पर खजला और फेनी के स्टॉल सज गए हैं। पहली सहरी के लिए लोग स्टॉलों पर खजला और फेनी खरीदने के लिए उमड़ पड़े। नगर के जामा मसजिद चौराहे पर दुकानें लगाई गई हैं। इसके अलावा रम्पुरा, बाईपास कालोनी आदि जगहों पर भी दुकानें लगी हैं। जहां खजला, फेनी, ब्रेड, डबल रोटी आदि बेचने के लिए रखी गई हैं। वहीं, बाजार में खजूर की बिक्री भी बढ़ गई है। (संवाद)
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