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गमों को दौर में जी भर के मुस्कुराना है
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खटीमा में शरद महोत्सव में अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते कवि।
- फोटो : KHATIMA
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व्याख्या जनजागृति संस्कृतिक संगीत एवं नाट्य समिति के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय शरद महोत्सव मेले के दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ कांग्रेस प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी, लक्ष्मीकांत लोहनी, शंकर सिंह खड़का, अशोक खड़का, राजेंद्र अधिकारी ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों के बच्चों एवं स्थानीय कलाकारों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बाधा।
तराई बीज विकास निगम के मैदान में आयोजित कार्यक्रम का दूसरा दिन गंगा जमुनी की तर्ज पर कवियों का रहा। रातरतन यादव ने ‘गमो के दौर में जी भर के मुस्कराना है’, त्रिलोक जोशी ने ‘है नशा बेकार सुनो रे सुनो भैया’, आकाश प्रभाकर ने ‘कश्मीर घाटी का केसन बनना पड़ता है’, राज सक्सेना ने ‘लिखी जिसने मुकद्दर की इबारत हाथ से अपने’, डॉ.जगदीश पंत ने ‘जहर का प्याला ही हर दौर में मिलता है’, राधा तिवारी राधे गोपाल ने ‘आज फिर महके फिजाएं, आज सब गुलजार होगा’, सुचिता अजय श्रीवास्तव ने ‘भारत मां के वीरों को नमन सौ बार’, विपिन जोशी ने ‘दो दिल मिल गए तो दिल’, बसंती सामंत ने ‘क्या सुनाएं क्या सुनाएं क्या दिखाएं बेबसी अपनी’ की प्रस्तुति दी। कवि सम्मेलन का संचालन ओंकार सिंह ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कार्यकारी अध्यक्ष कापड़ी ने शरद महोत्सव मेले को उत्तराखंड की धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से संस्कृति नई पीढ़ी को विरासत में मिल सकती है। कार्यक्रम में एजीएम इंटर कॉलेज, हेल्पलाइन, आरएलके, आदर्श भारती इंका, देवभूमि उत्थान समिति, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सोर वैली, सिटी कॉन्वेंट, सरस्वती अकेडमी, अलक्ष्या, आश्रम पद्घति विद्यालय के बच्चों ने लोक गीत, नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख रंजीत सिंह नामधारी, कुलतार सिंह, रमेश रौतेला, राकेश ठकुराठी, गौरव अग्रवाल, पंकज टम्टा, योगेंद्र पुनेरा, मनोज देउपा, कोमल राणा, शालिनी राणा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन कुंदन सिंह मनोला ने किया।
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तराई बीज विकास निगम के मैदान में आयोजित कार्यक्रम का दूसरा दिन गंगा जमुनी की तर्ज पर कवियों का रहा। रातरतन यादव ने ‘गमो के दौर में जी भर के मुस्कराना है’, त्रिलोक जोशी ने ‘है नशा बेकार सुनो रे सुनो भैया’, आकाश प्रभाकर ने ‘कश्मीर घाटी का केसन बनना पड़ता है’, राज सक्सेना ने ‘लिखी जिसने मुकद्दर की इबारत हाथ से अपने’, डॉ.जगदीश पंत ने ‘जहर का प्याला ही हर दौर में मिलता है’, राधा तिवारी राधे गोपाल ने ‘आज फिर महके फिजाएं, आज सब गुलजार होगा’, सुचिता अजय श्रीवास्तव ने ‘भारत मां के वीरों को नमन सौ बार’, विपिन जोशी ने ‘दो दिल मिल गए तो दिल’, बसंती सामंत ने ‘क्या सुनाएं क्या सुनाएं क्या दिखाएं बेबसी अपनी’ की प्रस्तुति दी। कवि सम्मेलन का संचालन ओंकार सिंह ने किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कार्यकारी अध्यक्ष कापड़ी ने शरद महोत्सव मेले को उत्तराखंड की धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से संस्कृति नई पीढ़ी को विरासत में मिल सकती है। कार्यक्रम में एजीएम इंटर कॉलेज, हेल्पलाइन, आरएलके, आदर्श भारती इंका, देवभूमि उत्थान समिति, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सोर वैली, सिटी कॉन्वेंट, सरस्वती अकेडमी, अलक्ष्या, आश्रम पद्घति विद्यालय के बच्चों ने लोक गीत, नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख रंजीत सिंह नामधारी, कुलतार सिंह, रमेश रौतेला, राकेश ठकुराठी, गौरव अग्रवाल, पंकज टम्टा, योगेंद्र पुनेरा, मनोज देउपा, कोमल राणा, शालिनी राणा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन कुंदन सिंह मनोला ने किया।

खटीमा में शरद महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते स्कूली बच्चे।- फोटो : KHATIMA
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