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काशीपुर में उगाया ठंडे इलाकों वाला अखरोट
कुंदन शाह/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Mon, 20 Mar 2017 12:03 AM IST
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मिशन अखरोट के जरिए काशीपुर के गर्म वातावरण में भी ऊंचाई में उगने वाले अखरोट की पौध उगाने में सफलता मिली है।
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सरकार ने वर्ष-2016 में मिशन अखरोट योजना शुरू की थी। उद्यान विभाग ने इस योजना के तहत कड़े छिलके वाले 18000 पौधों पर कागजी अखरोट की कलम लगाकर पौध तैयार की। ये पौध उद्यान विभाग द्वारा किसानों में वितरित की गईं। राजकीय उद्यान चौबटिया (अल्मोड़ा) 4500, राजकीय उद्यान मगरा (टिहरी) 1500, राजकीय उद्यान कर्मी (बागेश्वर) 3000, राजकीय उद्यान भीमताल (नैनीताल) 1000, भरसार कृषि विश्व विद्यालय (पौड़ी) 3500, राजकीय उद्यान काशीपुर (ऊधमसिंह नगर) 2000 मदर प्लांटों पर कागजी अखरोट की कलम लगाई है।
काशीपुर में तैयार मदर प्लांट में किन्नौर (हिमाचल प्रदेश) से लाई गई कागजी अखरोट की कलम लगाई गई। राजकीय उद्यान चौबटिया प्रभारी डॉ. सीएस वर्मा ने बताया कि उद्यान में तैयार मदर प्लांट में कागजी अखरोट की कलम लगाई गई है।
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क्या है परेशानी....
उत्तराखंड में अखरोट के पेड़ बड़ी संख्या में हैं, लेकिन अधिकांश पेड़ों पर फल कम आते है। जो अखरोट लगते हैं, उनका बाहरी छिलका कड़ा और उनमें गूदा कम होने से इसकी कीमत बहुत कम मिलती है। इस वजह से किसानों को अखरोट के पेड़ लगाने में दिलचस्पी नहीं रहती।
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अखरोट उत्पादन के लिए उपयुक्त है प्रदेश का वातावरण
मिशन अखरोट प्रभारी एवं उद्यान विभाग के उप निदेशक डॉ. बृजेश गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड का वातावरण अखरोट उत्पादन के लिए उपयुक्त है। कागजी अखरोट के पेड़ पर फसल काफी अधिक आती है। गूदा काफी अधिक और उसका आवरण पतला होता है। इस वर्ष फिर मिशन अखरोट के लिए डॉ. गुप्ता के नेतृत्व ग्राफ्टिक टीम को प्रशिक्षण दिया गया। टीम ने राजकीय उद्यान पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, चकराता, भरसार कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न केंद्रों में तैयार किए गए मदर प्लांट में कागजी अखरोट की कलमें कुशलतापूर्वक लगाई।