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बोला ‘14 फुट का एंगल’ मिल गई स्मैक
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:23 AM IST
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आम के बाग में किशोर को सौ रुपये का नोट देकर स्मैक की पुड़िया खरीदता युवक।
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी की सीमा से लगे किच्छा के दरऊ क्षेत्र में स्मैक का कारोबार खुलेआम चल रहा है। यहां 14 और 16 फुट का एंगल मांगते ही स्मैक की छोटी और बड़ी पुड़िया थमा दी जाती हैं। इस पूरे नेटवर्क का संचालन क्षेत्र की एक महिला कर रही है। स्थानीय किशोरों और युवाओं को उसने एजेंट बना रखा है।
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- किच्छा के दरऊ में खुलेआम चल रहा स्मैक का कारोबार
- महिला सरगना ने तराई से लेकर पहाड़ों तक बना रखे हैं ग्राहक
- युवा और किशोर एजेंट बनकर करते हैं स्मैक की सप्लाई
उनके जरिए वह ग्राहकों तक आसानी से स्मैक पहुंचा देती है। सूत्रों के अनुसार, महिला को यूपी और उत्तराखंड पुलिस का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वह धड़ल्ले से अवैध कारोबार कर रही है। यूपी की पुलिस चौकी टांडा छंगा और उत्तराखंड की कुरैया पुलिस चौकी के बीच स्थित आम के बगीचे से नशे का कारोबार संचालित हो रहा है।
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युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने के लिए एसएसपी डा. सदानंद दाते ने स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाकर अभियान शुरू किया है, लेकिन इसके बाद भी नशे के सौदागर चालाकी के साथ कारोबार संचालित कर रहे हैं। जब अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो अवैध कारोबार की परत-दर-परत खुलती चली गईं।
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यूपी और उत्तराखंड पुलिस चौकी की नाक के नीचे खुलेआम स्मैक का कारोबार किया जा रहा है। किच्छा रोड से निकलकर बहेड़ी मार्ग पर पड़ने वाली यूपी की टांडा छंगा चौकी से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित आम के बगीचे में स्मैक बेचने वाले एजेंट लोगों को सफेद पन्नी में खुलेआम स्मैक बेचते नजर आये। यहां 14 फुट का एंगल यानी स्मैक की छोटी पुड़िया की कीमत 100 रुपये और 16 फुट का एंगल यानी बड़ी पुड़िया 200 से 500 रुपये तक उपलब्ध है।
आम का यह बगीचा आधा यूपी में और आधा उत्तराखंड में है। स्मैक का कारोबार महिला अपने पति और एक पार्टनर के साथ मिलकर संचालित करती है। कुछ समय पूर्व उन्होंने किच्छा के बड़िया गांव में स्मैक बेचने का कारोबार शुरू किया था, लेकिन पुलिस की पकड़ में आने के बाद ठिकाना बदल दिया। स्मैक की पूरी खेप बरेली से आती है और रुद्रपुर के साथ ही दरऊ, छिनकी, कुरैया, आजाद नगर, सिरौली, चचैट, बहेड़ी, हल्द्वानी, नैनीताल और पहाड़ों तक भेजी जाती है। स्मैक की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें पाउडर भी बाग वाले घर में
गिलटे लगाकर बंद किया रास्ता
आम के बाग से लगे एक घर में स्मैक का स्टॉक रखा जाता है। उस घर तक पुलिस की गाड़ी ना पहुंच सके इसके लिए लकड़ी के गिलटे गिराकर रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अगर एजेंट बने किशोरों को कोई संदेह होता है तो वे पेड़ों की जड़ों में स्मैक छुपाकर भाग जाते हैं। अगर पुलिस तक मामला पहुंच भी जाये तो महिला सरगना पुलिस को भी मैनेज कर लेती है।
बेरोकटोक माल पहुंचाते हैं किशोर
स्मैक बेचने के लिए महिला ने बड़ा नेटवर्क खड़ा किया हुआ है। महिला दरऊ गांव और आसपास के गांवो के किशोरों को ग्राहक तक स्मैक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल करती है। लोगों के अनुसार 15 से 23 वर्ष के किशोर व युवाओं को महिला ने मोबाइल उपलब्ध करा रखे हैं। हल्द्वानी और नैनीताल से आने वाले पुराने ग्राहक इन किशोरों से संपर्क करते हैं। ये उन तक स्मैक पहुंचा देते हैं। पुलिस भी इनकी तलाशी नहीं लेती है।
एक थाना, दो चौकी, फिर भी चलता है स्मैक का कारोबार
स्मैक के कारोबारियों के हौसले पुलिस प्रशासन की हीलाहवाली से बुलंद हो गए हैं। किच्छा के ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाला स्मैक का कारोबार एक थाना और दो पुलिस चौकियों के करीब परवान चढ़ता है। हल्द्वानी और रुद्रपुर से आने वाले कॉलेज के युवा पहले किच्छा पहुंचते हैं, जहां रेलवे स्टेशन के पास किच्छा थाना है। वहां से दरऊ मार्ग पर पड़ने वाली पुलिस चौकी के पास से गुजरते हैं। आगे यूपी की टांडा छंगा पुलिस चौकी भी पड़ती है। हैरानी की बात यह है कि न तो पुलिस स्मैक बेचने वालों को पकड़ पाती है और न ही खरीदारों को।
पुलिस पर हावी है महिला
क्षेत्र के लोगों के अनुसार, स्मैक का कारोबार संचालित करने वाली महिला पुलिस पर हावी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस को स्मैक के कारोबार की पुख्ता जानकारी है। इसके बावजूद पुलिस कारोबारियों पर शिकंजा क्यों नहीं कस पा रही, यह बढ़ा सवाल है। इसके साथ ही अगर पुलिस के अलावा किसी आम नागरिक को महिला के कारोबार का पता चल जाता है तो वह उसके साथ अश्लीलता कर उसे भगा देती है।
किच्छा रूट के कई टेंपो में मिलते हैं नशेड़ी
दूरदराज क्षेत्र से आने वाले स्मैक के ग्राहक किच्छा तक अपनी कारों, रोडवेज बसों या फिर निजी बसों से आते हैं, लेकिन किच्छा से दरऊ जाने के लिए टैंपो का ही सहारा लेते हैं। इसकी वजह यह है कि पकड़े जाने पर उनकी पहचान उजागर नहीं हो पाए। शाम के समय इस रूट पर चलने वाले कई टेंपों में तो बस नशेड़ी ही सवार रहते हैं। इसके साथ ही बाग से बाहर स्मैक की आपूर्ति करने को आने वाले एजेंट बिना नंबर की बाइक का ही इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पुलिस की नजर इन पर नहीं पड़ती।
यूपी पुलिस चौकी से मात्र 100 मीटर की दूरी पर है महिला का अड्डा
यूपी पुलिस चौकी से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्मैक का कारोबार चलता है। हैरानी की बात यह है पुलिस चौकी के सामने से ही स्मैक खरीदने के लिए ग्राहक गुजरते हैं। वहीं पुलिस चौकी पर खड़े होकर नशे का अड्डा साफ दिखता है। सबसे बड़ी बात नशे के सौदागर अपने ग्राहक को पता चौकी और उससे कुछ दूरी पर बने मंदिर का देते हैं। महिला की पुलिस में पैठ इतनी गहरी है कि स्मैक खरीदने आने वाले ग्राहक चौकी के पास मिलने की बात सुनकर भी नहीं घबराते।