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87 दिन, 77 के बयान, 4508 पन्ने का आरोप पत्र
धन सिंह बिष्ट रुद्रपुर।
Updated Sat, 03 Feb 2018 12:10 AM IST
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नेशनल हाईवे
- फोटो : अमर उजाला
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एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में नौ महीने से जुटी एसआईटी ने शुक्रवार को बड़ी चुनौती पार कर ली। जांच के दौरान एसआईटी के लिए घोटाले में लिप्त लोगों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाने के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी करना भी चुनौतीपूर्ण रहा। आखिर 87 दिन की मेहनत में 77 गवाहों के बयान दर्ज कर 4508 पन्ने का आरोप पत्र एसआईटी ने कोर्ट में दाखिल कर दिया।
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घोटाले की तहसीलवार जांच में जुटी एसआईटी ने काशीपुर, जसपुर और सितारगंज तहसील के घोटाले की जांच में सीबीआई की तर्ज पर बेहद तेजी से काम किया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए एसआईटी के पास 90 दिन का वक्त था। इस दौरान एसआईटी को सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।
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एसएसपी डॉ. सदानंद दाते के निर्देशन में एसआईटी प्रभारी एसपी क्राइम कमलेश उपाध्याय और विवेचक/सीओ स्वतंत्र कुमार ने टीम के साथ कड़ी मशक्कत के बाद 4508 पन्नों का आरोप पत्र तैयार कर समयावधि से पहले ही कोर्ट में दाखिल कर दिया। एसआईटी के इंस्पेक्टर जीबी जोशी, एसआई डीआर टम्टा, एचएन जोशी, पीडी जोशी और कुंदन सिंह अधिकारी ने इसके लिए जहां रोजाना दर्जनों लोगों के बयानों को कागजों पर उतारा, वहीं उन्हें तहसीलों के सैकड़ों दस्तावेज भी खंगालने पड़े।
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एसआईटी ने आरोप पत्र में चार तहसीलों में किए गए 211.84 करोड़ के घोटाले का खुलासा किया। इसमें से काशीपुर, जसपुर, सितारगंज में 173.14 करोड़ और बाजपुर तहसील में 38.7 करोड़ का घोटाला शामिल है। एसआईटी को उम्मीद है कि अभी और करोड़ों के घोटाले का पटाक्षेप हो सकता है। इसके लिए एसआईटी कई अधिकारियों, तहसील कर्मियों और काश्तकारों को अपनी जांच में शामिल करेगी।