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वृद्धा आश्रम में महिला व बेटे को बंधक बनाने का आरोप
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रुद्रपुर। जनजागृति सेवा समिति के जरिये संचालित वृद्धा आश्रम में एक महिला ने खुद और उसके बेटे को बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि आश्रम संचालिका ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
पुलिस के मुताबिक शांति विहार कॉलोनी में एक वृद्धा आश्रम चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आश्रम में एक महिला को खाना बनाने और आश्रम के अन्य कामों के लिए नियुक्त किया गया है। महिला के साथ उसका बेटा भी रहता है।
महिला ने आरोप लगाया है कि उन्हें बेटे के साथ आश्रम में बंधक बनाकर रखा जाता है और वेतन भी नहीं दिया जाता है। शुक्रवार को इसकी सूचना मिलने पर पुलिस टीम के साथ पहुंचे एसएसआई सतीश कापड़ी ने मामले की जानकारी जुटाई। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया महिला के आरोप निराधार मालूम पड़ रहे हैं। उन्हें महीने में पांच हजार रुपये वेतन भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि आश्रम की संचालिका मौके पर नहीं थी। एसएसआई ने कहा कि पुलिस को इस मामले में अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है। इधर, एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया मामले की जांच की जा रही है।
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आश्रम संचालिका का पक्ष
सभी आरोप निराधार हैं। किसी को कभी भी बंधक नहीं बनाया गया। महिला नौ महीने से काम कर रही थी। उसके किसी परिचित व्यक्ति के बार-बार आश्रम में आने के कारण उसे काम करने से मना कर दिया गया था। वह दोबारा काम में रखने का दबाव डाल रही थी। न रखने पर आरोप लगाए गए हैं। उसका सारा पैसा एकाउंट में डाला जाता था।
-सीमा सिंह, आश्रम संचालिका
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पुलिस के मुताबिक शांति विहार कॉलोनी में एक वृद्धा आश्रम चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आश्रम में एक महिला को खाना बनाने और आश्रम के अन्य कामों के लिए नियुक्त किया गया है। महिला के साथ उसका बेटा भी रहता है।
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महिला ने आरोप लगाया है कि उन्हें बेटे के साथ आश्रम में बंधक बनाकर रखा जाता है और वेतन भी नहीं दिया जाता है। शुक्रवार को इसकी सूचना मिलने पर पुलिस टीम के साथ पहुंचे एसएसआई सतीश कापड़ी ने मामले की जानकारी जुटाई। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया महिला के आरोप निराधार मालूम पड़ रहे हैं। उन्हें महीने में पांच हजार रुपये वेतन भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि आश्रम की संचालिका मौके पर नहीं थी। एसएसआई ने कहा कि पुलिस को इस मामले में अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है। इधर, एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया मामले की जांच की जा रही है।
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आश्रम संचालिका का पक्ष
सभी आरोप निराधार हैं। किसी को कभी भी बंधक नहीं बनाया गया। महिला नौ महीने से काम कर रही थी। उसके किसी परिचित व्यक्ति के बार-बार आश्रम में आने के कारण उसे काम करने से मना कर दिया गया था। वह दोबारा काम में रखने का दबाव डाल रही थी। न रखने पर आरोप लगाए गए हैं। उसका सारा पैसा एकाउंट में डाला जाता था।
-सीमा सिंह, आश्रम संचालिका