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जांच के दायरे में आए पूर्व कर्मचारियों से होगी पूछताछ
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रुद्रपुर। धोखाधड़ी के आरोप में जेल भेजे गए आकांक्षा ऑटोमोबाइल कंपनी के पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव मैनेजर समेत चार कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जेल भेजे गए आरोपियों को रिमांड में लेकर एसआईटी इंस्पेक्टर पूछताछ कर सकते हैं। वहीं, फरार दो आरोपियों के खिलाफ जल्द कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि फरवरी 2020 में आकांक्षा ऑटोमोबाइल कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट तजिंदर सिंह ने ट्रांजिट कैंप थाने में तहरीर देकर कंपनी के पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव मैनेजर मनोज प्रधान, सुखदेव सिंह, बबलू राम और सुखदीप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। आरोप था कि चारों ने एकराय होकर केनरा बैंक बाजपुर और इंडियन ओवरसीज बैंक रुद्रपुर से ग्राहकों को कार के लिए लोन दिलाने के नाम पर 27 लाख 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी की थी।
ग्राहकों से कमीशन लेने के बाद उसमें हेरफेर की जाती थी। मामले की जांच कर रहे एसआईटी इंस्पेक्टर केएस कुंवर ने फरार पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव मैनेजर और सुखदेव सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन्होंने बताया कि फरार आरोपियों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई करने के लिए कोर्ट में आवेदन की तैयारी की जा रही है। जेल भेजे गए दोनों पूर्व कर्मचारियों को रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ की जा सकती है। इधर, कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट तजिंदर सिंह का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कंपनी ने खुद मुकदमा दर्ज कराया था। धोखाधड़ी का आरोप लगते ही सभी को कंपनी से बाहर कर दिया गया था।
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बता दें कि फरवरी 2020 में आकांक्षा ऑटोमोबाइल कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट तजिंदर सिंह ने ट्रांजिट कैंप थाने में तहरीर देकर कंपनी के पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव मैनेजर मनोज प्रधान, सुखदेव सिंह, बबलू राम और सुखदीप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। आरोप था कि चारों ने एकराय होकर केनरा बैंक बाजपुर और इंडियन ओवरसीज बैंक रुद्रपुर से ग्राहकों को कार के लिए लोन दिलाने के नाम पर 27 लाख 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी की थी।
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ग्राहकों से कमीशन लेने के बाद उसमें हेरफेर की जाती थी। मामले की जांच कर रहे एसआईटी इंस्पेक्टर केएस कुंवर ने फरार पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव मैनेजर और सुखदेव सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन्होंने बताया कि फरार आरोपियों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई करने के लिए कोर्ट में आवेदन की तैयारी की जा रही है। जेल भेजे गए दोनों पूर्व कर्मचारियों को रिमांड पर लेकर दोबारा पूछताछ की जा सकती है। इधर, कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट तजिंदर सिंह का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कंपनी ने खुद मुकदमा दर्ज कराया था। धोखाधड़ी का आरोप लगते ही सभी को कंपनी से बाहर कर दिया गया था।
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