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Udham Singh Nagar News: काशीपुर के आठ मोहल्लों में दूषित पानी हो रहा सप्लाई

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 10:42 PM IST
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Contaminated water is being supplied in eight localities of Kashipur.
काशीपुर। बीते दिनों इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई थी और कई लोग बीमार हो गए थे। इसी तरह काशीपुर शहर के आठ मोहल्लों में दूषित पानी की सप्लाई की शिकायतें जल संस्थान के पास आ रही हैं। यहां दशकों पुरानी पाइप लाइन पड़ी होने से कई बार लीकेज की समस्या बन रही है। इसके चलते कई बार नलों से दूषित पानी घराें में आने लगता है जिससे इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग पेट से संबंधित रोगों की चपेट में आ रहे हैं। समय रहते सुधार नहीं होने पर भविष्य के लिए खतरा साबित हो सकता है।
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शहरी क्षेत्र में पांच दशक पूर्व जल आपूर्ति के लिए करीब 46 किमी पेयजल लाइनें बिछाई गई थीं। इसी से उपभोक्ताओं के घरों में पानी की आपूर्ति हो रही है। बीते चार साल से अमृत योजना के तहत करीब 16 किमी नई पाइप लाइनें बिछाई गई है। अभी भी शहर में करीब 30 किमी पुरानी लाइनें बिछी है। इन क्षेत्रों में आए दिन लीकेज व पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने की समस्या बनी रहती है।
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इससे पानी की बर्बादी होती है। साथ ही, गंदा पानी लोगों के घरों में पहुंच जाता है। इसे पीने से लोगों में पेट से संबंधित बीमारियां हो रही हैं। ऐसी समस्या लेकर कई मरीज रोज अस्पताल की ओर रुख कर रहे हैं। इन क्षेत्रों से जल संस्थान के पास हर महीने 50-60 शिकायतें ऑनलाइन और ऑफलाइन दर्ज हो रही हैं। इनमें दो-तीन शिकायतें दूषित पानी की भी होती हैं।
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इन क्षेत्रों में बिछी हैं पुरानी लाइनें
काजीबाग, कटोराताल, किला, बांसफोड़ान, औझान, महेशपुरा, लाहोरियान, खत्रियान आदि क्षेत्रों में पांच दशक पुरानी पेयजल लाइनें बिछी हुई हैं। यहां से गंदे पानी की महीने में दो-तीन शिकायतें जल संस्थान के पास पहुंचती हैं।
कोट:
दूषित पानी पीने से डायरिया (उल्टी-दस्त), पीलिया, आंव आना (डिसेंट्री), पेशाब में इन्फेक्शन, टाइफाइड बुखार आदि रोग होने की संभावना रहती है। ओपीडी में 30 प्रतिशत पेट रोगी आ रहे हैं। काजीबाग, महेशपुरा, औझान, अल्ली खां, कटोराताल आदि क्षेत्रों से पेट रोगी आते हैं। इन रोगों से बचने के लिए पानी उबाल कर पीना चाहिए। - डॉ. अमरजीत सिंह साहनी, चिकित्साधिकारी, सरकारी अस्पताल काशीपुर



कोट:
शहर में करीब 46 किमी में से करीब 30 किमी पुरानी पेयजल लाइनें बिछी हैं। महीने में करीब 50-60 शिकायतें आती हैं। इनमें से 2-3 शिकायतें दूषित पानी की भी होती हैं। समय से शिकायतों का निस्तारण कर दिया जाता है। - नरेंद्र सिंह रिखाड़ी, सहायक अभियंता, जल संस्थान काशीपुर
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