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Udham Singh Nagar News: ठंड का कहर... पारा लुढ़ककर <bha>@</bha> 1.1 डिग्री सेल्सियस

Fri, 16 Jan 2026 01:48 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Fri, 16 Jan 2026 01:48 AM IST
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Cold wave wreaks havoc... mercury drops to 1.1 degrees Celsius
पंतनगर। मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी सच साबित हुई और पारा बृहस्पतिवार को दो अंक लुढ़ककर 1.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस हाड़ कंपाती ठंड ने आम जनमानस की दिनचर्या पर ब्रेक लगाते हुए उन्हें घरों में ही दुबकने पर मजबूर कर दिया है।
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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अजित सिंह नैन ने इस दौरान पाला पड़ने की संभावनाओं से भी इन्कार नहीं किया है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वह अपनी फसलों के बचाने के लिए भरपूर सिंचाई करें, क्योंकि पाले के दौरान हल्की सिंचाई फसलों के लिए लाभ की जगह नुकसानदेह होती है। बताया कि प्रशांत महासागर में हल्का पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है लेकिन इसका कोई असर उत्तराखंड में नहीं दिखाई देगा। 15 जनवरी बीतने के बावजूद ठंड के सीजन में बारिश नहीं होने से सभी फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि आने वाले दिनों में बारिश होने से स्थितियां बदल भी सकती हैं।
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-इन्सेट
थमेगी पौधों की बढ़वार
डॉ. नैन ने बताया कि आधी जनवरी बीतने के बावजूद बारिश नहीं होने से लगभग सभी फसलों (अनाज, दलहन, तिलहन, फलों व सब्जी वर्गीय) का उत्पादन प्रभावित होगा। पत्तियों पर जमी धूल साफ नहीं होगी। जिसके चलते फोटो सिंथेसिस की कमी से पौधों की बढ़वार तो रुकेगी ही, फसलों में बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ेगा। बताया कि बारिश होने से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन पौधों को मिल जाता है। जबकि बारिश न होने से पौधों में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है। जिससे खेत में अतिरिक्त नाइट्रोजन डालनी पड़ती है, अन्यथा फसलोत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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इन्सेट
एक्यूआई भी होगा प्रभावित
डाॅ. नैन ने बताया कि बारिश नहीं होने से पर्यावरण पर भी कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं। जिनमें सबसे मुख्य है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बहुत बढ़ जाता है। क्योंकि पत्तियों पर धूल जमने के कारण पौधों के स्टोमेटा अपना फंक्शन ढंग से नहीं कर पाते हैं। जिससे फोटोसिंथेसिस पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बारिश से धूल साफ हो जाती है और पौधे फोटोसिंथेसिस क्रिया ढंग से कर पाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का एक्सचेंज भी अच्छा होता है। बारिश नहीं होने से सिंचाई का खर्च तो बढ़ता ही है, धन, ऊर्जा और इकोलाॅजी का भी ह्रास होता है। इतना ही नहीं, पंपसेट आदि चलने से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी बढ़ जाता है, जो हवा प्रदूषित करने में कारक बनता है।

-इन्सेट
बीमारियों का बढ़ता है प्रकोप
डाॅ. नैन ने बताया कि बारिश में बीमारियों के कीटाणु धुल जाते हैं। जिससे पौधों में बीमारी का प्रकोप बहुत कम हो जाता है। बारिश नहीं होने और क्लाउड कवर रहने से पौधे अंडर स्ट्रस रहते हैं। जिससे उनमें बीमारी की संभावना बहुत बढ़ जाती है।


इन्सेट
अभी पांच दिन बारिश के कोई आसार नहीं
डाॅ. नैन ने बताया कि अभी अगले पांच दिन बारिश की कोई संभावना नहीं है। घने कोहरे के बीच ठंड बनी रहेगी। इस दौरान अधिकतम तापमान 12-15 डिग्री और न्यूनतम तापमान और 1-5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हवा उत्तर-उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम-पश्चिम और पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में 4-6 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की उम्मीद है। कुछ जगहों पर घने कोहरे और ठंड के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है।


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