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रायल्टी सस्ती करो, भाड़ा बढ़ाओ
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शांतिपुरी में स्टोन क्रशर संचालकों से बात करते गौला संघर्ष समिति के अध्यक्ष।
- फोटो : RUDRAPUR
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गौला नदी में खनन शुरू होते ही वाहन स्वामियों की हड़ताल शुरू हो गई है। यहां शांतिपुरी, लालकुआं, हल्दूचौड़ और देवरामपुर सहित तमाम खनन निकासी गेटों पर वाहन स्वामियों ने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। वाहन स्वामियों का कहना है कि जब तक सरकार रॉयल्टी के दाम कम नहीं करती और उन्हें भाड़ा बढ़ाकर नहीं मिलता, तब तक खनन कार्य में वाहन नहीं भेजेंगे।
गौला नदी से होने वाले खनन व्यवसाय से लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पाते हैं। खनन से सरकार को भी भारी राजस्व मिलता है। गौला संघर्ष समिति लालकुआं निकासी गेट के अध्यक्ष जीवन कबडवाल ने बताया कि गौला और नंधौर नदी की रॉयल्टी 35 रुपये है, जबकि अन्य क्षेत्रों की नदियों की रॉयल्टी इससे काफी कम है। वहीं पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की वजह से भी वाहन स्वामियों को फायदा नहीं हो पा रहा है।
इसके अलावा सरकार ने समतलीकरण के नाम पर स्टोन क्रशर स्वामियों को गड्ढा खोदने की अनुमति दे दी है, जिसकी रॉयल्टी की कीमत लगभग आठ रुपये है। ऐसे में जब क्रशर स्वामियों को सस्ता उपखनिज गड्ढों से मिल रहा है तो वह नदियों से उपखनिज क्यों लेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नदियों में खनन गेट में वाहन नहीं जाने को लेकर वन विभाग व निगम की तरफ से कोई दबाव नहीं है।
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विभाग से गेट खोलने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। मगर वाहन स्वामियों को जब उनकी लागत का पैसा भी वसूल नहीं हो पाएगा तो वह अपने वाहन नदी में क्यों भेजेंगे। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले पर तत्काल हस्तक्षेप कर वाहन स्वामियों एवं खनन व्यवसाय से जुड़े मजदूरों के हितों का ध्यान रखकर काम करे। वहीं गोला स्टोन क्रेशर पर वाहन स्वामियों ने एक ओवरलोड डंपर रोका, जिसमें 90 क्विंटल की रॉयल्टी थी। अध्यक्ष जीवन कबडवाल ने कहा कि शांतिपुरी क्षेत्र में बड़ी भारी मात्रा में अवैध खनन चल रहा है, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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गौला नदी से होने वाले खनन व्यवसाय से लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पाते हैं। खनन से सरकार को भी भारी राजस्व मिलता है। गौला संघर्ष समिति लालकुआं निकासी गेट के अध्यक्ष जीवन कबडवाल ने बताया कि गौला और नंधौर नदी की रॉयल्टी 35 रुपये है, जबकि अन्य क्षेत्रों की नदियों की रॉयल्टी इससे काफी कम है। वहीं पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की वजह से भी वाहन स्वामियों को फायदा नहीं हो पा रहा है।
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इसके अलावा सरकार ने समतलीकरण के नाम पर स्टोन क्रशर स्वामियों को गड्ढा खोदने की अनुमति दे दी है, जिसकी रॉयल्टी की कीमत लगभग आठ रुपये है। ऐसे में जब क्रशर स्वामियों को सस्ता उपखनिज गड्ढों से मिल रहा है तो वह नदियों से उपखनिज क्यों लेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नदियों में खनन गेट में वाहन नहीं जाने को लेकर वन विभाग व निगम की तरफ से कोई दबाव नहीं है।
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विभाग से गेट खोलने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। मगर वाहन स्वामियों को जब उनकी लागत का पैसा भी वसूल नहीं हो पाएगा तो वह अपने वाहन नदी में क्यों भेजेंगे। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले पर तत्काल हस्तक्षेप कर वाहन स्वामियों एवं खनन व्यवसाय से जुड़े मजदूरों के हितों का ध्यान रखकर काम करे। वहीं गोला स्टोन क्रेशर पर वाहन स्वामियों ने एक ओवरलोड डंपर रोका, जिसमें 90 क्विंटल की रॉयल्टी थी। अध्यक्ष जीवन कबडवाल ने कहा कि शांतिपुरी क्षेत्र में बड़ी भारी मात्रा में अवैध खनन चल रहा है, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।