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पापा के मैसेज से बढ़ता था हौसला
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यूक्रेन से घर पहुंची मिताली बिष्ट का स्वागत करते परिजन। संवाद
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा। ‘मेरी बेटी शेरनी है। किसी से डरना नहीं। पापा के रोजाना मिल रहे इस तरह के मैसेज से मेरे हौसले बुलंद रहे। तमाम परेशानियों में भी घर आने की राह आसान लगी।’ यह कहना है यूक्रेन से लौटी मिताली बिष्ट का। वह युद्धग्रस्त क्षेत्र से जूझती हुई शुक्रवार की शाम अपने घर टनकपुर रोड अमाऊं पहुंची। मां-पिता, दादा-दादी व चाचा-चाची एवं भाई बहनों से गले मिली। परिजन भी मिताली को गले लगा खुशी के आंसू न रोक सके।
मिताली पोलटेव मेडिकल कालेज स्टेट यूनीवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है। मिताली अपने अन्य साथियों के साथ बंकर में रही। तीन दिन बाद निजी खर्च पर हंगरी बॉर्डर आई और यहां से भारत सरकार की फ्लाइट से शुक्रवार की सुबह दिल्ली पहुंची। घर लौटने पर दीये जलाकर खुशी मनाई गई।
मिताली ने कहा कि उसके पापा का रोज मैसेज आता था, जिसमें वह उनकी हौंसला अफजाई करते थे। बताया कि धमाकों की आवाजों से दहशत भरे दिन बीते हैं। जब भी हमला होता और धमाकों की आवाज आती तो परिजनों से फोन पर बात कर अपने दिल को समझा लेती थी। ऐसा लगता था कि भारत की सरकार कुछ भी नहीं है और न ही कोई व्यवस्था है।
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मिताली पोलटेव मेडिकल कालेज स्टेट यूनीवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है। मिताली अपने अन्य साथियों के साथ बंकर में रही। तीन दिन बाद निजी खर्च पर हंगरी बॉर्डर आई और यहां से भारत सरकार की फ्लाइट से शुक्रवार की सुबह दिल्ली पहुंची। घर लौटने पर दीये जलाकर खुशी मनाई गई।
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मिताली ने कहा कि उसके पापा का रोज मैसेज आता था, जिसमें वह उनकी हौंसला अफजाई करते थे। बताया कि धमाकों की आवाजों से दहशत भरे दिन बीते हैं। जब भी हमला होता और धमाकों की आवाज आती तो परिजनों से फोन पर बात कर अपने दिल को समझा लेती थी। ऐसा लगता था कि भारत की सरकार कुछ भी नहीं है और न ही कोई व्यवस्था है।
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