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चिप्स और पानी से मिटाई भूख, सर्द रातें खुले में गुजारीं
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यूक्रेन से घर लौटे भजन सिंह माता-पिता के साथ। संवाद
- फोटो : KHATIMA
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खटीमा। यूक्रेन से घर लौटे छात्र भजन ने युद्घ के दौरान झेली परेशानियों और वहां के हालातों को बयां किया। झनकट निवासी भजन सिंह ने करीब आठ दिन तक वतन लौटने के लिए कड़ा संघर्ष किया। चिप्स एवं पानी के सहारे दिन गुजारे। माइनस आठ डिग्री तापमान में खुले आसमान के नीचे रातें बिताईं। उन्होंने यूक्रेन में करीब 60 किमी पैदल चलकर हंगरी बॉर्डर पर शरण ली थी।
झनकट गांव के जोगेंद्र सिंह का बेटा भजन यूक्रेन के टरनोपिल नेशनल मेडिकल कालेज तृतीय वर्ष का छात्र है। शनिवार को भजन के घर पर परिवार में खुशी का माहौल था। भजन ने बताया कि 24 फरवरी से गोलाबारी से हॉस्टल में अफरा तफरी का माहौल रहा। यूक्रेन सरकार उन्हें गुमराह करती रही कि युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं है।
हमले के बाद भजन अपने ढाई सौ से अधिक छात्र-छात्राओं के साथ स्वदेश के लिए भूखे प्यासे हंगरी बॉर्डर की तरफ निकल पड़े और हंगरी से तीन मार्च को फ्लाइट से चार मार्च को दिल्ली पहुंचे। उत्तराखंड सरकार की व्यवस्था से 4 मार्च को फ्लाइट से चार मार्च को दिल्ली पहुंचे। उत्तराखंड सरकार की व्यवस्था से 4 मार्च देर शाम घर पहुंचे। भजन के घर पहुंचते ही उसकी माता स्वर्ण कौर ने उसे गले लगाया। इसके बड़े भाई बल्देव एवं बलजीत ने फूलमाला पहनाकर उसका स्वागत किया।
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झनकट गांव के जोगेंद्र सिंह का बेटा भजन यूक्रेन के टरनोपिल नेशनल मेडिकल कालेज तृतीय वर्ष का छात्र है। शनिवार को भजन के घर पर परिवार में खुशी का माहौल था। भजन ने बताया कि 24 फरवरी से गोलाबारी से हॉस्टल में अफरा तफरी का माहौल रहा। यूक्रेन सरकार उन्हें गुमराह करती रही कि युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं है।
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हमले के बाद भजन अपने ढाई सौ से अधिक छात्र-छात्राओं के साथ स्वदेश के लिए भूखे प्यासे हंगरी बॉर्डर की तरफ निकल पड़े और हंगरी से तीन मार्च को फ्लाइट से चार मार्च को दिल्ली पहुंचे। उत्तराखंड सरकार की व्यवस्था से 4 मार्च को फ्लाइट से चार मार्च को दिल्ली पहुंचे। उत्तराखंड सरकार की व्यवस्था से 4 मार्च देर शाम घर पहुंचे। भजन के घर पहुंचते ही उसकी माता स्वर्ण कौर ने उसे गले लगाया। इसके बड़े भाई बल्देव एवं बलजीत ने फूलमाला पहनाकर उसका स्वागत किया।
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