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Udham Singh Nagar News: बॉर्डर पर गोलियां बरसती रहीं, घर में बुझ गया चिराग... फिर भी मोर्चे से नहीं हटे रणवीर

Sun, 26 Jul 2026 12:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Sun, 26 Jul 2026 12:10 AM IST
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Bullets rained down on the border, the light went out at home... yet Ranveer remained unmoved.
रुद्रपुर। कारगिल विजय दिवस पर देश जहां 1999 के ऐतिहासिक युद्ध के वीरों को याद कर रहा है, वहीं रुद्रपुर के कारगिल योद्धा रणवीर सिंह का संघर्ष और त्याग आज भी लोगों को भावुक कर देता है। कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए उन्होंने न केवल युद्ध का सामना किया बल्कि निजी जीवन के सबसे बड़े दर्द को भी अपने सीने में दफन रखा।
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उस समय 35 वर्षीय रणवीर सिंह की पत्नी वीनस, बेटी अनीता और छोटा बेटा धीरज रुद्रपुर में रहते थे। युद्ध के दौरान उनका बेटा गंभीर रूप से बीमार हो गया। परिवार ने किसी तरह इसकी सूचना रणवीर सिंह तक पहुंचाई लेकिन सीमा पर तैनात सैनिक के सामने राष्ट्रधर्म और पारिवारिक जिम्मेदारी के बीच कठिन परीक्षा थी। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा को सर्वोपरि मानते हुए मोर्चा नहीं छोड़ा। बेटी अनीता के बताया कि समय पर उपचार नहीं मिलने से धीरज की मौत हो गई।
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परिवार पर दुखों के टूट पहाड़ के बाद भी रणवीर सिंह ने देश सेवा का संकल्प अंत तक निभाया और पांच अक्तूबर 2024 को उनका निधन हो गया। आज भी उनका परिवार उस के समय को याद करके भावुक हो जाता है। जब वह युद्ध में गए थे और पत्नी एक तरफ पति कुशल घर वापसी की प्रार्थना कर रहीं थी और दूसरी और उनका बेटा बीमार था लेकिन वीर जवान की पत्नी होने के कारण उन्होंने अपने दुख और आंसू को एक तरफ कर अपना फर्ज निभाया। संवाद
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कारगिल की गोलाबारी ने छीन ली सुनने की क्षमता, लेकिन हौसला नहीं
अनीता के अनुसार, कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों की लगातार गोलाबारी और भीषण धमाकों के बीच रणवीर सिंह कई दिनों तक मोर्चे पर डटे रहे। युद्ध की भयावह परिस्थितियों का असर उनकी सुनने की क्षमता पर पड़ा और उन्होंने हमेशा के लिए अपनी श्रवण शक्ति खो दी। इसके बावजूद उन्होंने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। युद्ध समाप्त होने के बाद भी उन्होंने सैनिक का अनुशासन और जज्बा कायम रखा। रणवीर सिंह का जीवन इस बात की मिसाल है कि सच्चा सैनिक शारीरिक पीड़ा से नहीं, बल्कि अपने अटूट साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण से पहचाना जाता है।
कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे कुंडेश्वरी के दो जांबाज
आज कुंडेश्वरी चौक पर दोनों को शहीदों को दी जाएगी श्रद्धांजलि
काशीपुर। कारगिल युद्ध में काशीपुर के कुंडेश्वरी निवासी दो जांबाज शहीद हुए थे। दोनों गढ़वाल रेजीमेंट से थे। हर साल उत्तराखंड पूर्व सैनिक संघ की ओर से कुंडेश्वरी में दोनों शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
कुंडेश्वरी निवासी शहीद अमित नेगी अविवाहित थे। उनका एक भाई और एक बहन है। वह जब शहीद हुए तब उनका भाई और बहन दोनों नाबालिग थे। शहीद अमित नेगी के भाई सुमित नेगी ने बहन का विवाह करा दिया और अपना भी घर बसा लिया। सुमित नेगी को पेट्रोल पंप स्वीकृत हुआ जो मंडी तिराहा जसपुर रोड पर है। उनको जो पैसा मिला था उसकी उन्होंने थोड़ी जमीन खरीदी और मकान बना लिया।
सुमित नेगी का घर कुंडेश्वरी तिराहे के पास एस्कॉर्ट फार्म रोड पर है लेकिन घर जाने के लिए मात्र 50 मीटर का कच्चा रास्ता है। सरकार ने वह रास्ता अभी तक पक्का नहीं बनाया। सुमित ने बताया कि वह कई साल से ग्राम प्रधान से लेकर विधायक तक से सड़क बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक किसी ने सड़क नहीं बनाई है।

दूसरी ओर, कुंडेश्वरी निवासी पदम राम 19 जून 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। वह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए। उनकी पत्नी भगवती देवी के अनुसार, उनके पति जब शहीद हुए तब उनकी तीन पुत्रियां और एक पुत्र था, सभी नाबालिग थे। उन्होंने दो पुत्रियों को पढ़ा-लिखाकर विवाह करा दिया है। पुत्र का भी विवाह हो गया है। पति के शहीद होने पर उनको एक पेट्रोल पंप स्वीकृत हुआ था जो ठाकुरद्वारा रोड पर स्थित है। उनका पुत्र विक्की कन्याल पेट्रोल पंप को देख रहा है। उत्तराखंड पूर्व सैनिक संघ के महासचिव सूबेदार मेजर त्रिलोक सिंह नेगी ने बताया कि शौर्य (कारगिल) दिवस समारोह रविवार को शहीद चौक कुंडेश्वरी में सुबह किया जाएगा।
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