BJP में उभरने शुरू हुए नेताओं के बगावती तेवर: इस सीट से भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष उमा ने किया नामांकन
भाजपा की ओर से जिपं सीटों पर अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद बगावती सुर उठने शुरू हो गए हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा काशीपुर की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष उमा जोशी ने नामांकन दाखिल कर दिया।
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भाजपा की ओर से जिपं सीटों पर अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद बगावती सुर उठने शुरू हो गए हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा काशीपुर की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष उमा जोशी ने नामांकन दाखिल कर दिया। इसके अलावा खानपुर पूर्व से पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश बजाज की पत्नी व पूर्व बीडीसी ममता रानी बजाज ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। पार्टी नेता दोनों के मानमनोव्वल में जुटे हैं।
भाजपा के काशीपुर जिले में शामिल हरसान सीट पर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष उमा जोशी टिकट की मांग कर रही थी। वे अपना टिकट पक्का मान रही थी और काफी दिनों से जनसंपर्क भी शुरू कर दिया था। उनके क्षेत्र में जनसंपर्क का वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड हो रहे थे। बृहस्पतिवार को जिलाध्यक्ष मनेाज पाल ने सूची जारी की तो हरसान से कमल भट्ट को समर्थित प्रत्याशी घोषित किया गया था। यह उमा को झटका माना जा रहा था। उमा ने सोशल मीडिया पर जितना दबाने की कोशिश करोगे, उतना उभरकर सामने आऊंगी पोस्टल लिखकर इरादे जाहिर किए थो। शुक्रवार को उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर नामांकन दाखिल कर पार्टी में हलचल खड़ी कर दी।
खानपुर सीट पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश बजाज अपनी पत्नी व पूर्व बीडीसी ममता रानी बजाज के लिए टिकट की पैरवी कर रहे थे। उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया था। पहली सूची में उनकी सीट का नाम नहीं था। दूसरी सूची जारी हुई तो उसमें निवर्तमान जिपं सदस्य अमिता विश्वास को समर्थित प्रत्याशी घोषित किया गया था। पिछले चुनाव में अमिता निर्दलीय जीती थी और ममता भाजपा प्रत्याशी थी। टिकट नहीं मिलने पर शुक्रवार को राजेश बजाज ने पत्नी का जिला पंचायत कार्यालय में नामांकन कराया। दोनों सीटों पर बगावती सुरों से पार्टी और घोषित समर्थित प्रत्याशियों में हलचल देखी जा रही है।
खानपुर पूर्व से ममता रानी बजाज ने पर्चा दाखिल किया है और प्रतापपुर से रोशन सिंह के कांग्रेस में शामिल होकर पर्चा भरने की जानकारी मिली है। दोनों से बात की जाएगी और मनाने की पूरी कोशिश होगी। कमल जिंदल, जिलाध्यक्ष, ऊधमसिंहनगर।
बेहड़ की पैरवी पर हाईकमान की मुहर
कांग्रेस में नेताओं की नाक की लड़ाई में फंसी कुरैया सीट पर हाईकमान ने फैसला लेते हुए किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ की पैरवी वाले प्रत्याशी सुनीता सिंह के नाम पर मुहर लगा दी। हाईकमान के झटके के बावजूद पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष संदीप चीमा ने अपनी भतीजी अमनदीप कौर का नामांकन कराकर इरादे जाहिर कर दिए। अमनदीप अगर मैदान पर उतरती हैं तो कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के लिए सीट की राह बेहद मुश्किल रहेगी।
कांग्रेस में अंदरखाने कुरैया सीट काे लेकर खींचतान हो रही थी और सीट को लेकर पार्टी में सीधे दो गुट बन गए थे। विधायक बेहड़ ने सुनीता सिंह की पैरवी की थी। दो बार से सीट पर काबिज संदीप अपनी भतीजी के लिए टिकट मांग रहे थे। बताया जा रहा है कि दोनों ही पक्षों केलिए तमाम बड़े नेता बंट गए थे। यहां तक ही दिग्गज नेता ने इस्तीफे की धमकी तक हाईकमान को दे दी थी। विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने जोखिम लेना उचित नहीं समझा तो बेहड़ की मन की बात मान ली। इधर संदीप की भतीजी का नामांकन होने से सीट पर समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। हाईकमान की ओर से संदीप को मनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। शनिवार को नामांकन का आखिरी दिन बेहद अहम होगा। संदीप का कहना है कि फिलहाल भतीजी का नामांकन करा दिया गया है। परिस्थितियों के अनुसार समर्थकों से राय मशविरा कर फैसला लिया जाएगा। इधर चीमा की भतीजी के नामांकन पर विधायक बेहड़ ने कहा कि किसी को ऐतराज नहीं है। सिंबल जमा नहीं होता है और पर्चा कोई भी दाखिल कर सकता है। उसके बाद निर्णय लेना होता है। कुरैया सीट पर भाजपा को एक बार ही जीत मिली है। भाजपा के धनबल का जवाब जनता वोट से देगी।
वोटर सूची पर गड़बड़ी पर हाईकोर्ट जाएंगे: बेहड़
विधायक बेहड़ ने आरोप लगाया कि राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों के साथ धोखा कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव की तरह गांव में सूचियों में सैकड़ों नाम गायब किए गए है। यह सोची समझी साजिश के तहत किया गया है। भाजपा के प्रत्याशी है कि उन्होंने रुद्रपुर, लालपुर सहित अन्य जगहों पर निकाय चुनाव में वोट डाला था। अब वही वोट गांव में भी स्टैंड कर रहे हैं। छह महीने के भीतर ऐसा नहीं हो सकता है। इस मामले में हाईकोर्ट जाएंगे और निर्वाचन आयुक्त को पार्टी बनाएंगे। डीएम स्तर से मतदाता सूचियों के गड़बड़ियों की शिकायत की जांच के बाद पुष्टि हो चुकी है कि कई लोगों के वोट दो जगहों पर हैं। लेकिन जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद भी निर्वाचन आयोग ने फैसला नहीं लिया। नए नाम शामिल करने और नाम काटे जाने से रोक दिया। आयोग भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहा है। अदालत में निर्वाचन आयोग के खिलाफ केस बेहड़ लड़ेंगे।