{"_id":"62683c7310da75340a6b8190","slug":"action-on-manrega-staff-in-rudrapur-rudrapur-news-hld4607327190","type":"story","status":"publish","title_hn":"शासन ने तीन जीआईएस एक्सपर्ट व पांच एनआरएम समन्वयक को हटाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शासन ने तीन जीआईएस एक्सपर्ट व पांच एनआरएम समन्वयक को हटाया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुद्रपुर। मनरेगा की ओर से प्राकृतिक स्रोत संवर्धन को बढ़ावा देने और लोगों को आजीविका से जोड़ने के लिए जिले में रखे गए तीन जीआईएस एक्सपर्ट व पांच एनआरएम समन्वयकों को शासन ने हटा दिया है। इसके चलते जिले में सूख चुके 32 डीप ट्यूबवेल व हैंडपंप भी रिचार्ज नहीं हो सके।
मनरेगा की ओर से कलस्टर सुविधा परियोजना के तहत जिले में पांच एनआरएम (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) समन्वयक और दो जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) एक्सपर्ट को तैनात किया गया था। इसमें भौगोलिक सूचना प्रणाली के माध्यम से जिले में जलसंवर्धन का कार्य किया जाना था। दरअसल तराई में अंधाधुंध हो रहे पानी के दोहन से जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। इस कारण जिले में 32 डीप ट्यूबवेल और हैंडपंप से निकलने वाले जल स्रोत सूख गए हैं। इसके लिए एक्सपर्ट ने इनके आसपास रिचार्ज पिट और रिचार्ज सॉफ्ट का निर्माण कर दोबारा सूख चुके स्रोतों को जीवित करने की योजना बनाई थी, लेकिन शासन और यूएनडीपी संस्था की ओर से बांड खत्म होने के बाद इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। जिले में सूख चूके ट्यूबवेल व हैंडपंप अब तक रिचार्ज हुए भी या नहीं इसकी मॉनिटिरिंग भी नहीं की गई। जिला विकास अधिकारी डॉ. महेश कुमार ने कहा कि मनरेगा की ओर से इन्हें वेतन दिया जाता था। शासन व संस्था का बोंड खत्म होने के बाद जिले से इनकी सेवाएं समाप्त हो गईं हैं। बीते वर्ष छूट चुके कार्यों को इस वर्ष सम्मलित कर लिया गया है।
विज्ञापन
मनरेगा की ओर से कलस्टर सुविधा परियोजना के तहत जिले में पांच एनआरएम (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) समन्वयक और दो जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) एक्सपर्ट को तैनात किया गया था। इसमें भौगोलिक सूचना प्रणाली के माध्यम से जिले में जलसंवर्धन का कार्य किया जाना था। दरअसल तराई में अंधाधुंध हो रहे पानी के दोहन से जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। इस कारण जिले में 32 डीप ट्यूबवेल और हैंडपंप से निकलने वाले जल स्रोत सूख गए हैं। इसके लिए एक्सपर्ट ने इनके आसपास रिचार्ज पिट और रिचार्ज सॉफ्ट का निर्माण कर दोबारा सूख चुके स्रोतों को जीवित करने की योजना बनाई थी, लेकिन शासन और यूएनडीपी संस्था की ओर से बांड खत्म होने के बाद इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। जिले में सूख चूके ट्यूबवेल व हैंडपंप अब तक रिचार्ज हुए भी या नहीं इसकी मॉनिटिरिंग भी नहीं की गई। जिला विकास अधिकारी डॉ. महेश कुमार ने कहा कि मनरेगा की ओर से इन्हें वेतन दिया जाता था। शासन व संस्था का बोंड खत्म होने के बाद जिले से इनकी सेवाएं समाप्त हो गईं हैं। बीते वर्ष छूट चुके कार्यों को इस वर्ष सम्मलित कर लिया गया है।
विज्ञापन