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खटीमा में अभविप का सूपड़ा साफ
अमर उजाला ब्यूरो खटीमा
Updated Thu, 05 Oct 2017 12:40 AM IST
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चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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महाविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपने किसी भी प्रत्याशी को जिताने में कामयाब नहीं हो सकी। बुधवार को रिकॉर्ड मतदान के बाद विजयी प्रत्याशी या तो एनएसयूआई के हैं या निर्दलीय हैं। चुनाव घोषणा से एक दिन पूर्व अभाविप के निमंत्रण पर वार्षिकोत्सव में काबीना मंत्री प्रकाश पंत ने शामिल होकर समस्याओं के हल का आश्वासन दिया था। छात्रसंघ चुनाव में राजनैतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पिछले कई वर्षों में पहली बार हुआ है कि अभाविप का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका।
पहली बार छात्राओं ने दिखाया दम, तीन पद हथियाए
हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हर साल 60 से 70 प्रतिशत छात्राएं अध्ययनरत हैं लेकिन अबतक छात्रसंघ चुनाव में छात्रा उपाध्यक्ष पद के अलावा किसी भी पद पर चुनाव में उतरने का साहस नहीं कर सकीं और जिसने कदम उठाया उसे छात्राओं का साथ नहीं मिला। यह पहली बार है छात्राओं ने तीन पदों पर चुनाव लड़ा और उन्होंने तीनों पदों पर जीत हासिल कर आने वाले वर्षों की छात्र राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
कालेज की दिशा और दशा सुधारने में कारगर नहीं हो रहा छात्रसंघ
खटीमा। महाविद्यालय में लंबे समय से हो रहे चुनाव में बेहतर पठन पाठन का दावा तो किया जाता है लेकिन यह कभी परवान नहीं चढ़ सका है। इतना ही नहीं छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखने वाले छात्रनेता विभिन्न विभागों में ठेकेदारी करने तक ही सीमित रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशी अपने एजेंडे में तो इन समस्याओं को रखते हैं लेकिन जीतने के बाद वह कालेज की दशा और दिशा सुधारने में कारगर रहीं रहे सके हैं।
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पहली बार छात्राओं ने दिखाया दम, तीन पद हथियाए
हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हर साल 60 से 70 प्रतिशत छात्राएं अध्ययनरत हैं लेकिन अबतक छात्रसंघ चुनाव में छात्रा उपाध्यक्ष पद के अलावा किसी भी पद पर चुनाव में उतरने का साहस नहीं कर सकीं और जिसने कदम उठाया उसे छात्राओं का साथ नहीं मिला। यह पहली बार है छात्राओं ने तीन पदों पर चुनाव लड़ा और उन्होंने तीनों पदों पर जीत हासिल कर आने वाले वर्षों की छात्र राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
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कालेज की दिशा और दशा सुधारने में कारगर नहीं हो रहा छात्रसंघ
खटीमा। महाविद्यालय में लंबे समय से हो रहे चुनाव में बेहतर पठन पाठन का दावा तो किया जाता है लेकिन यह कभी परवान नहीं चढ़ सका है। इतना ही नहीं छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखने वाले छात्रनेता विभिन्न विभागों में ठेकेदारी करने तक ही सीमित रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशी अपने एजेंडे में तो इन समस्याओं को रखते हैं लेकिन जीतने के बाद वह कालेज की दशा और दिशा सुधारने में कारगर रहीं रहे सके हैं।
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