{"_id":"118-50257","slug":"Udham-singh-nagar-50257-118","type":"story","status":"publish","title_hn":"समस्याओं में पिस रहे शिमला पिस्तौर वाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समस्याओं में पिस रहे शिमला पिस्तौर वाले
Udham singh nagar
Updated Fri, 15 Feb 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन
रुद्रपुर। रुद्रपुर से करीब आठ किमी दूरी पर बसा शिमला पिस्तौर गांव। आबादी लगभग दो हजार। गांव में जगह-जगह पर गंदगी और कूड़े से पटी नालियां। इसके अलावा यहां कई लोगों के पास राशन कार्ड नहीं हैं। ग्रामीणों की मानें तो जनप्रतिनिधियों से लेकर ब्लाक के कई बार चक्कर लगा चुके हैं मगर नतीजा सिफर रहा है। उनका आरोप है कि राशन कार्ड बनाने के लिए दो से पांच हजार रुपये घूस ली जा रही है। लोगों का कहना है कि इंदिरा आवास योजना का भी यही हाल है। इंदिरा आवास की किश्त भी बगैर सुविधा शुल्क दिये नहीं मिलती है। वर्षों की मांग के बावजूद शिमला पिस्तौर से गंगापुर के लिए सड़क भी नहीं बन पाई है। इस गांव के अधिकांश लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है। यहां सिंचाई के लिए कच्ची नहर है, इसमें पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है।
राशन कार्ड के लिए देनी पड़ती है घूस
छोटे शाह ने बताया कि इंदिरा आवास तो मिला लेकिन अब ब्लाक के कर्मचारी इसकी किश्त देने के लिए सुविधा शुल्क मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सुविधा शुल्क नहीं देंगे चाहे किश्त न मिले। शरफुनिशां का कहना है कि उन्हें न तो शौचालय निर्माण के लिए मदद मिली और न ही इंदिरा आवास का लाभ। सोसोदार विश्वास ने बताया कि वह यहां वर्षों से रह रहे हैं मगर उन्हें पट्टा नहीं मिल पाया है। राजेश राजभर ने बताया कि राशन कार्ड नहीं बन पाया है। उनका कहना है कि कई बार ब्लाक के अफसरों के चक्कर काट रहे हैं मगर उन्हें टरकाया जा रहा है। आसीम ने बताया कि उन्हें राशन कार्ड बनवाने के लिए पांच हजार रुपये देने पड़े, तब जाकर राशन कार्ड मिला। महेश कुमार का कहना है कि उनके पास न रहने के लिए मकान है और न ही खेती के लिए जमीन। प्रधान हीना अहमद से बात करने पर उनके पति शाहीद अहमद ने बताया कि क्षेत्र में विकास कराया जा रहा है।
विज्ञापन
राशन कार्ड के लिए देनी पड़ती है घूस
छोटे शाह ने बताया कि इंदिरा आवास तो मिला लेकिन अब ब्लाक के कर्मचारी इसकी किश्त देने के लिए सुविधा शुल्क मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सुविधा शुल्क नहीं देंगे चाहे किश्त न मिले। शरफुनिशां का कहना है कि उन्हें न तो शौचालय निर्माण के लिए मदद मिली और न ही इंदिरा आवास का लाभ। सोसोदार विश्वास ने बताया कि वह यहां वर्षों से रह रहे हैं मगर उन्हें पट्टा नहीं मिल पाया है। राजेश राजभर ने बताया कि राशन कार्ड नहीं बन पाया है। उनका कहना है कि कई बार ब्लाक के अफसरों के चक्कर काट रहे हैं मगर उन्हें टरकाया जा रहा है। आसीम ने बताया कि उन्हें राशन कार्ड बनवाने के लिए पांच हजार रुपये देने पड़े, तब जाकर राशन कार्ड मिला। महेश कुमार का कहना है कि उनके पास न रहने के लिए मकान है और न ही खेती के लिए जमीन। प्रधान हीना अहमद से बात करने पर उनके पति शाहीद अहमद ने बताया कि क्षेत्र में विकास कराया जा रहा है।
विज्ञापन