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जिला प्रशासन और किसानों में तनातनी
Udham singh nagar
Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
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रुद्रपुर। पेड़ों के मुआवजे को लेेकर जिला प्रशासन और किसानों में खूब तनातनी हुई। बाद में हरिद्वार की तर्ज पर मुआवजा देने की सहमति बनी। इस पर किसान राजी हुए।
जिलाधिकारी बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में किसानों और गेल के अधिकारियों की बैठक कलक्ट्रेट सभागार में हुई। जिसमें किसानों ने गेल के अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। किसानों ने कहा कि इन दिनों गेल काशीपुर से रुद्रपुर के लिए गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य कर रहा है। जो किसान वर्ग-चार की भूमि (सरकारी भूमि) पर काबिज हैं, उनसे यह छीनी जा रही है और उसके बदले उन्हें मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा गैस पाइप लाइन के रास्ते में यूकेलिप्टस के जो हरे पेड़ आ रहे हैं। उन्हें काटने के बदले उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। इससे प्रभावित किसानों में रोष है। इस पर जिलाधिकारी कुमार ने कहा कि वर्ग-चार की जिस भूमि पर काश्तकार काबिज हैं। वह भूमि सरकार की है। गेल उस भूमि का मुआवजा सरकार के खाते में जमा करेगा। रही बात हरे पेड़ों कि तो इस तरह का एक मामला हरिद्वार में भी हुआ था। जहां के लिए सरकार ने पतले पेड़ों का 2500 रुपये और अधिकतम मोटे पेड़ों का पांच हजार रुपए मुआवजा राशि निर्धारित की थी। इसलिए यहां पर हरे पेड़ों के कटान के लिए अलग से नियम नहीं बनेगा और हरिद्वार की तर्ज पर किसानों को पेड़ों का मुआवजा दिया जाएगा। अपर जिलाधिकारी नजूल हरीशचंद्र कांडपाल ने बताया कि जिलाधिकारी की बात से किसान पूरी तरह से सहमत दिखे। इस मौके पर गेल के बीएस ओझा, एचपी श्रीवास्तव, अजय सेठी और किसान इंद्रजीत सिंह, कृष्णलाल, विशम्भर नाथ, जगजीत सिंह, अमरजीत सिंह, मंजीत सिंह, गुरमीत सिंह, सुक्खा सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में किसानों और गेल के अधिकारियों की बैठक कलक्ट्रेट सभागार में हुई। जिसमें किसानों ने गेल के अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। किसानों ने कहा कि इन दिनों गेल काशीपुर से रुद्रपुर के लिए गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य कर रहा है। जो किसान वर्ग-चार की भूमि (सरकारी भूमि) पर काबिज हैं, उनसे यह छीनी जा रही है और उसके बदले उन्हें मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा गैस पाइप लाइन के रास्ते में यूकेलिप्टस के जो हरे पेड़ आ रहे हैं। उन्हें काटने के बदले उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। इससे प्रभावित किसानों में रोष है। इस पर जिलाधिकारी कुमार ने कहा कि वर्ग-चार की जिस भूमि पर काश्तकार काबिज हैं। वह भूमि सरकार की है। गेल उस भूमि का मुआवजा सरकार के खाते में जमा करेगा। रही बात हरे पेड़ों कि तो इस तरह का एक मामला हरिद्वार में भी हुआ था। जहां के लिए सरकार ने पतले पेड़ों का 2500 रुपये और अधिकतम मोटे पेड़ों का पांच हजार रुपए मुआवजा राशि निर्धारित की थी। इसलिए यहां पर हरे पेड़ों के कटान के लिए अलग से नियम नहीं बनेगा और हरिद्वार की तर्ज पर किसानों को पेड़ों का मुआवजा दिया जाएगा। अपर जिलाधिकारी नजूल हरीशचंद्र कांडपाल ने बताया कि जिलाधिकारी की बात से किसान पूरी तरह से सहमत दिखे। इस मौके पर गेल के बीएस ओझा, एचपी श्रीवास्तव, अजय सेठी और किसान इंद्रजीत सिंह, कृष्णलाल, विशम्भर नाथ, जगजीत सिंह, अमरजीत सिंह, मंजीत सिंह, गुरमीत सिंह, सुक्खा सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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